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छात्रों से लाखों वसूलने वाले गलगोटिया ने चीन का रोबोट अपना बताकर बहुत चीप हरकत की है!

सौमित्र राय-

चोरी का माल बेचने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी के बीटेक कोर्स की फीस देखें। 4 साल के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलाइजेशन) कोर्स की फीस साढ़े 7 लाख से ज्यादा है। बदले में क्या मिलता है?

चीन में बने रोबोट को खरीदकर अपना बता देना और दुनिया को उल्लू समझना। यहां से पढ़कर निकले बच्चे चीन, अमेरिका या यूरोप की कोई खोज/डिजाइन चुराएंगे और उनकी कॉपी कर अपना बता देंगे।

लाखों की फीस भरने वाले जाहिल मां–बाप बच्चे पर निहाल हो जाएंगे…और नौकरी देने वाला भाजपिल्ला 90 डिग्री वाला फ्लाईओवर या हाईवे बनकर छाती पीटेगा। बेहतर है ऐसे बच्चों के लिए कोई रेहड़ी खोल दें।


गलगोटिया के साइंस फैकल्टी के कुछ नाम- प्रोफ़ेसर इस प्रकार है – डॉ. मनीष उपाध्याय, मीनू शर्मा, ऋतुपर्णा शर्मा, प्रियंका अग्रवाल, अशोक दुबे, अतुल पांडे, शिल्पी गुप्ता बाकि सभी जनरल हैं। देश का नाम नहीं खराब करना चाहिए था। खरीदना जुर्म नहीं है झूठ जुर्म है। -नेशनल दस्तक


तमाशा बना कर रख दिया है गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने। चाइना से खरीदे डॉग रोबोट को पहले अपनी फैसिलिटी में बना बताया। बाद में फजीहत हुई तो सच बोला। लाखों लोग सच में मेहनत कर रहे हैं। देश का, और उनकी मेहनत का मज़ाक़ मत बनाइये। -संकेत उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार


उमाशंकर सिंह-

गलगोटिया पर क्यों नहीं होगी कोई कार्रवाई इसकी वजह जाननी है तो आज तक पर आशुतोष मिश्रा की ये रिपोर्ट देखिए। इस यूनिवर्सिटी ने बीजेपी सरकार को ख़ुश करने के लिए 2024 में अपने छात्रों को कांग्रेस के घोषणापत्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतार दिया था। और छात्र ठीक से बता भी नहीं पा रहे थे कि आख़िर वे क्यों प्रदर्शन कर रहे थे। इसमें छात्रों का क़सूर नहीं माना जाना चाहिए बल्कि ये इन बच्चों का राजनीतिक इस्तेमाल करने वालों का क़सूर है।

गलगोटिया में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए माता पिता मोटा पैसा ख़र्च करते हैं। लेकिन गलगोटिया उनको क्या दे रहा है सोचिए। चीन निर्मित रोबोडॉग! जाँच और कार्रवाई की बात भूल जाइए। इनके राजनीतिक आका सत्ता में हैं।

विज्ञान नहीं विज्ञापन में नंबर वन है गलगोटिया! तमाम फ़ज़ीहत के बाद भी आज अखबार में उसका फुल पेज विज्ञापन जिसमें चीन निर्मित रोबोडॉग को सेंटर में रखा है!


डॉ राकेश पाठक-

गलगोटिया ‘ऊनीभर्सिटी’ का गुल गपाड़ा … “जिसने जो उचित समझा वो किया”

  1. गलगोटिया वालों ने चीन के रोबोट को अपना बता कर अंतर्राष्ट्रीय AI समिट में ठुमक ठुमक चलवा दिया।

फैकल्टी ने इतरा इतरा कर अपने आविष्कार की शान बघारी। “जो उचित समझा वो किया।”

  1. साहेब सरकार, मंत्री संत्री ने इस गुल गपाड़े वाले ‘आविष्कार’ का ढोल पीटा। “जो उचित समझा वो किया।”
  2. सरकारी भोंपू DD न्यूज़ ने पहले खूब ढिंढोरा पीटा फिर ट्वीट डिलीट कर दिया। “जो उचित समझा वो किया।”
  3. गलगोटिया के फर्जी गुलगुले की चीन के मीडिया ने पोल खोल कर खूब खिल्ली उड़ाई। “जो उचित समझा वो किया।”

कुणाल शुक्ला-

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के कांड से पहले भी इस देश में “रोबोट क्रांति” आ चुकी थी।

AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के डॉग रोबोट कांड के बाद कल से देश की थू-थू पूरी दुनिया में हो रही है।

लेकिन इसी बीच आप बुलंदशहर वाला मामला भूल गए, जब एक छात्र ने एक मैनिक्वीन को साड़ी पहनाकर, विग लगाकर उसे AI के वॉइस कमांड से जोड़ दिया था।

और गोदी मीडिया ने उसे ऐसे पेश किया, मानो देश में कोई ऐतिहासिक रोबोटिक आविष्कार हो गया हो और तकनीकी क्रांति आ गई हो।


भावेश लोढ़ा-

किसी भी मॉडल/स्टार्ट अप को इधर प्रदर्शित करने से पहले क्या चेक किया गया नहीं होगा कि यह किसीकी कॉपी हे या नहीं ?

वैसे भी विवाद और गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पुराना नाता रहा है। अभी कुछ समय पहले यूनिवर्सिटी में उदित नाम के लड़के की मौत हो गई थी, यूनिवर्सिटी ने तो सुसाइड बताकर बात से पल्ला झाड़ लिया था लेकिन कई लोगों का मानना था कि उसकी हत्या की गई है। लेकिन कोई कुछ बोला ही नहीं तो सब दब गया।


शिवम यादव-

GALGOTIAS EXPOSED AGAIN

गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा फिर से वही चीप हरकत की गई, पहले से मार्केट में मौजूद DRONE STRIKER V3 ARF को खरीद कर ग्लोबल AI स्टेज पर भारत द्वारा खोजा गया ऐसे प्रेजेंट करना बहुत ही घटिया हरकत है ,

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की वजह से विश्व में भारत की छवि धूमिल हुई है विदेशी वैज्ञानिक हमारे देश पर हस रहे है।

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