गाजीपुर | महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में बड़ा घालमेल सामने आया है. फर्जीवाड़े की पोल खुली तो जांच का आदेश हो गया. आदेश निकला तो मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन और कर्मचारियों के हाथ पांव फूल गए हैं.
दरअसल, कासिमाबाद क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनुराग सिंह ने महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में संविदाकर्मियों की नियुक्ति और अस्पताल संचालन के लिए की जाने वाली खरीदारी में अनियमितता का आरोप लगाते हुए आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी थीं. सूचना मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने राज्यपाल से पूरे मामले में जांच की मांग की थी.

इस जांच की मांग के बाद सूचना है कि राज्यपाल सचिवालय उत्तर प्रदेश की ओर से पत्र जारी कर अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई है.
जारी पत्र में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि जांच रिपोर्ट में खामियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. बताया जा रहा है कि गाजीपुर के इस अस्पताल में सामान की खरीदारी सहित अन्य अनियमितता का आरोप लगाते हुए लोगों ने विरोध जताया था.
मामले में शिकायतकर्ता अनुराग सिंह का कहना है कि, आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर कॉलेज प्रशासन की ओर से टाल-मटोल किया जाता है. इसके लिए निर्धारित अवधि का भी ख्याल नहीं रखा जाता.
करोड़ों की खरीद में घपलेबाजी
शिकायत कर्ता अनुराग सिंह के अनुसार हर माह अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए शासन से करोड़ों रुपये आता है. वर्ष 2021-22 में अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के साथ ही अन्य सामान खरीदने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये आए थे. लेकिन खरीदारी के दौरान कम कीमत वाली चीजों को अधिक भुगतान करके खरीदा गया. साथ ही खरीदे गए सामान की गुणवत्ता भी सही नहीं थी. वह मानक के अनुरूप नहीं है.
पूरे मामले को लेकर तथ्यों के साथ शिकायत की गई है. साथ ही मामले में अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति को जांच सौंपी गई है.


