गोदी मीडिया को समझ नहीं आ रहा टेनी का इस्तीफ़ा किसे माँगने को कहें!

साक्षी जोशी-

गोदी मीडिया को समझ नहीं आ रहा टेनी का इस्तीफ़ा किसे माँगने को कहें!

न..न…न

उनका नाम तो बस पूजा कर रहे हैं, आ रहे हैं, चल रहे हैं, जा रहे हैं, बोल रहे हैं, जैसे संदेशों में इस्तेमाल होता है।

चलो आप लोग ‘सिस्टम’ से ही कह दो टेनी का इस्तीफ़ा माँगने को!

अब तो सबको पता है सिस्टम है कौन!


दीपांकर-

किसानों ने जब गोदी मीडिया के पत्रकारों को आईना दिखाया तो वो आतंकी और खालिस्तानी घोषित हो गये।

जब मंत्री जी ने गरियाया तो न्यूज वाले रिरियाने लगे हैं।

रिरिया कर बोल रहे हैं “पापा हमको टोनी ने मारा, हटा लो नहीं तो हम भी अपने मन से नुकसान वाला सर्वे चलाएंगे, पापा… भें भें भें….,पापा”!


आशीष अभिनव-

ये न्यू इंडिया है- यहां डरपोक पत्रकारिता का स्वर्णिम युग चल रहा है। मोदी सरकार में एक मंत्री ने खुलेआम पत्रकार गाली दी। कैमरा और मोबाइल छीना। इसलिए कि मंत्री से लखीमपुर में किसानों की हत्या का आरोपी उनके बेटे आशीष मिश्रा के लिए सवाल पूछ लिया गया। मंत्री जी ने ऐसी अभद्रता की कि टीवी पर वीप लगाकर चलाना पड़ा।

कल से टीवी पर कई छुपे हुए संघी पत्रकारों की नाक भौं टेढ़ी हो रही है। बैलेंस बनाने के लिए मंत्री को गरिया भी रहे हैं। लेकिन टीवी की कायराना और शातिराना चाल को लोग समझने लगे हैं।

क्या आपने टीवी पर 1. बीजेपी का मंत्री, 2. मोदी सरकार में मंत्री, 3. मोदी के मंत्री के लिए ठेंगे पर कानून जैसे शब्द देखे क्या? मोदी सरकार से एक भी सवाल सुना क्या? बीजेपी से किसी कायदे के प्रवक्ता को इसपर बोलते सुना क्या? सुनेंगे भी नहीं। क्योंकि घटना रामराज्य वाले योगी जी के यूपी में हुआ है। और घटना को अंजाम देने वाले मोदी जी सहयोगी हैं।

यही काम पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान के मंत्री करते तो एंकर कुर्सी छोड़कर चिल्ला रहा होता।

  1. कांग्रेस का ‘रंगबाज मंत्री’
  2. कानून से ऊपर ‘सोनिया सेना’ के मंत्री
  3. राहुल गांधी को ‘रंगबाज़’ पसंद है
  4. ‘गालीबाज’ मंत्री का इस्तीफा कब?
  5. रंगबाजों के भरोसे सोनिया सेना
  6. राहुल-सोनिया शर्म करो!

ये न्यू इंडिया है। यहां डरपोक पत्रकारिता का स्वर्णिम युग चल रहा है।


सत्येंद्र पीएस-

भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के किसी भी कार्यकर्ता को मैंने कभी जिंदगी में मीडिया से बदतमीजी करते न तो देखा, न सुना। कई बार सोशल मीडिया पर लिख चुका हूँ और प्रशंसा भी करता हूँ कि अशोका रोड मुख्यालय से लेकर बनारस और लखनऊ तक के कार्यालयों तक पार्टी के लोगों से मिलने का अवसर मिला।

लाल कृष्ण आडवाणी जब उप प्रधानमंत्री थे तो उनसे बनारस वाले रूपानी जी ने पूछा कि गोदौलिया का कूड़ाघर क्यों नहीं बना? आडवाणी समझ ही नहीं पाए कि गोदौलिया क्या है? अशोका रोड पर मैंने नीना व्यास को देखा है अरुण जेटली को डांटते हुए। मैंने खुद प्रवीण भाई तोगड़िया से सवाल पूछा है कि संघी तो ब्याह शादी करते नहीं, तो आपलोग हिन्दू की संख्या कैसे बढ़ाएंगे।

अब भारतीय जनता पार्टी का मुख्यालय आलीशान 5 स्टार हो चुका है। मैं वहां कभी नहीं गया। किसी ने बुलाया भी नहीं। नई भाजपा अमित शाह और टेनी की भाजपा है। सुनते हैं कि अमित शाह भी पत्रकारों को धमकाते हैं और औकात में रखते हैं।
यह भाजपा नरेंद्र मोदी की भी कतई नहीं है। उनका नियंत्रण भी जा रहा है। नरेंद्र मोदी जितना कैमरा और मीडिया फ्रेंडली तो विश्व में कोई नहीं रहा है। स्वागत करें इस गुंडा, माफिया राज का।


वीरेंद्र यादव-

मंत्रियों की सुरक्षा के लिए अंगरक्षक की व्यवस्था होती है, जिसका कार्य मंत्री को सुरक्षा प्रदान करना, किसी हमले से बचाना होता है. लेकिन जब मंत्री खुद हमलावर बनकर पत्रकार या किसी अन्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो क्या है दायित्व अंगरक्षक का? मूकदर्शक बनकर मंत्री को दूसरे पर हमला करता देखता रहे या मंत्री को हमला करने से रोके.

हो यह भी सकता है कि यदि अंगरक्षक मंत्री को रोके तो खुद ही हमले का शिकार हो जाए. ऐसे में अंगरक्षक बेचारा क्या करे? कैसे ऐसा कुछ करे कि , मंत्री को सुरक्षा भी प्रदान करता रहे, खुद को पिटने से सुरक्षित भी रखे और नौकरी भी बची रहे. सेवा नियमावली में इस बारे में स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए.

बेचारे अंगरक्षक की नियति पर मुझे सचमुच दया आ रही है.


अमीष राय-

नेता को नेता नहीं आका समझने पर दुर्गति तो होनी ही है पत्रकार बंधु!

पर क्षेत्रीय पत्रकारों का कोई दोष नहीं. असल में दिल्ली वालों ने जो रायता फैला दिया है उसके साफ होने का कोई आसार नजर नहीं आ रहा.

बाकी क्लोज सर्किल में यूपी चुनाव को लेकर शर्त वर्त लगा दिया हूँ. अपना क्या, हारे तो पार्टी और जीते तो ‘अखंड भारत’ है ही.


रवीश कुमार-

मोदी जी 55 कैमरों के बीच गंगा में डुबकी लगाते हैं और उनके मंत्री जी कैमरे को बंद करा देते हैं। महंगाई इतनी हो गई है जनता रो रही है। मोदी जी 55 कैमरे लगाकर डुबकी लगा रहे हैं। उनके कार्यक्रम कैमरों के लिए शाही बनाए जा रहे हैं। पब्लिक से पैसे लेकर जमकर खर्च हो रहा है और पब्लिक गरीब हो रही है। लेकिन ये मंत्री जी कैमरे वाले को गंदे लोग बोल रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी अजय मिश्रा को गृह राज्य मंत्री से गृह मंत्री बना दीजिए। ताकि कैबिनेट में मुलाक़ात होती रहे। ऐसे कितनी बार ग्रुप फ़ोटो से अजय मिश्रा को बाहर करेंगे और अजय मिश्रा को ज़रूरी काम तभी याद आएगा जब आप मंच पर होंगे।

SIT की रिपोर्ट में लिखा है कि आशीष मिश्रा और साथियों ने किसानों को हत्या के इरादे से मारा है। यह वो एस आई टी नहीं है जो आम जनता को फँसाने के लिए बनाई जाती है और न ही आशीष मिश्रा आम है। एक मंत्री का बेटा है।

किसानों से इतनी नफ़रत आपके लोगों ने घर घर पहुँचाई है और उनके ही घरों के बच्चे हत्या के इस खेल में शामिल हो गए। अफ़सोस ।

पर अगर अजय मिश्रा का इतना ही बचाव करना है तो उन्हें राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री बना दें।



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One comment on “गोदी मीडिया को समझ नहीं आ रहा टेनी का इस्तीफ़ा किसे माँगने को कहें!”

  • सुशील त्यागी says:

    आज का ये हाल है मंत्री और पुलिस को खुली छूट दे रखी है ना तो पुलिस कंट्रोल में ना ही मंत्री की जुबान नोएडा में तो हालात ख़राब है

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