नवेद शिकोह-
पत्रकारों का सपना रहा है ज्ञानेंद्र शर्मा जैसा बनना! बड़े-बड़े दिग्गज पत्रकार क़तार में लगे थे, लेकिन पहले राज्य सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त बनने का गौरव उनको प्राप्त हुआ। स्थापित पत्रकार होने के साथ सफल संपादक होना कठिन होता है। ज्ञानेंद्र शर्मा जी का क़लम नौ ख़ानों का रिंच रहा। संपादक भी, पत्रकार भी लेखक-साहित्यकार भी।
सियासतदानों की चूड़ी कसने में वो चूकते नहीं लेकिन फिर भी सियासतदानों से ज्ञानेंद्र शर्मा जी का जितना करीबी रिश्ता रहा शायद ही किसी पत्रकार का दिग्गज राजनेताओं से इतना करीबी रिश्ता रहा हो।
खबरें ही नहीं विश्लेषण, कॉलम, समीक्षाएं, सम्पादकीय और उनके हजारों लेख पत्रकारिता का एक संग्रहालय जैसा है। पाठकों से लेकर पत्रकारों की दो पीढ़ियां ज्ञानेंद्र जी के क़लम का लोहा मान चुकी हैं।
क़रीब बीस साल पुरानी बात है। यूपी में पहला क्षेत्रीय चैनल और न्यूज़ बेस कार्यक्रम रामोजी राव वाले ईटीवी ने शुरू किया था। यूपी के बड़े राजनेताओं से रुबरु होने वाला पहला शो जब प्लान हुआ था तो मुश्किल ये थी कि बड़े राजनेताओं को कॉर्डीनेट/लाइनप करना ईटीवी टीवी की टीम के बस में नहीं था। फिर तय हुआ कि सियासत की सबसे ज्यादा समझ रखने के साथ ही दिग्गज राजनेताओं से तालुकात में सबसे अव्वल ज्ञानेंद्र शर्मा के हवाले ये शो कर दिया जाए।
इस फैसले के बाद शो उनके हवाले किया गया। ज्ञानेंद्र जी और ब्रजेश मिश्रा के इस शो के बाद यूपी में ईटीवी की सफलता ने इतिहास रच दिया। ये वो वक्त था जब इलेक्ट्रॉनिक वाले प्रिंट के नगीने बटौर रहे थे।
ज्ञानेन्द्र जी का आज जन्मदिन है। वो 79 के हो गए। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह भाई ने यूपी प्रेस क्लब में पत्रकार समागम में ज्ञानेंद्र जी को लाइफ टाइम अचीवमेंट का सम्मान दिया।







राजू मिश्र-
जन्मदिन तो बहुतों का मनता है, लेकिन राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शर्मा सरीखा जन्मदिन समारोह हाल-फिलहाल किसी का नहीं देखा गया। यूपी प्रेस क्लब ठसाठस भरा था। यह भाई सुरेश बहादुर सिंह जी की पहल थी कि ज्ञानेंद्र जी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाए।
एमपी क्रॉनिकल से पत्रकारिता शुरू करने वाले ज्ञानेंद्र जी मूलतः मऊरानीपुर के हैं यानी मशहूर गीतकार इंदीवर के पड़ोसी। समाचार भारती, समाचार जैसी संवाद अभिकरण सेवाओं के वह ब्यूरो प्रमुख रहे। नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे नामचीन अखबारों में उन्होंने अपनी कलम का जादू चलाया। जब गूगल का कोई नामलेवा नहीं था तब ज्ञानेंद्र जी गूगल से कहीं ज्यादा विशद जानकारियां अपनी डायरी में लिपिबद्ध रखते थे। लेकिन, दोनों अंगुलियों से टाइप करते उन्हें कभी किसी ने नहीं देखा।
दरअसल टाइपराइटर पर काम करते वह एक ही अंगुली से टाइपिंग के अभ्यस्त हो गए। यह सिलसिला आज भी यथावत है।
सत्यपाल प्रेमी जी की एक बात याद आ रही- ज्ञानू दादा बेजोड़ रिकार्ड रखते हैं।
बात सही भी थी। बहरहाल वह अकेले ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त कुर्सी भी पूरी दमदारी के साथ संभाली और ऐसे जबरदस्त फैसले किये जिनका आजतलक लोग लोहा मानते हैं, नजीर देते हैं। परमात्मा ज्ञानेंद्र जी को स्वस्थ और दीर्घ आयु प्रदान करें।



विजय सिंह
July 23, 2023 at 8:05 pm
ज्ञानेंद्र शर्मा जी को बहुत बधाई .
Bishwajit Bhattacharya
July 23, 2023 at 9:41 pm
ज्ञानेंद्र सर दैनिक जागरण लखनऊ में मेरे संपादक थे। होली के त्योहार पर तमाम बार उनके सरकारी आवास पर जाकर चंदन का टीका उनसे लगवाया। इतने सौम्य कि यकीन नहीं होता, इतने बड़े पत्रकार हैं! ईश्वर उनको सदा स्वस्थ रखे। लंबी उम्र दे।