
संजय कुमार सिंह
आज मेरे सभी अखबारों में एक सरकारी खबर लीड है। द टेलीग्राफ अपवाद हैं। इसमें यह खबर लीड तो नहीं ही है, जो खबर छपी है उसका शीर्षक हिन्दी में, “कूटनीतिक कमाल या चीनी फुसफुसाहट है“। इसमें बताया गया है कि भारत के दावे पर चीन की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई। यह दावा सबसे पहले विदेश सचिव, विक्रम मिश्री ने किया। ब्रिक्स सम्मेलन के सिलसिले में प्रधानमंत्री की रूस यात्रा से संबंधित ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। बाद में, एनडीटीवी कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हम (सीमा पर) गश्त को लेकर एक समझौते पर पहुँच गए हैं। हम 2020 में जो स्थिति थी, वहाँ वापस पहुंच गये हैं। और, हम कह सकते हैं, इसके साथ ही चीन के साथ टकराव (के बाद अलग होने) की डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी हो गई है। (अभी) मैं आपके साथ इतना ही साझा कर सकता हूँ।” चीन पर मई 2020 से लद्दाख में भारत के दावे वाले लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा करने का आरोप है। सोमवार की घोषणाओं से पहले हुई सहमति में आंशिक तौर पर अलग होने वाले क्षेत्रों में देपसांग प्लेन्स और डेमचोक शामिल नहीं थे।
यहां मुझे याद आता है कि 2020 में ही गलवान का मामला हुआ था तब प्रधानमंत्री ने कहा था, न कोई हमारी सीमा में घुसा, न ही पोस्ट किसी के कब्जे में है। उस समय द वायर में देविरूपा मित्रा ने लिखा था (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद कंप्यूटर का), …मोदी का दावा भारत के रुख के विपरीत, कई सवाल खड़े करता है। प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना हुई तो पीएमओ ने स्पष्टीकरण देने की मांग की कि प्रधानमंत्री ने चीनी घुसपैठ के प्रयास की बात कही थी, जिसे भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक विफल कर दिया था। इस संबंध में प्रधानमंत्री का एक ट्वीट भी द वायर के इस आलेख के साथ है। आपको याद होगा कि यह सब चीनी सेना के साथ संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने के बाद हुआ था और यह बिहार विधानसभा चुनाव के समय का मामला है तथा मारे गये सैनिकों में 11 बिहार रेजिमेंट के थे। इसपर काफी कुछ लिखा और कहा जा चुका है। मूल बात यह है कि कोई घुसा ही नहीं था तो अब क्या बदला है कि इतनी बड़ी खबर है। द वायर की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर मोदी द्वारा कही गई बातों को स्पष्ट करने की मांग की थी तथा कुछ क्षेत्रों में उनकी टिप्पणियों की शरारतपूर्ण व्याख्या को खारिज किया गया था।
इसके अनुसार, “प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का उल्लंघन करने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से जवाब देगा। वास्तव में, उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ऐसी चुनौतियों पर पहले की उपेक्षा के विपरीत, भारतीय सेना अब एलएसी के किसी भी उल्लंघन का निर्णायक रूप से मुकाबला करती है। इसके बाद जो लिखा है वह अंग्रेजी की खबर में भी हिन्दी में ही लिखा है – (“उन्हें रोकते हैं, उन्हें टोकते हैं”)। ऐसे में अब जो खबर है वह कितनी महत्वपूर्ण है या तब जो स्पष्टीकरण था वह कितना स्पष्ट था यह आप समझिये। अगर आपको समझ में नहीं आया तो यह मीडिया का कमाल है। मैं इसे हेडलाइन मैनेजमेंट मानता और कहता हूं। द एशियन एज की लीड का शीर्षक हिन्दी में इस तरह होता, एलएसी पर पेट्रोलिंग से संबंधित करार के बाद लद्दाख में भारत चीन सीमा संबंध सुधरे। अमर उजाला का शीर्षक है, देपसांग व डेमचोक से हटेंगी सेनाएं, सीमा पर पहले की तरह गश्त करेंगे भारत-चीन।
ऐसे में नवोदय टाइम्स का शीर्षक तथ्य बताता लगता है और जो संभावना है वही शीर्षक है, भारत – चीन गतिरोध के समाधान की ओर कदम। उपशीर्षक है, पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त से जुड़े समझौते पर सहमत हुए दोनों देश। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, एलएसी पर पेट्रोलिंग को लेकर भारत, चीन में सहमति, ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी और शी की मुलाकात की तैयारी पूरी। लेकिन द एशियन एज के शीर्षक का एक बुलेट प्वाइंट है, आज कजान में मोदी, शी के मिलने की संभावना; पर कोई पुष्टि नहीं है। अगर पुष्टि नहीं है तो इंडियन एक्सप्रेस कैसे लिख रहा है और मिलना तय है तो द एशियन एज को पता क्यों नहीं है। यह सब तो सरकारी स्तर पर बताया जाना चाहिये और मूल खबर तो अधिकृत तौर पर दी ही गई है। लेकिन इन खबरों से लगता है कि प्रेस कांफ्रेंस नहीं करने वाली सरकार चाहती है कि वही छपे जो कहा जाये। आप जानते हैं कि खबर देने के लिए सरकार का पूरा विभाग है और उसमें बड़ी संख्या में अधिकारी हैं और ऐसा हर मंत्रालय में होता है। प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को स्पष्ट होना चाहिये कि क्या बताना है और किस सवाल का जवाब क्या होगा। लेकिन सब कुछ ईवीएम मामले की ही तरह है।
द एशियन एज के एक बुलेट प्वाइंट के अनुसार, डिसएंगजमेंट (मुलाकात के बाद) संभव है। चार साल बाद की इस संभावित संभावना को विदेश मंत्री जयशंकर ने सकारात्मक कदम कहा है, अगर कोई नहीं समझ रहा हो। इस हेडलाइन का मकसद द एशियन एज के दूसरे शीर्षक से समझा जा सकता है, सरकार तेज गति से,बड़े पैमाने पर काम करती है; दुनिया के लिए उम्मीद बनती है। उपशीर्षक है, हरियाणा के नतीजे लोकसभा में स्थिरता का जनता का संदेश है। जागरण डॉट कॉम का एक शीर्षक है, कनाडा के साथ तनाव के बीच पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा– किसी रिश्ते को कमतर नहीं आंकता भारत। कुल मिलाकर, स्पष्ट है कि यह सब कनाडा से टकराव और संबंध खराब होने की खबरों के बीच महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव के लिए सरकार की छवि बनाने के लिए यह सब किया जा रहा है तथा आगे भी होता रहेगा। पर आज की खबर क्या है इसे टेलीग्राफ की खबर से समझा जा सकता है।
द टेलीग्राफ ने आगे लिखा है, यह पूछे जाने पर कि क्या सोमवार के समझौते से भारत को गलवान घाटी और देपसांग मैदानों में गश्त करने की अनुमति मिलेगी, जयशंकर ने अस्पष्ट उत्तर दिया। जयशंकर ने कहा, “जो हुआ है वह यह है कि हम एक समझ पर पहुँचे हैं जो गश्त करने की अनुमति देगा… उदाहरण के लिए, देपसांग – यह एकमात्र स्थान नहीं है, अन्य स्थान भी हैं। मेरी जानकारी के अनुसार समझ यह है कि हम 2020 में जो (जहां) गश्त कर रहे थे, वह कर पाएंगे।” चीनी विदेश मंत्रालय ने 13 सितंबर को कहा था कि देश के सैनिकों ने चार स्थानों से वापसी की है, जिसमें गलवान घाटी भी शामिल है, जहाँ जून 2020 में एक घातक झड़प में 20 भारतीय सैनिक और कई चीनी सैनिक मारे गए थे। गलवान घाटी पर चीनी घोषणा से एक दिन पहले, जयशंकर ने जिनेवा में कहा था चीन के साथ लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान हो चुका है।
जयशंकर ने सोमवार के घटनाक्रम को “अच्छा” और “सकारात्मक” बताया, लेकिन वे इस बात को लेकर सतर्क थे कि क्या इससे द्विपक्षीय संबंध 2020 से पहले की स्थिति में लौट आएंगे और व्यापार और निवेश में सुधार होगा। इस घटनाक्रम का द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा: “यह अभी हुआ है। अब यह देखने के लिए बैठकें होंगी कि अगला कदम क्या होना चाहिए। मैं इतनी तेजी से नहीं बढ़ूंगा।” हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, एक बड़ी शुरुआत में भारत,चीन ने सीमा पर फिर से पेट्रोलिंग शुरू की। अखबार ने विदेश मंत्री की बातों के खास मुद्दों को हाइलाइट कर दिया है और निर्णय पाठकों पर छोड़ दिया है। लेकिन यह आम पाठकों के लिए नहीं है जो सिर्फ शीर्षक पढ़ते हैं और हेडलाइन मैनेजमेंट की यह कोशिश उन्हें बतायेगी कि भारत बड़े पैमाने पर तेजी से काम करता है जैसा प्रधानमंत्री ने दावा किया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, लद्दाख का गतिरोध खत्म हुआ : एलएसी पेट्रोलिंग पर भारत, चीन में सहमति। द हिन्दू का शीर्षक है, एलएसी पर तनाव कम करने पर भारत-चीन में समझौता। पर चीन ने ऐसी घोषणा नहीं की है और भारत के इन दावों की पुष्टि नहीं की है तो इसका क्या मतलब। संभव है आगे की खबर शी से मुलाकात होने या न होने के बाद बने। आज की मुख्य खबर लद्दाख की है और आज ही खबर है कि लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वार्ता शुरू करने के लिए गृहमंत्रालय के निमंत्रण पर 16 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। द हिन्दू ने इस खबर को लीड के साथ प्रमुखता से छापा है।
दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब
आज की दूसरी प्रमुख खबरों में टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड है। इसके अनुसार दिल्ली की हवा अब बेहद खराब है और कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने ग्रेडेड रेसपांस ऐक्शन प्लान (ग्रैप) के दूसरे चरण को लागू कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में 18 किसानों को गिरफ्तार किया गया है और चार सौ से ज्यादा किसानों को मंडियों में प्रतिबंधित किया गया है। दिल्ली की हवा खराब होने की खबर अमर उजाला में भी है लेकिन हरियाणा में किसानों के खिलाफ कार्रवाई की खबर दोनों में नहीं है जबकि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की गई है।
आतंकी हमले और विस्फोट की जांच
दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक स्कूल के बाहर हुए विस्फोट की जांच खालिस्तानी एंगल से की जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार जांच की जा रही है कि इसमें विकास यादव से संबंधित कोई संकेत तो नहीं है। असल में यह विस्फोट दिल्ली में सीआरपीएफ स्कूल के बाहर हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक और खबर के अनुसार कश्मीर के आतंकी हमले में चीनी एंगल का पता चला है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन, लश्कर ए तैयबा से संबंधित द रेसिसटेंस फ्रंट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है एक बयान में पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) ने टीआरएफ की प्रशंसा की है। पीएएफएफ का दावा है कि हमले का मकसद पूर्वी सीमा पर भारतीय सेना दावा तैनाती को बाधित करना है। इसका कारण यह बताया गया है कि ऐसा किया जाना हमारे सैनिक हितों और हमारी चीनी मित्रों के खिलाफ है। द हिन्दू ने लिखा है कि एनआईए ने जांच शुरू की और आतंकियो का अभी पता नहीं चला है।
बम की धमकी देने वाला का पता नहीं हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की सेकेंड लीड विमान में बम की धमकी देने वालों के लिए सख्त सजा के प्रावधान की खबर है। इस खबर के अनुसार हफ्ते भर में 100 से ज्यादा झूठे अलर्ट आये हैं। मंत्री आरएम नायडू ने भले कहा है कि इस समय यह बताना मुश्किल है कि ऐसे लोगों का मकसद क्या है। जानकारी प्राप्त करने के लिए हम खुफिया एजेंसी, आईबी और अन्य प्रमुख ऐजेंसियों का उपयोग कर रहे हैं ताकि ऐसी घटनाएं फिर न घटें। हफ्ते भर बाद फर्जी कॉल की कुल संख्या बताने की जगह किसी एक की गिरफ्तारी की भी बात की जाती तो लगता कि मामला नियंत्रण में आ सकता है। या सरकार को इसे लेकर तत्काल कोई चिन्ता है। सरकार भविष्य के ऐसे लोगों का इंतजाम अभी कर रही है और अभी वाले की चिन्ता करती होती तो उनमें से किसी का नहीं पकड़ा जाना, इसकी खबर होना संदेहास्पद है। अभी तक ऐसी कोई खबर नहीं है। नवोदय टाइम्स की खबर है, बम की धमकी देने वाले होंगे नौ फ्लाई लिस्ट में। आज की खबर में किसी को पकड़े जाने, पहचाने जाने या पता चलने या किसी की तलाश चलने, उसके फरार होने जैसी खबर हाईलाइट की हुई नहीं है।


