मालिनी पार्थसारथी के संपादन में हिंदू लगातार बदतर होता गया

Dilip Khan : जब शेखर गुप्ता इंडियन एक्सप्रेस छोड़कर गए तो कई लोगों को लगा था कि अख़बार बैठ जाएगा, लेकिन राजकमल झा ने उसे और चमका दिया। शेखर गुप्ता के छोड़ने का पूरा मामला शिगूफ़े में तब्दील होकर बैठ गया। लेकिन, जब सिद्धार्थ वरदराजन को द हिंदू से जाना पड़ा तो हिंदू के बैठने की बात किसी ने नहीं की थी। फिर पी साईंनाथ सहित एक-एक कर कई लोग गए। इनमें प्रवीण स्वामी के अलावा लगभग सबके जाने पर मुझे अफ़सोस हुआा।

धीरे-धीरे मालिनी पार्थसारथी के संपादन में हिंदू लगातार बदतर होता गया। अंदरखाने क्या चल रहा है मैं नहीं जानता। एन राम या उनके परिवार के लोगों की अंदरूनी राजनीति में मेरी दिलचस्पी है, लेकिन उतनी नहीं। सिर्फ पार्थसारथी के जाने की खुशी है कि शायद वो अख़बार बेहतर हो पाए जिसे दशक भर से ज़्यादा लगातार पढ़ने के बाद मुझे अचानक बंद करना पड़ गया। अगर ठीक हुआ तो फिर से ख़रीदूंगा, वरना ऐसे ही बंद पड़ा रहेगा।

युवा टीवी पत्रकार दिलीप खान के फेसबुक वॉल से.

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