हिन्दुस्तान अखबार के अवैध मुंगेर संस्करण को बन्द करने की मांग उठी

मुंगेर (बिहार) ; मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445/2011 में आईपीसी की धाराएं 420, 471, 476 के नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया को पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी शिकस्त देने वाले मुंगेर के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने अब मुंगेर के आयुक्त पंकज कुमार पाल को लिखित आवेदन सुपुर्द कर मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड के द्वारा मुंगेर जिले में प्रसारित दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध मुंगेर संस्करण को बन्द करने की मांग की है।

आयुक्त को सुपुर्द आवेदन में अधिवक्ता श्रीप्रसाद ने साक्ष्य के रूप में प्रेस-रजिस्ट्रार, नई दिल्ली के कार्यालय के गाइडलाइन्स फोर रजिस्ट्रेशन की प्रति संलग्न की है। इस गाइड्लाइन्स् में स्टेप-2 के तीसरे और चौथे पैरा में प्रेस रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि- ‘यदि अखबार के मुद्रण और प्रकाशन का स्थान अलग-अलग जिलों में है, तो दोनों जिलों से अलग-अलग डिक्लयरेशन (रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन) देना पड़ेगा। मुद्रक को अखबार के मुद्रण-स्थान वाले जिले में और प्रकाशक को अखबार के प्रकाशन वाले जिले में डिक्लयरेशन देना होगा।’

“ If place of publication and printing press are in different districts, then separate declarations are required from both the districts. The publisher should file declaration from the district of place of publication and printer should file declaration from the district of prining press.’’

गाइडलाइंस के कालम नं-5 के 6(4) पैरा में प्रेस रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि एक ही राज्य में यदि पहले से प्रकाशित अखबार का दूसरे जिलों में नया संस्करण का प्रकाशन करना है, तो टाइटल वेरिफेकेशन की जरूरत नहीं है। प्रकाशक सीधे प्रेस रजिस्ट्रार को आवश्यक कागजात के साथ नए संस्करण के लिए रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकता है।

“If new edition of the existing publication is to be brought out from some other district in the same state & in the same language,no prior title verification is required. The publisher can directly file declaration and then submit required documents to RNI for issuance of Registration Number & Certificate.”

साथ ही, प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 में धारा 5(3) में अखबार के संस्करणों के लिए अलग से प्रावधान की व्याख्या की गई है। धारा 5(3) स्पष्ट कहता है कि- ”जितनी बार अखबार के मुद्रण और प्रकाशन का स्थान बदलता है, उतनी बार नया डिक्लयरेशन जमा करना पड़ेगा।”

“As often as the place of printing or publication is changed, a new declaration shall be necessary.”

आयुक्त को अधिवक्ता श्री प्रसाद ने मुंगेर के तत्कालीन जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण की जांच रिपोर्ट की प्रति भी संलग्न की है। यह जांच रिपोर्ट क्रिमिनल मिसलेनियस नं- 2951/ 2012 में पटना उच्च न्यायालय को सुपुर्द की गयी थी। पटना उच्च न्यायालय में इस मुकदमें में भी दैनिक हिन्दुस्तान की मलकिन हार चुकी हैं।

पटना उच्च न्यायालय को समर्पित जांच रिपोर्ट जो कार्यालय नं- 1448 (लीगल, 27 सितम्बर, 2012) से भेजा गया था, में तत्कालीन जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण ने लिखा है कि- ‘मैंने एक तिथि के भागलपुर, मुंगेर और लखीसराय जिलों के लिए प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के अलग-अलग जिलावार संस्करणों की मूल-कापी प्राप्त की है। तीनों संस्करणों में एक ही संपादक, एक ही प्रकाशक, एक ही मुद्रक, एक ही फोन नंबर, एक ही आरएनआई नम्बर हैं। इस प्रकार एक ही रजिस्ट्रेशन और रजिस्ट्रेशन नम्बर पर भिन्न कन्टेन्ट को मुद्रित, प्रकाशित और वितरित भिन्न-भिन्न जिलों में किया जा रहा है। चूंकि कन्टेन्टभिन्न-भिन्न हैं, इसीलिए सभी संस्करण अलग-अलग अखबार समझे जाएंगें और सभी के अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नम्बर होने चाहिए। लेकिन, यह तीनों संस्करणों के लिए एक ही रजिस्ट्रेशन नम्बर है।’

“…Today morning, Hindustan newspaper has been obtained from Munger town(Munger Edition), and near by Lakhisarai town (East Bihar Edition). Both the newspapers indicate same editor, same publisher & printer, same local editor, same phone no. and same RNI No. The RNI No. is also same as what can be seen on Bhagalpur edition. This way, it appears that on same registration, same RNI No., different content is being published, printed and circulated in different districts. Since the content is different, so they should be treated as different newspaper and should have different RNI’s No., but here RNI No. is same.”

नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया ने पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445/2011 को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। परन्तु, पहले पटना हाई कोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया की याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

चर्चित सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता मन्टू शर्मा के आवेदन पर मुंगेर कोतवाली थाना में दर्ज प्राथमिकी, जिसकी प्राथमिकी संख्या-445/2011 है, में नामजद अभियुक्त हैं:- शोभना भरतिया, शशि शेखर, अक्कू श्रीवास्तव, बिनोद बंधु और अमित चोपड़ा। पुलिस ने इन सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट 1867 की धाराएं 8(बी), 14 और 15 के तहत प्राथमिकी दर्ज की हैं।

इन कानूनी आधारों पर दैनिक जागरण, दैनिक प्रभात खबर और दैनिक भास्कर के अवैध जिलावार संस्करणों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए सक्षम पदाधिकारियों के समक्ष लिखित स्मारकपत्र भेजा जा रहा है।

अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद की कलम से. संपर्क : 9470400813

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