हिंदुस्तान ने पहले जिंदा डाक्टरों को ‘मार’ डाला, फिर अगले रोज मांग ली माफी

बुलंदशहर हिंदुस्तान संस्करण में 3 मई को प्रकाशित समाचार ‘गंगा में डूबे तीन युवकों की मौत’ में जिन्दा डॉक्टरों के फ़ोटो लगा दिए गए। एक मई को संस्कार हॉस्पिटल की भव्य ओपनिंग करने वाले डॉ संजीव अग्रवाल और डॉ मोहित गुप्ता का फ़ोटो मृतकों में लगा दिया गया और पेज तीन पर चार कॉलम का समाचार तान के लगा दिया गया। तीन मई को जैसे ही लोगों ने हिंदुस्तान अखबार पढ़ा तो सनसनी मच गयी। प्रसिद्ध डॉक्टरों के मर जाने से संबंधित समाचार पढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इन डाक्टरों को फ़ोन घनघनाना शुरू कर दिया। सैकड़ों लोगों का संजीव अग्रवाल के घर और अस्पताल के बहार तांता लग गया।

हिंदुस्तान की अखबार की इस घोर लापरवाही के कारण बुलन्दशहर के दो डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉ संजीव अग्रवाल इस प्रकरण से काफी गुस्से और तनाव में है। डॉ संजीव के तेवर देख हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ अनिल शर्मा के होश उड़ गए हैं। सुबह से अनिल शर्मा किसी भी प्रकार से समझौते के प्रयास में जुटा हुआ है। लेकिन डाक्टर किसी प्रकार से सुनने को तैयार नहीं हैं। कुछ दिनों पहले संजीव अग्रवाल के पुराने क्लीनिक में एक मरीज की मौत पर हंगामा हो गया था, जिसके बाद अनिल शर्मा ने जान बूझकर खबरें चलाई थीं और संजीव अग्रवाल पर दबाव डाला था। संजीव अग्रवाल के नहीं झुकने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ ख़बरों की सीरीज चलाई गयी। अब अनिल शर्मा की इस गलती ने हिंदुस्तान के संपादकों के माथे पर भी शिकन की लकीर खीच दी है।

यहां आपको बता दे कि जब से अनिल शर्मा ने हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ की कुर्सी संभाली है, तब से अखबार गर्त में जा रहा है। अखबार की सर्कुलेशन पिछले 8 महीनो में 18 हजार से घटकर महज 15 हजार रह गयी है। विज्ञापन का बिजनेस भी तेजी से घट रहा है। अब इस नए प्रकरण से अनिल शर्मा की कुर्सी हिलने लगी है। हिंदुस्तान के एक बड़े पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शशि शेखर को पूरे मामले की जानकारी मिल चुकी है।

बुलंदशहर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.



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