दैनिक जागरण जिसे ‘भाजपाई’ बता रहा, जिलाध्यक्ष उसे अपना आदमी नहीं मान रहे (देखें वीडियो)

उन्नाव में दैनिक जागरण इन दिनों चर्चा में है. एक डिप्टी एसपी के खिलाफ दैनिक जागरण अभियान चला रहा है. इस बिना पर कि सीओ के रूप में पदस्थ डिप्टी एसपी ने एक भाजपा कार्यकर्ता को सरेराह मारा-पीटा. उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि जिसे भाजपा कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह पार्टी का आदमी नहीं हैं.

दरअसल दैनिक जागरण अखबार अपने उन्नाव संस्करण में एक प्रकरण को लेकर उन्नाव सीओ सिटी को गुनाहगार बताने पर तुला हुआ है. जानकारों का कहना है कि सीओ सिटी के विरुद्ध निजी लाभवश खबर का रुख मोड़ा गाय और बदनाम करने की कोशिश की गई.

उन्नाव जिले के दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में मवेशी भरे वाहनों, स्लॉटर हाउसों, टैम्पो स्टैण्डों पर होने वाली अवैध वसूली को उन्नाव सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह ने रुकवा दिया. इसको लेकर अपराधी टाइप लोग सीओ सिटी से खार खाए बैठे थे. इन अवैध धंधों से महीना पाने वाले पत्रकार भी पैसा आना बंद होते देख गुस्से में शरीक हो गए. इसके बाद एक अपराधी को बीजेपी का कार्यकर्ता घोषित कर सीओ के खिलाफ अभियान चला दिया गया. इसे जोरशोर से उछाला दैनिक जागरण ने.

मामला यूं है. वाहन चेकिंग के दौरान वाहन चालक निशानाथ उर्फ मोना पाण्डेय को जब महिला पुलिसकर्मी ने रोकना चाहा तो उस दौरान बाइक चालक मोना पाण्डेय ने महिला पुलिसकर्मी के दोनों पैरों के बीच अपनी बाइक का अगला पहिया घुसेड़ा. इसका विरोध मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी किया. उस दौरान सीओ अपनी सरकारी गाड़ी में मौजूद थे.

चेकिंग स्थल पर पुलिसकर्मियों तथा बाइक चालक मोना पाण्डेय के बीच हो रही कहासुनी को देख जब सीओ सिटी ने मामले को शान्त करा बाइक चालक से उसकी बाइक के कागजात मांगे तो मोना पाण्डेय ने कागजात साथ में मौजूद न होने की बात कही. इसके बाद जब उसका ड्राइविंग लाइसेंस मांगा गया तो मोना अपना लाइसेंस भी नहीं दिखा पाया.

इसके बाद सीओ सिटी स्वतंत्र सिंह के आदेशानुसार चेकिंग स्थल पर मौजूद टीआई रामजीत यादव ने मोना पाण्डेय की बाइक को सीज कर दिया. जब कुछ देर में मोना ने अपनी बाइक के कागजात घर से मंगवा कर दिखाया तब उसे बाइक सौंपी गई. इस दौरान निशानाथ उर्फ मोना पाण्डेय ने स्वेच्छानुसार चालानी कागज पर अपने हस्ताक्षर भी किए.

इसके बाद मोना पाण्डेय ने घर जाकर और अपने परिचितों को बुलाकर प्रचारित करने लगा कि उसे सीओ ने पीटा है. ये पिटाई की बात को उसने रातभर आराम से सोने के बाद सुबह उजागर किया. सुबह 7:30 बजे उसने अपना मेडिकल परीक्षण कराया. मेडिकल परीक्षण कराने के महज डेढ़ घण्टे बाद सुबह 9 बजे मोना की हालत को नाजुक बताते हुए कानपुर स्थित हैलट अस्पताल के लिए रेफर कराया गया.

जिसे मरणासन्न स्थिति में बताया गया, वह हैलट अस्पताल में इलाज के लिए रेफर होने के महज 2 घण्टे बाद मोना पांडेय स्वयं सीओ सिटी के खिलाफ अपना शिकायती पत्र लेकर उन्नाव एसपी ऑफिस भी पहुंच गया. सोचने वाली बात है कि जो व्यक्ति मरणासन्न स्थिति में अस्पताल में पड़ा होगा, वह महज 2 घण्टे में ठीक होकर उन्नाव एसपी ऑफिस कैसे पहुंच गया?

इसके बाद मोना को बीजेपी का सक्रिय कार्यकर्ता बता खबरनवीसों के माध्यम से मामले को उछाला गया. मोना को बीजेपी का कार्यकर्ता घोषित कर खबरें प्रकाशित की गई. उधर, बीजेपी के उन्नाव जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार ने मोना पाण्डेय को बीजेपी का कार्यकर्ता स्वीकार करने से इनकार कर दिया. दैनिक जागरण मोना को भाजपा कार्यकर्ता बताकर खबरें छापता रहा.

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