दैनिक जागरण में बड़े पैमाने पर संपादकों के तबादले, मनोज झा बने बिहार के स्टेट हेड

दैनिक जागरण अखबार में बड़े पैमाने पर संपादकों के तबादले की खबर आ रही है. चर्चा है कि कुल आठ संपादक इधर से उधर किए गए हैं. कुछ को प्रमोट करके संपादक बनाया गया है. सबसे बड़ा फेरबदल दिल्ली और बिहार में हुआ है. दैनिक जागरण के दिल्ली-एनसीआर के संपादक मनोज झा को बिहार का …

पशु तस्करों का प्रमुख निकला दैनिक जागरण का रिपोर्टर!

– कभी दैनिक जागरण का पत्रकार तो कभी काली कोट पहन वकील बनकर इलाके में दिखाता रहा रौब -सहयोग न करने पर नवाबगंज से दो दरोगाओ को थानाध्यक्षी से धोना पढ़ा था हाथ…. रातों रात हो गया ट्रांसफर -न नौकरी न कोई बिजनेस चार साल में बना करोड़पति… करीब 5 साल पहले प्राइवेट स्कूल की …

दैनिक जागरण के मालिक एमएम गुप्ता को फर्जी खबर छापना पड़ा महंगा, भेजे गए जेल

दैनिक जागरण अख़बार के एक मालिक को कोर्ट ने जेल भेज दिया. मामला मध्य प्रदेश के रीवा जिले का है. शहर की ADJ कोर्ट ने 1998 के एक केस में दैनिक जागरण के मालिक मदन मोहन गुप्ता को जेल भेजा. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के खिलाफ लगातार दैनिक जागरण रीवा के अखबार मे …

दैनिक जागरण की घटिया रिपोर्टिंग : नर्सों के नाम के आगे ये क्या लिख दिया! देखें खबर

दैनिक जागरण की महिमा अपरंपार है. यहां जो हो जाए, समझो कम ही है. कभी दलित नेता मायावती के बारे में यहां अभद्र छाप दिया जाता है तो कभी किसी दूसरी स्त्री को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर दी जाती है. दैनिक जागरण को इसी कारण महिला विरोधी अखबार भी कहा जाता है. यह अखबार अपनी …

दैनिक जागरण जिसे ‘भाजपाई’ बता रहा, जिलाध्यक्ष उसे अपना आदमी नहीं मान रहे (देखें वीडियो)

उन्नाव में दैनिक जागरण इन दिनों चर्चा में है. एक डिप्टी एसपी के खिलाफ दैनिक जागरण अभियान चला रहा है. इस बिना पर कि सीओ के रूप में पदस्थ डिप्टी एसपी ने एक भाजपा कार्यकर्ता को सरेराह मारा-पीटा. उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि जिसे भाजपा कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह पार्टी का …

दैनिक जागरण और अमर उजाला ने अटलजी की मौत पर भी कारोबार कर लिया!

अगर नीचता और बेशर्मी की पराकाष्ठा देखनी है तो खुद को ब्रह्मांड का नंम्बर एक अखबार कहने वाले दैनिक जागरण का अटल जी की मौत के अगले दिन का अंक और “जोश सच का” यानी अमर उजाला का भी अटजी के मौत के अगले दिन का अंक उठा कर देखिये. हिंदी के दोनों प्रमुख अख़बारों …

दैनिक जागरण के फोटोग्राफर का पैसा लेते हो गया स्टिंग, देखें वीडियो

सबकी तस्वीरें खींचने वाले और स्टिंग करने वाले फोटोग्राफर का ही स्टिंग हो गया है. ये फोटोग्राफर दैनिक जागरण में कार्यरत है. नाम है जीतू सागर. दैनिक जागरण, गजरौला का छायाकार जीतू सागर बिजली बिल ठीक कराने के नाम पर रिश्वत लेते हुआ वीडियो में कैद. आरोप है कि बिजली बिल का भुगतान कराने के …

कोर्ट में मीडियाकर्मियों द्वारा डाले गए केस को घुमाने-लटकाने में उस्ताद है दैनिक जागरण प्रबंधन

Padampati Sharma : दो सितारों का जमीं पर हुआ मिलन बीती रात… टेलीविजन एंकरिंग की दो जबरदस्त युवा प्रतिभाएं 13 अप्रैल की शाम एक दूजे की हो गयीं. जी हां, मैं बात कर रहा हूं देश के सर्वश्रेष्ठ खेल पत्रकारों में एक और जाने माने युवा एंकर रवीश बिष्ट और परी जैसी एंकर खुशबू शर्मा का बरसों का रोमांस करनाल रोड स्थित वेलेंटाइन माटल में बीती शाम अंजाम यानी लग्न मंडप तक जा पहुंचा.

संयुक्त आयुक्त श्रम ने जागरण के मालिक मोहन गुप्त को नोटिस भेजा, शेल कम्पनी ‘कंचन प्रकाशन’ का मुद्दा भी उठा

दैनिक जागरण के एचआर एजीएम विनोद शुक्ला की हुई फजीहत…  पटना : दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्त को श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने नोटिस जारी कर जागरण कर्मियों द्वारा दायर किए गए जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लेकर वाद में पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होनी है। वहीं दैनिक जागरण पटना के एजीएम एचआर विनोद शुक्ला के जागरण प्रबंधन के पक्ष में उपस्थिति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए अधिवक्ता मदन तिवारी ने संबंधित बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत कागजात की मांग कर एजीएम शुक्ला की बोलती बंद कर दी। दैनिक जागरण के हजारों कर्मियों को अपना कर्मचारी न मानने के दावे एजीएम शुक्ला के दावे की भी श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डा.  वीरेंद्र कुमार के सामने हवा निकल गई।

इस फोटो के छापने पर दैनिक जागरण शामली आफिस पर महिलाओं ने किया हमला (देखें तस्वीर और वीडियो)

दैनिक जागरण शामली एडिशन में ट्रैक्टर ट्राला से स्कूल जा रही छात्राओं की एक तस्वीर प्रकाशित की गई. इसमें सभी छात्राएं सिर झुकाकर बैठी हुई थीं. दैनिक जागरण में गुरुवार के अंक में छपी इसी तस्वीर को लेकर शुक्रवार को कुछ महिलाओं ने शामली में दैनिक जागरण कार्यालय पर हमला बोल दिया. महिलाओं के साथ कुछ दबंग पुरुष भी थे. कार्यालय में मौजूद स्टाफ ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक न सुनी.

दैनिक जागरण वालों ने भी छापा लंबा-चौड़ा माफीनामा : ‘नंबर वन का हमारा दावा गलत था’

अमर उजाला लखनऊ अखबार में पिछले दिनों एक माफीनामा छपा था कि हमने गलती से खुद को नंबर वन बता दिया. ऐसा ही माफीनामा अब दैनिक जागरण पटना अखबार में छपा है. नंबर वन होने के फर्जी दावों पर कसी गई नकेल के कारण इन अखबारों को माफीनामा छापना पड़ रहा है.

दैनिक जागरण के कथित अवैध मुंगेर संस्करण की जांच एक माह में करने का आदेश जारी

मुंगेर (बिहार) : बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार आतीश चन्द्रा ने मुकदमा संख्या- 424110108021700412 । 2 ए में मुंगेर के लोक प्राधिकार सह जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी केके उपाध्याय को दैनिक जागरण अखबार के मुंगेर के लिए प्रकाशित कथित अवैध ”मुंगेर संस्करण” के मामले में एक माह में जांच रिपोर्ट राज्य सचिव को प्रेषित करने का आदेश जारी किया है।

जांच करने पहुंचे श्रम अधीक्षक को दैनिक जागरण के मैनेजर ने गेट के अंदर ही नहीं घुसने दिया

कानून और नियम को ठेंगे पर रखता है दैनिक जागरण प्रबन्धक… गया के श्रम अधीक्षक के साथ दैनिक जागरण प्रबंधक ने की गुंडागर्दी… नहीं करने दिया प्रेस की जांच… पंकज कुमार दैनिक जागरण गया के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. इन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड मांगा तो प्रबंधन ने इन्हें परेशान करना शुरू कर दिया… पंकज ने बिहार के श्रम आयुक्त गोपाल मीणा के यहां एक आवेदन दिनांक 26.07.2017 को दिया था.. इसमें पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि गया सहित दैनिक जागरण बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर मीडियाकर्मियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है. 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों एवं गैर-पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक समेत कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत ग्रेड की घोषणा भी नहीं की गई है.

दैनिक जागरण में सरकारी विज्ञापन छापने पर लगी रोक

पेड न्यूज के मामले की जांच के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिया आदेश, केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद डीएवीपी ने जारी किया निलंबन का आदेश, दैनिक जागरण पर पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने का आरोप हुआ साबित
नई दिल्ली। मीडिया इंडस्ट्री से एक चौंकाने वाली ख़बर आ रही है। पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने के मामले में बड़ी  कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन पर रोक लगा दी है। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में डीएवीपी को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि कि दैनिक जागरण सहित 51 समाचार पत्र जिन्होंने पेड न्यूज छापा है उन्हें किसी भी तरह से सरकारी विज्ञापन ना जारी किया जाए। केंद्र सरकार ने यह कार्रवाई पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों की सर्वोच्च संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश के बाद किया है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने ही दैनिक जागरण द्वारा पेड न्यूज छापने के मामले की जांच की। जांच में दैनिक जागरण अपने पक्ष में ठोस एवं पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाया।

बिहार में दैनिक जागरण कर रहा अपने कर्मियों का शोषण, श्रम आयुक्त ने जांच के आदेश दिए

दैनिक जागरण, गया (बिहार) के पत्रकार पंकज कुमार ने श्रम आयुक्त बिहार गोपाल मीणा के यहाँ एक आवेदन दिनांक लगाया था. पिछले महीने 26 जुलाई को दिए गए इस आवेदन में पंकज ने आरोप लगाया था कि गया जिले सहित जागरण के बिहार के सभी चार प्रकाशन केंद्र में श्रम कानून के तहत मीडियाकर्मियों और गैर-मीडियाकर्मियों को कई किस्म का लाभ नहीं दिया जा रहा है. यहां 90 प्रतिशत से अधिक पत्रकार एवं गैर पत्रकारों का प्राविडेंट फंड, स्वास्थ्य बीमा, सर्विस बुक सहित कई सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. साथ ही माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी, पद और ग्रेड की जो घोषणा की जानी थी, उसे भी नहीं नहीं किया गया है.

झूठी खबर छापने वाला दैनिक जागरण थूकने के बाद फौरन चाटने लगता है!

Yashwant Singh : सुबह सुबह एक फोन आया. आवाज आई- मैं मनीष राय बोल रहा हूं, मऊ से. मैंने कहा- बोलिए. मनीष जी ने अपना परिचय दिया और जो कुछ बताया उसे सुनकर मैं सन्न रह गया. आखिर दैनिक जागरण जैसे बड़े अखबार अगर इस तरह की गिरी हरकत और गैर-जिम्मेदार हरकत करेंगे तो इस देश में मीडिया की बची खुची प्रतिष्ठा में खत्म हो जाएगी. मनीष एक जमाने में पत्रकार हुआ करते थे. फिर वह राजनीति में आ गए और ब्लाक प्रमुख बन गए. इसके बाद उन्होंने एक ट्रामा सेंटर खोला. दैनिक जागरण में उनके ट्रामा सेंटर से संबंधित खबर छपी कि वहां मरीज की किडनी निकाल ली गई.

अमर उजाला अखबार में छप गई दैनिक जागरण के रिपोर्टर से बातचीत वाली खबर!

अमर उजाला अखबार में गुरुग्राम डेटलाइन से छपी एक खबर में रिपोर्टर लिखता है- ”यह जानकारी प्रदेश के पुलिस महानिदेश बीएस संधू ने दैनिक जागरण से बातचीत में दी.” इस लाइन के छपने से हंगामा मच गया है. लोग कह रहे हैं कि अमर उजाला वालों ने दैनिक जागरण की खबर नेट से चुराई और उसे बिना पढ़े बिना एडिट किए ही अखबार में चेंप दिया. फिलहाल अमर उजाला अखबार में दैनिक जागरण से बातचीत वाली खबर की न्यूज कटिंग ह्वाट्सअप और सोशल मीडिया पर जोरशोर से घूम रही है.

दैनिक जागरण ने मेरा पैसा नहीं दिया तो हाईकोर्ट जाऊंगा

पटना के बाढ़ अनुमंडल से दैनिक जागरण के पत्रकार सत्यनारायण चतुर्वेदी लिखते हैं-

मैं सत्यनारायण चतुर्वेदी दैनिक जागरण बिहार संस्करण के स्थापना व प्रकाशनकाल से बाढ़ अनुमण्डल से निष्ठा व ईमानदारी पूर्वक संवाद प्रेषण का कार्य करता रहा हूँ. नये सम्पादक जी के आने के कुछ ही महीने बाद वर्ष 2015 के अक्टूबर माह से अचानक मेरी खबरों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गयी जो अब तक जारी है। इस बारे में मैंने रोक हटाने का निवेदन श्रीमान सम्पादक जी से किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

दैनिक जागरण, कानपुर का एक वरिष्ठ अधिकारी सड़क पर घूम-घूम कर गाड़ियां चेक कर रहा!

A senior official of dainik jagran Kanpur is checking vehicles

A senior high rank official posted in Dainik jagran head office Kanpur now a days on an extra duty. He has self pro claimed FLYING SQUAD,  who stop four wheelers on roads, if DAINIK JAGRAN Sticker is pasted on vehicle wind screens. Actually, he want to prove himself as most loyal employee to Dainik jagran prakashan owners. On Saturday, he stopped a commercial Ola cab. He overtook cab on mall road in such a way that cab escaped from a major accident.

मजीठिया पर आज आएगा कोर्ट का फैसला, जागरणकर्मियों ने बैठक कर एकजुटता दिखाई

आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेतन आयोग को लेकर फैसला आना है। इस वेतन आयोग के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी 2014 को अपना फैसला सुनाया था और अख़बार मालिकानों से स्पष्ट कहा था कि वर्कर की राशि एक साल में 4 किश्तों में दें, लेकिन मालिकान 20 जे का बहाना बनाते रहे और आज तक कर्मचारियों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी। तरह तरह से परेशान किया सो अलग। जिन्होंने मजीठिया की मांग की, कंपनियों ने उनका तबादला किया। निलंबन और सेवा समाप्ति का फरमान सुना दिया सो अलग। बावजूद इसके वर्कर हारे नहीं और अपनी लड़ाई लड़ते रहे। इस लड़ाई का कल अंतिम दिन होगा, जब माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा।

इन दोनों बड़े अखबारों में से कोई एक बहुत बड़ा झुट्ठा है, आप भी गेस करिए

हिंदुस्तान और दैनिक जागरण अखबारों ने एक रोज पहले पन्ने पर लीड न्यूज जो प्रकाशित की, उसके फैक्ट में जमीन-आसमान का अंतर था. हिंदुस्तान लिख रहा है कि यूपी में सड़कों के लिए केंद्र ने पचास हजार करोड़ रुपये का तोहफा दिया वहीं दैनिक जागरण बता रहा है कि सड़कों के लिए राज्य को दस हजार करोड़ रुपये मिलेंगे. आखिर दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल रहा है.

हे जागरण वालों! फर्जी विज्ञापन के जरिये मीडियाकर्मियों का माखौल उड़ाना बंद करो

अक्टूबर 2015, अगस्त 2016, जनवरी 2017 और अभी मई 2017… इतने लम्बे समय से दैनिक जागरण विज्ञापन जारी करके मीडिया कर्मी ही ढूंढ रहा है। अरे भई साफ लिखो न कि हमको पत्रकार नहीं, मजदूर चाहिए जो न तनख़्वाह मांगे और न ही मजीठिया वेज बोर्ड। नौकरी के लिए जारी विज्ञापनों में दैनिक जागरण ने बायोडाटा भेजने के लिए पहले तो मेल आईडी hr@nda.jagran.com देता रहा, अब career@jagran.com पर रिज्यूम मांग रहा। लेकिन career@jagran.com पर कोई भी मेल सेंड नहीं कर पा रहा।

जागरण में प्रकाशित वो विज्ञापन जिसमें बायोडाटा भेजने के लिए जिस मेल आईडी का उल्लेख किया गया है, वह काम नहीं कर रहा. 

दैनिक जागरण आफिस में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम पढ़ना मना है!

अभिव्यक्ति की आजादी का झूठा ढिंढोरा पीटता है दैनिक जागरण… मीडिया वालों की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया पर लगा रखा है प्रतिबंध… बड़े-बड़े लेखों और मंचों के जरिए दैनिक जागरण के संपादक-मालिक लोग हमेशा से आवाज उठाते रहते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए. ये लोग अपने मीडिया कर्मचारियों को भी नसीहत देते हैं कि तथ्य के साथ बातों को रखा जाए, लोकतंत्र में हर खंभे को सम्मान दिया जाए. लेकिन वास्तविकता कुछ और भी है. आज उस समय बहुत बुरा फील हुआ जब पत्रकारिता जगत की खबर देने वाले पोर्टल भड़ास4मीडिया के बारे में पता चला कि इस पर दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ऑफिस में पूर्णत प्रतिबंधित लगाया हुआ है.

शेम शेम दैनिक जागरण! मजीठिया मांगने पर संकट से घिरे वरिष्ठ पत्रकार का जम्मू कर दिया तबादला

दैनिक जागरण बिहार का अमानवीय शोषणकारी चेहरा…दैनिक जागरण के वरिष्ठ एवं ईमानदार पत्रकार पंकज कुमार का मजीठिया के अनुसार वेतन मांगने पर जम्मू किया तबादला…. वीआरएस लेने  के लिए जागरण प्रबंधन बना रहा है दबाव… बिहार के गया जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार अपनी बेख़ौफ़ एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. ये दैनिक जागरण के बिहार संस्करण के स्थापना काल से उससे जुड़े हुए हैं.

आइडिया चोरी करने और धमकाने के मामले में दैनिक जागरण पर हुआ मुकदमा

दैनिक जागरण वाले चोरी और सीनाजोरी के लिए कुख्यात हैं. ताजा मामला पटना का है. मानस कुमार उर्फ राजीव दुबे अपनी कंपनी चलाते हैं. उन्होंने बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स पर आधारित ‘बिल्डकान’ नामक एक प्रोग्राम करने का इरादा बनाया. इसके लिए गल्ती से उन्होंने एक ऐसे आर्किटेक्ट (नाम- विष्णु कुमार चौधरी) की मदद ली जो दैनिक जागरण से भी जुड़ा हुआ था. उस आर्किटेक्ट ने सारा आइडिया दैनिक जागरण वालों को बता दिया.

दिल्ली की श्रम अदालत ने दैनिक जागरण पर ठोंका दो हजार रुपये का जुर्माना

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े दिलीप कुमार द्विवेदी बनाम जागरण प्रकाशन मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय ने दैनिक जागरण पर दो हजार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है। इस जुर्माने के बाद से जागरण प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। बताते हैं कि गुरुवार को दिल्ली की कड़कड़डूमा श्रम न्यायालय में दैनिक जागरण के उन 15 लोगों के मामले की सुनवाई थी जिन्होंने मजीठिया बेज बोर्ड की मांग को लेकर जागरण प्रबंधन के खिलाफ केस लगाया था। इन सभी 15 लोगों को बिना किसी जाँच के झूठे आरोप लगाकर टर्मिनेट कर दिया गया था। गुरुवार को जब न्यायालय में पुकार हुयी तो इन कर्मचारियों के वकील श्री विनोद पाण्डे ने अपनी बात बताई।

संजय गुप्ता समेत पूरी जागरण टीम गिरफ्तार न होने का मतलब चुनाव आयोग भी किसी दबाव में है!

Ram Janm Pathak : हेकड़ी, एक्जिट पोल और खानापूरी… चुनाव आयोग के स्पष्ट मनाही की जानकारी होने के बावजूद अगर दैनिक जागरण की आनलाइन साइट ने एक्जिट पोल छापने की हिमाकत की है तो यह सब अचानक या गलती से नहीं हुआ है, जैसा कि उसके स्वामी-संपादक संजय गुप्ता ने सफाई दी है। गुप्ता ने कहा कि यह ब्योरा विज्ञापन विभाग ने साइट पर डाल दिया। अपने बचाव में इससे ज्यादा कमजोर कोई दलील नहीं हो सकती। अखबार के बारे में थोड़ा -बहुत भी जानकारी रखने वाले जानते हैं कि समाचार संबंधी कोई भी सामग्री बिना संपादक की इजाजत के बगैर नहीं छप सकती।

भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन… जागरण कोई अख़बार है! : विमल कुमार

Vimal Kumar : दो साल की सज़ा या जुर्माना या दोनों एक साथ का प्रावधान है। ये लोग अदालत को मैनेज कर केवल जुर्माना देकर बच जाएंगे। जिसने विज्ञापन दिया उसे भी जेल की सजा हो। जागरण कोई अख़बार है, भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन!

यशवंत की जागरण कर्मियों को सलाह- संजय गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए चुनाव आयुक्त को पत्र भेजो

Yashwant Singh : दैनिक जागरण का संपादक संजय गुप्ता है. यह मालिक भी है. यह सीईओ भी है. एग्जिट पोल वाली गलती में यह मुख्य अभियुक्त है. इस मामले में हर हाल में गिरफ्तारी होनी होती है और कोई लोअर कोर्ट भी इसमें कुछ नहीं कर सकता क्योंकि यह मसला सुप्रीम कोर्ट से एप्रूव्ड है, यानि एग्जिट पोल मध्य चुनाव में छापने की कोई गलती करता है तो उसे फौरन दौड़ा कर पकड़ लेना चाहिए. पर पेड न्यूज और दलाली का शहंशाह संजय गुप्ता अभी तक नहीं पकड़ा गया है.

संपादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया, गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये : देवेंद्र सुरजन

Devendra Surjan : एक्ज़िट पोल छापने वाले जागरण परिवार की पूर्व पीढ़ी के दो और सदस्य सांसद रह चुके हैं. गुरुदेव गुप्ता और नरेन्द्र मोहन. यह परिवार सत्ता की दलाली हमेशा से करता आ रहा है. वर्तमान में जागरण भाजपा का मुखपत्र बना हुआ है. सत्ताधीशों का धन इसमें लगा होने की पूरी सम्भावना है. हर राज्य में किसी न किसी नाम से और किसी न किसी रूप में संस्करण निकाल कर सरकार के क़रीबी बना रहना इस परिवार को ख़ूब आता है. एक्ज़िट पोल छाप कर सम्पादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया जबकि गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये थी.