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चन्द्रकला को बदनाम करने के लिए जागरण के पास अब झूठी खबरों का सहारा

यादव सिंह की तरह माल कमाने वाले जागरण के पेड न्यूज के सौदागरों को अब डीएम चन्द्रकला की तरक्की चुभ रही है। देश के सभी मुद्दों को किनारे करते हुए जागरण ने 6 दिन पुरानी एक वेबसाइट की खबर को पूरे प्रदेश के एडीशनों में फ्रंट पेज के टॉप पर छापा है। आइए, इनके ज्ञानचक्षु खोल देते हैं। चन्द्रकला आईएएस बनने से पहले आंध्र प्रदेश राज्य की सेवा में 2004 से डिप्टी रजिस्ट्रार भी थीं। 2008 से आईएएस हैं और उनके पति 20 सालों से आंध्र प्रदेश के सिचाई विभाग में इंजीनियर हैं।

यादव सिंह की तरह माल कमाने वाले जागरण के पेड न्यूज के सौदागरों को अब डीएम चन्द्रकला की तरक्की चुभ रही है। देश के सभी मुद्दों को किनारे करते हुए जागरण ने 6 दिन पुरानी एक वेबसाइट की खबर को पूरे प्रदेश के एडीशनों में फ्रंट पेज के टॉप पर छापा है। आइए, इनके ज्ञानचक्षु खोल देते हैं। चन्द्रकला आईएएस बनने से पहले आंध्र प्रदेश राज्य की सेवा में 2004 से डिप्टी रजिस्ट्रार भी थीं। 2008 से आईएएस हैं और उनके पति 20 सालों से आंध्र प्रदेश के सिचाई विभाग में इंजीनियर हैं।

क्या दोनो मियां-बीबी मिलकर इतना भी नहीं कमा सकते? और, बता दूँ चन्द्रकला का परिवार जागरण वालों की तरह सरकारी कागज की सब्सिडी खाकर अमीर नहीं हुआ। वे वहां के उद्योगपति भी हैं, उनके पास राइस मिल है। जागरण वालों को लगता है कि वो अगर इतना ज्यादा माल ऐन केन प्रकारेण कमा गए तो कोई दूसरा तनिक भी पैसा इमानदारी से भी न कमाए। चंद्रकला की बेटी को उनके परिवार ने अगर कोई फ्लैट गिफ्ट दे दिया तो जागरण वालों को मिर्ची क्यों लग रही।

दरअसल सारा मामला यही है कि चंद्रकला ने जागरण वालों को उनकी औकात दिखा दी, उनकी ब्लैकमेलिंग की, सामंती मानसिकता की, स्त्री विरोधी पत्रकारिता की औकात दिखा दी। आठ दिन से जागरण वालों का पूरा परिवार डिस्टर्ब है। चंद्रकला ने तो थूक दिया तुम्हारे मुँह पर। सारा समाज भी बेशर्मों तुम पर थू-थू कर रहा है। क्या अभी भी अकल ठिकाने नहीं आयी। अगर माँ का दूध पिया है तो चन्द्रकला के अलावा बाकी 28 अफसरों का भी तो छापों, जिस जिस ने अपनी संपत्ति का विवरण नहीं जमा किया है। मालूम है, तुम लोगों से न हो पाएगा।

जागरण वाले कितने दूध के धुले हैं, सब जानते हैं। अखबार का कागज डकारा तुमने। गरीब पत्रकारों का वेतन डकारा तुमने। तुम डकार गये मजीठिया की सिफारिशें। बताओं कानून के बुतों, तुमने कितनों को मजीठिया का हक दिया। गरीब पत्रकारों का हक मारकर मठाधीश बनते हो। मैं बताता हूँ तुम्हें कहाँ से लाये ये शुगरमिल, शराब के कारखाने, फैक्ट्रियां। सब जनता को उल्लू बनाकर माल डकारा है तुमने। तुम्हारे मालिक में ऐसे कौन से सुरखाब के पर लगे हैं कि सरकार तुम्हें अपने कोटे से एमपी बनाती है। तुम सरकार के तलुवे चाटने वाले दलाल हो। तुम्हारे दर्जनों ब्यूरो चीफों और फोटोग्राफरों ने करोड़ों कमाए हैं, प्लाट खरीदे हैं, फ्लैट खरीदे हैं, उनका इनकम टैक्स डिटेल क्यों नहीं छापते?

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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