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उत्तर प्रदेश

अजीब वरिष्ठ घोंचू था वो पत्रकार- भड़ास में तो माइक-ID चलती भी नहीं!

मनीष दुबे-

“छह-7 साल पहले मेरे पास भड़ास में काम करने का ऑफर आया था. माइक-ID लेने दिल्ली बुलाया था. मैं गया नहीं. मना कर दिया था.”

“क्यों… किसने बुलाया था? यशवंत जी ने!’ मैंने पूछा… ‘कौन यशवंत?’ उसने कहा.

मेरी तो लेड़ी ही सूख गई. पहली बात भड़ास की माइक-ID और दूसरा, कौन यशवंत… सुनकर!

बताया ‘यशवंत सिंह… फाउंडर एडिटर, भड़ास. नहीं जानते क्या?’ मैंने फिर पूछा.
उसने चौंक कर जवाब दिया… ‘नहीं!’

मैंने उन्हें धीरे से समझाया, “तो गुरु कोई रॉन्ग नंबर रहा होगा. नक्कालों से सावधान रहा करो भईया!”

ये एक वरिष्ठ पत्रकार थे. कानपुर निवासी. मुझे परसों नरसों एक कार्यक्रम में मिले थे. चौहान साब नाम से चर्चित महोदय की गाड़ी में उनके बैनर का जितना बड़ा नाम लिखा था… शायद उसके बाद दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस वाले केंद्रीय कार्यालय में ही लिखा हो, बाकी नहीं.

बहरहाल, वरिष्ठ चौहान साब मुझे अजीब घोंचू समझ में आये. घोंचू न होते तो उन्हें पता रहता की भड़ास माइक-ID वाली उड़नछू पत्रकारिता में विश्वास नहीं रखता.

खैर, उन्हें जालंधर ऑफिस से अटैच पत्रकारी में मजा नहीं आ रहा है… किसी के पास कोई बैनर हो तो हमें कमेंट कर दें. हम चौहान साब तक सूचना फॉरवर्ड कर देंगे. वे तुरंत ज्वाइन करने के लिए लालायित बैठे हैं.

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भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

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