सिद्धार्थ ताबिश-
इतनी भारी भीड़ मज़ाक नहीं है.. आप इसे किसी भी तरह से कण्ट्रोल नहीं कर सकते हैं. आपको भीड़ लिमिट करना होगा, या फिर इसे अलग-अलग तरीके से बांटना होगा.. जैसे हज में होता है कि सऊदी सरकार को पता है कि हमारे पास इतनी व्यवस्था है, इतने लोगों के ठहरने और खाने पीने का ही इंतज़ाम है, तो वो उसी हिसाब से लोगों को बुलाते हैं..
आप हज के लिए जब अप्लाई करते हैं तो ज़रूरी नहीं है कि आपका नाम पहली बार में ही आ जाये.. हर देश का अलग-अलग कोटा होता है.. जैसे भारत का लगभग एक लाख पिचहत्तर हज़ार है, उस से ज्यादा भारतीय नहीं जा सकते हैं हज के लिए.
कुम्भ के लिए भी ऐसा ही कुछ करना होगा.. हर क्षेत्र और प्रान्त के लिए लिमिट बनानी चाहिए.. जैसे बिहार से इतने ही लोग आ पायेंगे, और पंजाब से इतने.. सबको पहले से अप्लाई करना होगा.. सबको स्वस्थ रहना होगा और आयु 65 से कम होनी चाहिए..
सबके स्वास्थ्य की डाक्टरी जांच होगी तभी उनको परमिट मिलेगा आने के लिए.. ये नियम अखाड़ा और साधुवों के लिए न हो मगर आम जनता के लिए हो
हमें भीड़ नहीं दिखानी है.. न भीड़ दिखा के शाबासी लूटनी है दूसरे देशों से.. ये बचकानी बात है.. हमें हाईजीन, व्यवस्था, सुन्दरता, सहूलियत और आस्था दिखानी है..
ये दिखाना है कि लोगों ने सफलतापूर्वक स्नान किया और वो भी साफ़, सुंदर और अच्छे पानी में.. एक लाख ने किया या एक करोड़ ने, ये कोई वाहवाही वाली बात नहीं है..
अगर भीड़ के बल पर हम अपनी पीठ ठोकेंगे तो आज नहीं तो कल ये “नकारात्मक” मार्केटिंग साबित होगी.. अभी लोग चुप हैं मगर कुछ महीनों में लोग और धज्ज्यियाँ उड़ायेंगे.. फिर वो बैकफायर साबित होगा.
श्याम मीरा सिंह-
कुंभ जैसे महान और गौरवशाली उत्सव को एक घटना ने बुरी याद में बदल दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने अच्छी व्यवस्थाएँ की थीं। ये भी सोच रहा था कि भीड़ कम हो तो जाऊँ। मगर इस घटना ने इस उत्सव की ख़ुशी को कम कर दिया। घटना हुई है तो कमी भी निश्चित ही रही होगी। सरकार को इसे धार्मिक ही बने रहने देना चाहिए था। लेकिन जिस तरह का प्रचार और ग्लैमराइजेशन हुआ उस कारण भीड़ आने की अति हो गई। इतने बड़े कार्यक्रम में दो तीन बड़ी घटनाएँ होना एक्सपेक्टेड ही था।
शायद भीड़ कंट्रोल की जानी चाहिए थी, लोगों से अपील करनी चाहिए थी कि वे पर्यटन की तरह ना आएँ। आस्थावान लोग ही आएँ, और दूसरे तटों पर जाएँ जहां भीड़ अपेक्षाकृत कम हो। लेकिन कुंभ की चकाचौंध इतनी कर दी गई कि भीड़ संख्या नियंत्रण जैसा कार्य पीछे छूट गया। CM योगी आदित्यनाथ की एक भावुक वीडियो देखी। बुरा लगा। इतना बड़ा कार्यक्रम हुआ और अंत में कुछेक घटनाओं ने पानी फेर दिया।
उम्मीद कम है कि इन घटनाओं से सबक़ लिया जाएगा। पूर्व में जिस तरह धार्मिक कार्यक्रमों को सरकारी धन लगाकर भव्य बनाने का जो राजनीतिक कार्य किया जा रहा है, जिससे वोटों का अनुवाद हो, समर्थक बढ़ें। उससे कम ही लगता है कि सरकार इस घटना से सबक़ लेगी। मेरा निजी मत है धार्मिक कार्यों को जितना साधारण, सुलभ और सहज रखा जाए उतना बेहतर। धार्मिक कार्यों को समाज पर छोड़ना चाहिए। सरकारी उत्प्रेरक उसके मूल को ख़त्म करते हैं। धार्मिक कार्यों में धार्मिकता कम विलासिता, दिखावा, और नौटंकी का तत्व अधिक बढ़ जाता है। सादर!
मुख्य सचिव और मेला अधिकारी को लीगल नोटिस
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर के माध्यम से कुंभ भगदड़ में मृतकों की संख्या को लेकर चल रहे भ्रम के संबंध में यूपी के मुख्य सचिव तथा मेला अधिकारी, कुंभ को लीगल नोटिस भेजा है.
लीगल नोटिस में कहा गया है कि प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन ने अब तक मात्र संगम क्षेत्र में 30 व्यक्तियों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्ट की है. इसके विपरीत मीडिया रिपोर्टों से संगम क्षेत्र में कम से कम 58 लोगों की मृत्यु होने की बात सामने आई है. इसके अलावा झूंसी क्षेत्र में भी उस रात भगदड़ मचने और इस दौरान 7-8 लोगों की मौत की बात बताई जा रही है.
अमिताभ ठाकुर ने इन दोनों अफसरों से संबंधित मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मृतकों की संख्या का सही निर्धारण कर उन्हें उनके ईमेल पर सूचित करने की मांग की है.
डॉ नूतन ठाकुर ने कहा है कि यदि उनके मुवक्किल को 3 फरवरी 2025 तक उत्तर नहीं मिलता है तो वे इस प्रकरण को आगे सक्षम फोरम पर ले जाएंगे.
देखें नोटिस…





