
संजय कुमार सिंह
आज हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर और नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर दो कॉलम की खबर है जो बताती है कि अमेरिका ने 117 निर्वासित भारतीयों की दूसरी खेप को भी जंजीरों में जकड़ कर भेजा गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू की एक और खबर के अनुसार 112 निर्वासितों की तीसरी खेप के साथ तीसरा विमान भी अमृतसर पहुंच चुका है। द हिन्दू की खबर में लिखा है कि दूसरी खेप में आये लोगों ने कहा कि उन्हें भी यात्रा के दौरान बेड़ियों में रखा गया था लेकिन यह शीर्षक में नहीं है और तीसरे विमान में आने वाले लोगों के बारे में इसमें या आज किसी और अखबार में नहीं बताया गया है।
दूसरी ओर, आज की बड़ी खबर यह भी है कि नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ में मरने वाले 18 हो गये (टाइम्स ऑफ इंडिया)। आज यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स, दि एशियन एज में भी लीड है। इस खबर और इसे महत्व देने का मकसद मरने वालों की संख्या ज्यादा होने की अफवाह को रोकना हो सकता है वरना यह सूचना लीड जैसी नहीं है। आज खबर यह होनी थी कि कल की भगदड़ के बाद आज स्टेशन और प्लैटफॉर्म की क्या स्थिति थी। कुछ बदलाव आया कि नहीं और आया तो क्या। खबरों से नहीं लगता है कि कोई बदलाव आया है। हालांकि, ऐसी एक खबर (या कोशिश) आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर है।
आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, पुलिस का दावा, एक नाम वाली दो ट्रेनों पर भ्रम से मची भगदड़…. दम घुटने से हुई ज्यादातर मौतें। नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, गृहमंत्रालय को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट, रेलवे ने बनाई जांच समिति। यहां 18 मौतों के साथ 15 लोगों के अस्पताल में होने की भी खबर है। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, “भीड़ बढ़ने और ट्रेन (के नाम) को लेकर भ्रम से भगदड़ मची : रेलवे”। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, “विशेष ट्रेन की घोषणा, प्लैटफॉर्म पर भीड़ (पहुंचने की जल्दबाजी) : जांच में संभावित कारण नजर आते हैं”। रेलवे ने भीड़ बढ़ना कारण बताया है तो इसे देखना उसे ही था और जब प्रयागराज जाने वालों की भीड़ है, एक ही समय एक ही नाम से दो ट्रेन होगी तो भ्रम और भगदड़ न भी हो, यात्री को नुकसान और परेशानी तो हो ही सकती है। और रेलवे उतने का दोषी व जिम्मेदार तो है ही पर खबरें बचाव करने वाली हैं।
आप जानते हैं कि प्रयागराज में भगदड़ से मरने वालों की संख्या जैसे बताई गई उसपर लोगों को यकीन नहीं है और 100 से लेकर 1000 लोगों के मरने की चर्चा चल रही है। जो भी हो, सोशल मीडिया पर जब यह वीडियो घूम रहा है कि (रेल) पुलिस ने एक रिपोर्टर से कहा कि वह अपना वीडियो डिलीट करने का दिखावा करे तभी छोड़ा जायेगा और इस तरह यह आरोप फैल जाये कि मरने वालों की संख्या कम बताने का प्रयास चल रहा है तो यह मजबूरी की घोषणा और उसका प्रचार हो सकता है। यह इसलिए भी जरूरी है कि दिल्ली के उपराज्यपाल अपने ट्वीट को संपादित कर घटना को छिपाने की कोशिश करते प्रचारित हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने भी आरोप लगाया है कि वास्तविक संख्या छिपाई गई है और सही संख्या अभी भी अस्पष्ट है। इसीलिए सारा भार मीडिया पर आ गया है और वह दिख रहा है। कल अखबारों ने नहीं बताया था कि अमेरिका से भेजे गये प्रवासियों को बेड़ियों के साथ भेजा गया था कि नहीं और आज यह नहीं बताया है कि नई दिल्ली स्टेशन पर भीड़ कम करने की कोशिशों का कितना असर हुआ है।
अमेरिका अगर प्रवासियों को वापस भेज रहा है तो सरकार भी काम कर रही है बताने के लिये आज एक खबर इंडियन एक्सप्रेस में है। इसके अनुसार मुंबई पुलिस ने कहा है कि 12 अवैध प्रवासियों को बंग्लादेश भेजा जा चुका है। पर मामला इतना ही नहीं है। दि एशियन एज ने पांच कॉलम की खबर छापी है जिसके अनुसार आरएसएस ने सरकार से ट्रम्प की आप्रवसी विरोधी लाइन पर चलने के लिए कहा है। इसके साथ बंगाल में संघ के आयोजन में हिन्दुओं से एकजुट रहने की अपील की खबर भी है। बर्धमान के इस आयोजन में संघ प्रमुख ने कहा और यह नवोदय टाइम्स में तीन कॉलम में छपा है कि हिन्दू समाज देश का जिम्मेदार समाज है। यह ‘खबर’ और भी अखबारों में पहले पन्ने पर है। आप समझ सकते हैं कि अखबारों में सरकार की लापरवाही, चूक और निकम्मेपन की खबरों को तो दबा दिया जाता है लेकिन वोट बटोरू प्रयासों को पूरा प्रचार दिया जाता है और यह इरादतन न भी हो तो होता हुआ साफ नजर आता है। कहने की जरूरत नहीं है कि होता वही है जिसकी जरूरत है। जैसे ट्रम्प की लाइन पर चलना। उसमें बेड़ियों का मामला गौण है और भारतीयों को बिना बेड़ियों के भेजना सुनिश्चित करने की बजाय बांग्लादेशियों को उससे भी बुरी हालत में भेजना कोई मुद्दा नहीं है पर हो सकता है उसे भी प्रचारित किया जाये और बेड़ियों की खबर तो आप देख ही रहे हैं। प्रधानमंत्री अमेरिका से हो आये हैं तब यह स्थिति है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार अमेरिका से वापस भेजे गये लोगों में पंजाब के दो भाई हैं जो 2023 की एक हत्या के मामले में वांछित थे। अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। आप जानते हैं कि सरकार ने अपने खिलाफ लिखने-बोलने वालों को विदेश जाने से रोकने में कितनी मुस्तैदी दिखाई है। इनमें वो लोग भी हैं जिनपर कोई मामला नहीं था और अवैध रूप से भी रोके गये हैं। फिर भी उन्हें रोककर परेशान तो किया ही गया, दौरे का मकसद पूरा नहीं होने दिया गया। इससे सरकार के विरोधियों में जो डर का माहौल बना वह भी है। ऐसे कई मामले ज्ञात हैं जो सार्वजनिक नहीं हैं उनकी संख्या अलग होगी। मुद्दा यह है कि सरकार अपने विरोधियों को तो मुस्तैदी से रोक लेती है लेकिन हत्या आरोपी अवैध रूप से विदेश भाग जाता है और सरकार रोक नहीं पाती है तो आप समझ सकते हैं कि सरकार अपने काम के प्रति कितनी गंभीर है और काम की उसकी प्राथमिकतायें क्या हैं। नरेन्द्र मोदी की सरकार न सिर्फ चुनाव के समय चुनाव लड़ने और जीतने के मोड में रहती है बल्कि यह भी संभव है कि वह सिर्फ चुनाव लड़ने और जीतने वाले काम करती है। यह सब पता करना और बताना अखबारों का काम है पर अखबार सरकार की सेवा ही करते हैं।
थ्री इडियट के बाद चौथे की तलाश कश्मीर में?
द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार जम्मू व कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर के लिए जहां राज्य (स्टेट) लिखना था उसे यूटी यानी यूनियन टेरीरटरी या केंद्र शासित प्रदेश कर दिया गया है। बच्चों के एक किताब में ऐसा करने की कोशिश में अत्यधिक चालाकी या लापरवाही में चौथे इडियट की तलाश चल रही है। असल में, अंग्रेजी में ‘स्टेट’ शब्द का प्रयोग ‘स्थिति’ के लिए भी किया जाता है। ऐसे में अंग्रेजी में जहां स्टेट स्थिति के लिए आया वहां भी यूटी का प्रयोग किया गया है। इससे राज्य में थ्री इडियट फिल्म को याद किया जा रहा है और यूटी के चौथे इडियट की चर्चा है। लगता है, हर काम को आसान समझने वाले लोगों ने इसे कंप्यूटर से बदला है और कंप्यूटर ने हर स्टेट (स्थिति) को यूटी बनाकर चौथे इडियट का महिमामंडन कर दिया। जो लोग नहीं जानते हैं या भूल गये हैं उन्हें बता दूं कि फिल्म में चतुर के भाषण में चमत्कार को बलात्कार से बदल दिया गया था। वब मजाक था, यह सच्चाई है।


