
संजय कुमार सिंह
आज दिल्ली में मतगणना का दिन है। ऐसे दिन खबरें कुछ खास नहीं होती हैं और ना ही सरकारी पार्टी के हेडलाइन मैनेजमेंट का मतलब है। हालांकि, बजट के तुरंत बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने पांच साल बाद रेपो रेट में 0.25% की कटौती की है। इससे ईएमआई घटेगी और आज यह खबर कई अखबारों में लीड है। ऐसे में राहुल गांधी ने कल मुंबई में प्रेस कांफ्रेंस कर चुनावी धांधली से संबंधित आरोप लगाये और मतदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि से संबंधित ठोस शिकायत की। चुनाव आयोग से मांग की कि पार्टी को महाराष्ट्र की मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाये। आप जानते हैं कि कांग्रेस ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए एक ईगल (एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप लीडर्स एंड एक्सपर्ट्स) टीम बनाई है। यह महाराष्ट्र चुनाव के लिए मतदाता सूची में हेर-फेर की शिकायतों पर काम कर रही है।
प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी से कई सवाल पूछे गये। उन्होंने उसका जवाब दिया और अपनी मांग के समर्थन में तर्क दिये। लेकिन सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग के समर्थक (या कांग्रेस विरोधी) सक्रिय हो गये और उनके लिखे से ही लग रहा है कि प्रेस कांफ्रेंस देखे-सुने बिना लिख रहे हैं। आज यह एक बड़ी खबर है लेकिन हमेशा की तरह, अखबारों में वैसे नहीं छपी है जैसे छपनी चाहिये थी। चुनाव आयोग को चुनावी अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण देना चाहिये। (द हिन्दू में सिंगल कॉलम) महाराष्ट्र के मतदाताओं को लेकर राहुल चुनाव आयोग से टक्कर में। (हिन्दुस्तान टाइम्स, चार कॉलम में) फडनविस ने कहा, (दि एशियन एज में अंदर होने की सूचना) दिल्ली के चुनाव में सफाया निश्चित देखकर कांग्रेस कहानी तैयार कर रही है। चुनाव आयोग ने क्या कहा – किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। ना किसी रिपोर्टर ने यह बताया है कि उसने चुनाव आयोग का पक्ष जानने की कोशिश की तो क्या हुआ। 2014 से पहले यह मीडिया का सामान्य व्यवहार होता था।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने जरूर बताया है कि चुनाव आयोग पूरे तथ्यों के साथ जवाब देगा। हालांकि, शीर्षक में ही कहा गया है कि राहुल गांधी ने मतदाताओं की जो संख्या बताई है उसमें उतार-चढ़ाव होता रहा है और इस ओर ‘अंदरूनी लोगों’ ने ध्यान खींचा। तथ्य यह है कि प्रेस कांफ्रेंस में भी इस पर सवाल पूछा गया था0। राहुल गांधी ने इसका जवाब भी दिया। आपको शायद पता न हो कि राहुल गांधी का आरोप है और यह अब तक सार्वजनिक आंकड़ों से साबित है कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव से विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में लाखों में वृद्धि हुई है और यह हिमाचल प्रदेश की आबादी से ज्यादा है तथा महाराष्ट्र की घोषित वयस्क आबादी से ज्यादा मतदाताओं की संख्या है।
इसमें अगर राहुल गांधी ने संख्या कम ज्यादा भी बताई तो वह महत्वपूर्ण नहीं है खास कर इसलिए भी कि उनका आरोप है कि भाजपा की जीत उतने ही वोटों से हुई है जितने नये वोटर बनाये गये हैं। यह आरोप अपने आप में बेहद गंभीर है। सार्वजनिक तथ्यों के आलोक में निराधार तो नहीं ही है, घनघोर घोटाले का संकेत देता है। चुनाव आयोग इसपर क्या जवाब देगा और उसे इतना समय क्यों चाहिये और वह आरोप लगाने का इंतजार क्यों कर रहा था – कुछ खास सवाल हैं जो पूछे जाने चाहिये। इतनी बड़ी संख्या में वृद्धि तो चुनाव आयोग को खुद देखनी चाहिये थी और अगर बड़े मामलों में समय लगता है तो तथ्य है कि चुनाव आयोग छोटे या खास मामलों में भी जवाब नहीं देता रहा है। आइये लगे हाथ मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के बदलते आंकड़े को भी देख लें। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार राहुल गांधी ने 15 जनवरी को यह संख्या एक करोड़ बताई थी, 3 फरवरी को लोकसभा में 70 लाख कहा था और शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में 39 लाख कहा।
ठीक है कि संख्या नहीं बदलनी चाहिये पर मुद्दा यह है कि एक वोट भी बढ़ा तो उसका जवाब होना चाहिये और स्पष्ट किया जाना चाहिये कि किसका बढ़ा और यह लोकसभा चुनाव के समय क्यों नहीं था (तब हटा दिया गया था या अब जबरन जोड़ा गया है क्योंकि शिकायत इसकी भी है)। दूसरे, जब राहुल गांधी ने 15 जनवरी को आरोप लगाया तो चुनाव आयोग ने जवाब क्यों नहीं दिया और अब तक उसका जवाब तैयार क्यों नहीं है। तभी कहा जा सकता था कि यह वृद्धि एक करोड़ नहीं एक हजार है और सामान्य है। जाहिर है, गड़बड़ी चुनाव आयोग की तरफ भी है लेकिन मीडिया वालों (प्रचारकों) का ध्यान उस ओर नहीं है और अब जब सीधा आरोप है कि जितने वोटर बढ़े उतने ही भाजपा के वोट बढ़े हैं तो जवाब क्या आयोगा और कब आयेगा राम जानें। इसमें दिलचस्प यह है कि चुनाव आयोग दोनों समय की मतदाता सूची नहीं दे रहा है और बचाव दूसरे लोग कर रहे हैं। दि एशियन एज में भी यह खबर पहले पन्ने पर है। खबर में बताया गया है कि चुनाव आयोग ने एक्स पर कहा है कि वह राजनीतिक दलों के नजरिये को महत्व देता है। जनवरी के इतने गंभीर आरोप का जवाब नहीं है और महत्व देता है तथा मीडिया में संख्या बढ़ने-घटने पर चिन्ता से आप समझ सकते हैं कि हो क्या रहा है।
आज की कुछ और दिलचस्प व महत्वपूर्ण खबरें जो कम छपी हैं, इस प्रकार हैं
1. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा उसके उम्मीदवारों को खरीदने की कोशिश कर रही है तो उप राज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर दिल्ली की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा के लोग अरविन्द केजरीवाल के घर पहुंच गये।
2. भोपाल में दो धर्मों के लोग अपनी शादी पंजीकृत कराने अदालत पहुंचे तो युवक पर लव जिहाद का आरोप लगाकर अदालत परिसर में ही उसकी पिटाई हुई। बाद में उसे महिला पर धर्म बदलने के लिए दबाव डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पीटने वालों के खिलाफ कार्रवाई की खबर नहीं है। (इंडियन एक्सप्रेस)
3. कुम्भ की भगदड़ में मां नहीं रही…. अब मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए चक्कर लगा रहा हूं – धनंजय कुमार गोंड (24) (इंडियन एक्सप्रेस)
4. अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतने वाले जूनियर एथलीटों को अब नहीं मिलेगा नकद पुरस्कार। डोपिंग और एज फ्रॉड यानी आयु के मामलों में धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए खेल मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। (इंडियन एक्सप्रेस)
5. अमेरिका से हथकड़ी लगाकर भारतीयों को निर्वासित किये जाने और इसकी आलोचना के बचाव की कोशिशों के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने मान लिया है कि भारतीयों को हथकड़ी लगाने से बचा जा सकता था। यह भाजपा सरकार का तरीका है। और दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है के प्रचार के बाद इस तरह की घटना से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पहले इसे एसओपी कहा गया और अब मान लिया गया है कि इससे बचा जा सकता था। यही सरकार का हेडलाइन मैनेजमेंट है कि पहले अपमानित किये जाने की खबर को प्रमुखता नहीं दी गई, फिर विमान की लैंडिंग को कवर करने से रोका गया और अब इस स्वीकारोक्ति को अखबारों ने प्रमुखता नहीं दी है। नवोदय टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर दो कॉलम में है।
यही नहीं, 586 और भारतीय निर्वासित किये जाने वालों की अमेरिकी सूची में हैं यह खबर भी आज सिर्फ हिन्दुस्तान टाइम्स में सेकेंड लीड है। इस खबर के मुकाबले आज नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे की खबर को भी प्रमुखता मिली है और बताया गया है कि शपथ ग्रहण में नहीं बुलाये जाने और 104 भारतीयों को हथकड़ी लगाकर सैनिक विमान से भारत भेज दिये जाने के बाद प्रधानमंत्री अमेरिका जा रहे हैं और दि एशियन एज के शीर्षक के अनुसार ट्रम्प से व्यापार के साथ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उपशीर्षक के अनुसार इनमें निर्वासन शामिल है तथा ऐसी और भी उड़ान आयेंगी। जहां तक सरकार, कानून और व्यवस्था के डर का मामला है आप जानते हैं कि साइबर ठगों के बढ़ते आतंक के बीच सरकार ने आम लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है और ठगों के पकड़े जाने या लूटे गये धन की बरामदगी की कोई खबर नहीं है। वसूली की शिकायतों पर कार्रवाई की सूचना नहीं है और हालत यह है कि कोई फोन पर बम होने की झूठी धमकी देकर लगातार कई दिनों तक परेशान करता रहा और उसे पकड़ने में कई दिन लग गये।
आज फिर खबर है कि सेंट स्टीफंस और एनसीआर के स्कूलों में बम होने की फर्जी खबर दी जा रही है। कहने की जरूरत नहीं है कि इस तरह का काम बहुत मामूली किस्म के अपराधी करते हैं और सरकार उन्हें भी नियंत्रित नहीं कर पा रही है। कल मैंने बताया था कि तमिलनाडु के राज्यपाल से संबंधित मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में थी। आज उसकी खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में है। खबर के अनुसार राज्यपाल ने राज्य सरकार के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि वे नियमानुसार अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे थे। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा है कि विधानसभा ने जिस विधेयक को पुनर्विचार के बाद उनके पास भेजा था उसे वे कैसे राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि यह भी भाजपा की मनमानी का एक मामला है लेकिन खबर यह भी नहीं है। डबल इंजन वाले राजस्थान में मंत्री ने ही अपना फोन टैप किये जाने की शिकायत की है।


