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मीडिया पर पाबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस भेजा

उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में संचार पर पाबंदी सहित कई कठोर प्रतिबंधों को हटाने के लिये दायर याचिका पर बुधवार को केन्द्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किये। साथ ही, उनसे एक हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है। दरअसल, इन प्रतिबंधों से मीडिया का कामकाज प्रभावित हो रहा है। जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने के फैसले के बाद ये प्रतिबंध लगाये गए थे।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन और कांग्र्रेस के कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला की याचिकाओं पर ये नोटिस जारी किये। इन सभी को एक सप्ताह के भीतर नोटिस के जवाब देने हैं। इस मामले में अब एक सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने के फैसले के बाद ये प्रतिबंध लगाये गए थे। भसीन की ओर से अधिवक्ता वृन्दा ग्रोवर ने कहा कि इन प्रतिबंधों की वजह से सूचना के ‘ब्लैक आउट’ को 24 दिन हो गये हैं।’भसीन ने मोबाइल इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं सहित हर तरह की संचार सेवाओं को बहाल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है, ताकि मीडिया के लिये पेशेवर तरीके से काम करने का माहौल बन सके। भसीन ने अपनी याचिका में कहा है कि केन्द्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को कश्मीर तथा जम्मू के कुछ जिलों में पत्रकारों और मीडिया कर्मचारियों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाये। ताकि वे संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए)(जी) और 21 में प्रदत्त् अधिकारों के तहत अपने पेशेवर अधिकारों का इस्तमाल कर सकें और कश्मीर घाटी के निवासियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

पूनावाला के वकील ने इससे पहले कहा था कि वह अनुच्छद 370 पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं लेकिन चाहते हैं कि कर्फ्यू/प्रतिबंध और अन्य कठोर कदम वापस लिये जायें।लोग अपने परिवार के सदस्यों से बात करना चाहते हैं और उनका यह अधिकार है कि वे वहां के हालात में उनके ठीक होने के बारे में जानकारी प्राप्त करें। पूनावाला ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को हिरासत से रिहा करने का निर्देश देने का भी अनुरोध न्यायालय से किया था। इसके अलावा, उन्होंने राज्य की वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिये एक न्यायिक आयोग गठित करने का भी अनुरोध किया था।

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1 Comment

1 Comment

  1. madan kumar tiwary

    August 28, 2019 at 10:25 pm

    नोटिस भेजना और कार्रवाई करना दो अलग चीज है, अभीतक बहुत निराशाजनक रवैया देखने मे आया है CJI का, लगता है कुछ करेंगे लेकिन रिजल्ट जीरो । खैर देखिये क्या करते है ,मुझे आशा नही है

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