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मोदीजी से ईनाम पाकर अलाहाबादिया सबको डुबा गया, सूचना प्रसारण मंत्रालय ने बढ़ाई कंटेंट क्रिएटर्स की टेंशन!

ही हुआ जिसे लेकर पिछले तमाम दिनों/महीनों से सोशल मीडिया यूजर्स आशंकित थे। रणवीर अलाहाबादिया मोदीजी के हाथों सम्मान प्राप्त कर खुद के साथ तमाम लोगों को डुबा ले गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए कड़े नियम लाने की तैयारी शुरू कर दी है। जो जल्द ही लागू हो सकते हैं।

बता दें कि सोशल मीडिया पर तगड़ी फैन फॉलोइंग वाले रणवीर को पीएम मोदी ने National Creators Award 2024 में अवॉर्ड भी दिया था। पूरा मसला क्या है नीचे पढ़ें…


नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अश्लील और भद्दी सामग्री पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक नई आचार संहिता लाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस दिशा में नए दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, जिसमें डिजिटल कंटेंट को लेकर सख्त मानक तय किए जाएंगे।

प्रस्तावित नियमों के तहत, इन्फ्लुएंसर्स को अपनी सामग्री की रेटिंग देने और आवश्यक डिस्क्लेमर जोड़ने जैसे प्रावधानों का पालन करना पड़ सकता है। इस पहल का मकसद इंटरनेट पर अनियंत्रित और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकना है, जो हाल के दिनों में काफी विवादों का कारण बना है।

रणवीर अल्लाहबादिया के विवादित बयान के बाद सख्ती बढ़ी

यह कदम उस समय सामने आया है जब पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया के शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ में दिए गए एक अनुचित बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि “जो गंदगी उनके दिमाग में थी, वह इस कार्यक्रम के जरिए उगली गई है।” हालांकि, अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी, लेकिन इस घटना ने सोशल मीडिया कंटेंट की निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिए संकेत, सोशल मीडिया नियम होंगे सख्त

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि “डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और अनुचित सामग्री पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनों को और कड़ा करने की जरूरत है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक मीडिया में संपादकीय जांच की एक प्रक्रिया होती है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह व्यवस्था न होने के कारण कई बार आपत्तिजनक कंटेंट सामने आ जाता है।

वैष्णव ने संसदीय स्थायी समिति से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने और डिजिटल मीडिया के लिए सख्त नियम बनाने पर आम सहमति बनाने का आग्रह किया।

सोशल मीडिया सेंसरशिप पर बहस, कंटेंट क्रिएटर्स में चिंता

सरकार के इस कदम को लेकर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकारों में चिंता देखी जा रही है। इससे पहले, पिछले साल प्रस्तावित मसौदा कानून में भी डिजिटल प्रसारण सेवाओं को नियंत्रित करने की बात कही गई थी, जिसमें सरकार को बिना पूर्व सूचना किसी भी प्रसारण नेटवर्क की जांच करने और आवश्यक होने पर उपकरण जब्त करने का अधिकार मिल सकता था।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के नियमों से डिजिटल मीडिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है और सेंसरशिप को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, सरकार का मानना है कि यह संतुलन बनाकर बनाया गया कदम होगा, ताकि ऑनलाइन कंटेंट सामाजिक मूल्यों के अनुरूप रहे, लेकिन व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए।

नए नियमों पर आगे क्या?

सूत्रों के अनुसार, सरकार जल्द ही इन दिशा-निर्देशों का प्रारूप सार्वजनिक कर सकती है और इस पर हितधारकों से राय मांगी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से डिजिटल स्पेस में अधिक जवाबदेही आएगी, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कैसे नियमन और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखती है।

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