इंडिया न्यूज़ सर्वेः जनता की उम्मीदों पर बढ़ रही मोदी सरकार

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले सौ दिनों के कामकाज को जनता ने उम्मीदों के मुताबिक करार दिया है. इंडिया न्यूज़-द सनडे गार्जियन-सी वोटर के ताज़ा सर्वे में 54.5 फीसदी लोगों ने सरकार को बेहतर माना है. इनमें से 22.9 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार के सौ दिन के काम को उम्मीद से बेहतर और 31.6 फीसदी लोगों ने उम्मीद के मुताबिक बताया है.

इंडिया न्यूज़-द सनडे गार्जियन-सी वोटर के सर्वे में लोगों से 24 बिंदुओं पर रायशुमारी की गई, जिसमें मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से लेकर विदेश नीति तक के सवाल शामिल थे. सर्वे में शामिल 66.8 फीसदी लोगों ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने पहले बजट भाषण में निवेशकों को सही संदेश दिया. हालांकि महंगाई के मोर्चे पर लोगों ने मोदी सरकार से मायूसी जताई. सर्वे में 70 फीसदी लोगों ने कहा कि मोदी सरकार महंगाई रोक पाने में नाकाम रही है.

मोदी सरकार पर विपक्ष की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं लेकिन सर्वे में 60.9 फीसदी लोगों ने कहा कि विपक्ष के साथ मोदी का बर्ताव अच्छा रहा है. नेता प्रतिपक्ष का पद कांग्रेस को ना देने के सवाल पर जनता की राय बंटी हुई है. सर्वे में शामिल 45.9 फीसदी लोगों ने इसे ठीक माना तो 48.5 फीसदी लोगों का कहना था कि मोदी ने कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष पद ना देकर ठीक नहीं किया.

सर्वे में 66.6 फीसदी लोगों ने कहा कि मोदी ने संसद की साख लौटाई है. 67.2 फीसदी लोगों ने माना कि मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा बहाल की है जबकि 39.1 फीसदी लोगों की राय थी कि मोदी ने अपने मंत्रियों को अप्रासंगिक बना दिया है.

भ्रष्टाचार के सवाल पर 69.2 फीसदी लोगों ने कहा कि मोदी सरकार अपनी पूर्ववर्ती सरकार से कम भ्रष्ट है. सौ दिन में मोदी सरकार किस एजेंडे पर आगे बढ़ी, इस सवाल के जवाब में 48.5 फीसदी लोगों ने कहा कि सौ दिनों में मोदी का विकास का एजेंडा आगे बढ़ा है, जबकि 19.6 फीसदी लोगों ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और 9.6 फीसदी ने हिंदुत्व के एजेंडे को मोदी सरकार की सौ दिन की उपलब्धि करार दिया.

सर्वे में एक महत्वपूर्ण सवाल ये भी था कि क्या मोदी सरकार के 100 दिन के कार्यकाल में धार्मिक तनाव बढ़ा है? सर्वे में शामिल 48.2 फीसदी लोगों ने कहा कि तनाव बढ़ा है जबकि 49 फीसदी लोगों ने इससे इनकार किया. सर्वे में शामिल 34.3 फीसदी लोगों ने कहा कि वो मोदी सरकार में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते जबकि खुद को सुरक्षित मानने वालों की संख्या 58.7 फीसदी रही. (प्रेस रिलीज़)

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