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सियासत

विदेश में मोदी-मोदी करती भीड़ जुटाने के लिए पैसा खर्च होता है! देखें- हिसाब-किताब

डॉ मुकेश कुमार-

दोस्तों….ये आँकड़े देखिए और समझने की कोशिश कीजिए कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा के दौरान जो बंदर पार्टी मोदी-मोदी चिल्लाते हुए दिखती है वह कैसे जुटाई जाती है।

ये सब इवेंट मैनेजमेंट है। मनचाही भीड़ जुटाने के लिए पैसे खर्च किए जाते हैं।

पब्लिक झांसे में आ जाती है और मान बैठती है कि वाह मोदी जी वाह….आप तो विश्वगुरु बन गए।

देखें विदेश मंत्रालय का यह लेटर….


सौमित्र रॉय-

घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने–नरेंद्र मोदी पर यह कहावत बिल्कुल ठीक बैठती है।

जनाब विदेश में लोकतंत्र, गांधी, विकसित भारत, विश्वगुरु, एआई–जैसी तमाम खोखली बातें लिखकर टेलीप्रॉम्पटर पर बकते हैं।

उस भीड़ के सामने, जिसे करोड़ों फूंककर भाड़े पर बुलाया गया है। एक आरटीआई ने यह राज़ भी खोल दिया है।

जिस तरह ब्रिटिश हुकूमत भारत से पैसा लूटकर विदेशों में अपना डंका पीटती थी, उसी तरह अंग्रेजों के भारतीय वंशज करदाताओं के करोड़ों प्रचार में फूंक रहे हैं।

वहीं, 100 करोड़ भारतीय अपनी रोजाने की जरूरत का सामान भी खरीद नहीं पा रहे हैं।

मोदी के विकसित भारत की तो हालत ही न पूछिए। इकॉनमी का हर हिस्सा डूब चुका है।

लेकिन संघी मानसिकता यह है कि हेकड़ी नहीं जाती। देश की 10% यानी 13 करोड़ अवाम बीजेपी की हेकड़ी को बनाए हुए है।

लेकिन, अब यह संख्या भी तेजी से घट रही है। इसीलिए आरएसएस और बीजेपी को वोटर लिस्ट में धांधली कर चुनाव जीतना पड़ रहा है।

मोदी सत्ता ने भारत को 1947 में लाकर खड़ा कर दिया है।

नीचे इन भयावह आंकड़ों को देखें और शोक मनाएं।

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