पत्रकारों को नापने वाले बीएन सिंह का यूं नपना!

पत्रकारों की हाय वैभव कृष्ण के बाद बीएन सिंह भी निपट गए… “वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त की हर शै पे नाज, वक्त से डरता रह ऐ मुलाजिम, न जाने कब बदले वक्त का मिजाज” यह लाइन आज बरबस तब याद आ गयी जब सीएम योगी के नोयडा दौरे के दौरान वहां के डीएम बीएन सिंह का हाईप्रोफाइल विवाद हुआ।

सीएम की फटकार के बाद डीएम ने लंबी छुट्टी मांगी, यही नहीं छुट्टी का पत्र भी वॉयरल कर दिया। फिर क्या, सीएम योगी की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा और न सिर्फ उनको साइड लाइन किया गया, बल्कि पत्र को अनुशासन हीनता मानते हुए जांच भी बैठा दी गई। अभी और बड़ी कार्यवाही की संभावना दिखाई दे रही है।

लेकिन यह पूरा घटनाक्रम अनायास नहीं है। कहीं न कहीं नोयडा के 5 पत्रकारों पर दुर्भावना वश की गई एफआईआर / कार्यवाही का पाप भी है। शायद उन्हीं की आह से पाप का घड़ा भरा और आज फूट गया। ये वही डीएम साहब हैं जो तत्कालीन कप्तान वैभव कृष्ण की संस्तुति पर पांच पत्रकारों पर गैंगेस्टर की फाइल पर अपनी मोहर ठोके थे। आज आ बैल मुझे मार की तर्ज़ पर खुद ठुक गए।

हालांकि वैभव कृष्ण थोड़ा पहले निपट गए। उनका निपटना भी ठीक ऐसे ही था। वहां के पत्रकारों को जेल भेजने में अपनी पूरी साख दाव पर लगा दी थी। गए तो पूरी सरकार की छीछालेदर करा दी। कथित सेक्स चैट का आरोप लगा तो उसके रिएक्शन में 5 अलग अलग जिलों के कप्तान साहबों को भी ले डूबे, सरकार में बड़े लोगो पर पैसे लेकर पोस्टिंग का अपना खत भी वॉयरल करा दिए।

लेकिन कहते है न कि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। पत्रकारों पर तेवर दिखा कर मुकदमा करने वाले कप्तान वैभव कृष्ण आज खुद फाइल लेकर एसआईटी के सामने अपनी सफाई देते फिर रहे हैं।

नोयडा के कप्तान और डीएम की पोस्टिंग काफी रसूख वाली होती है। वहां वही पोस्ट होता है जो सरकार की निगाह में सबसे अच्छा होता है, प्रिय होता है। लेकिन ये इत्तफाक ही है कि यहां के डीएम और कप्तान दोनों ने सरकार की छवि पर बड़ा बट्टा लगा दिया कि सरकार को भी इनकी पोस्टिंग पर पछतावा हो रहा होगा।

अंत में इन दोनों लोगो के बारे में इतना ही काफी होगा कि “बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले”। उन सभी पद के मद में चूर, अहंकारी और भ्रष्ट लोगों से एक अपील है- सुधारिये अपने आप को नहीं तो सरकार को धोखा देकर भले कुछ दिन कुर्सी का मजा काट लें लेकिन प्रकृति काल चक्र से खुद को नहीं बचा पाएंगे।

“पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान, भीलन लूटी गोपिका, वही अर्जुन वही वाण”।

सुधीर सिंह गब्बर

पत्रकार

आज़मगढ़

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