विश्व दीपक-
भारतीय जनता पार्टी के 12वीं पास अध्यक्ष नितिन नबीन न ओबीसी हैं, न दलित, न दक्षिण के, न पश्चिम बंगाल के, न संगठनकर्ता हैं, न आइडियोलॉग हैं फिर क्या खासियत है जिसकी वजह से उन्हें 10 करोड़ की सदस्य संख्या वाली पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया?
असल में नबीन जी उस शतरंज का छोटा प्यादा हैं जो खेला जाने वाला है 2029 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले. अभी गोटियां सेट की जा रही हैं. इस खेल का नाम है मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम? जिस सामंतवादी प्रहसन के जरिये नबीन का राजतिकल हुआ उसे इस खेल का प्राक्थन कह सकते हैं.
इसके एक मुख्य खिलाड़ी होंगे गृहमंत्री अमित शाह. दूसरे खिलाड़ी होंगे यूपी वाले बाबा योगी आदित्यनाथ. कोई डार्क हॉर्स भी हो सकता है लेकिन फिलहाल यही दो खिलाड़ी अहम हैं.
पहले नहीं लगता था लेकिन इधर बीच अमित शाह की बॉडी लैंग्वेज, मीडिया-जनता के साथ उनका संवाद आदि देखकर पता चलता है कि वो अपने आप को मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर पेश कर रहे हैं.
मोदी की विरासत पर मेरा दावा है – ऐसा अमित शाह की भाव भंगिमा से जाहिर होता है. ऐसा स्वाभाविक भी है. वो मोदी के सबसे भरोसेमंद और सबसे पुराने दोस्त, सहकर्मी हैं.
बीजपी-संघ की हिंदुत्व वाली विरासत का असली दावेदार मैं ही हूं – ऐसा योगी आदित्यनाथ मानते हैं. इस मामले में उनको कोई चुनौती भी नहीं दे सकता. इस लिहाज से देखा जाय तो बीजेपी का अगला अंत:संघर्ष मोदी की विरासत बनाम हिंदुत्व की सियासत के बीच होगा.
जनाधार हीन, 12वीं पास एमएलए नितिन नबीन की भूमिका इस संघर्ष में हालांकि बहुत छोटी है, लेकिन मौका पड़ने पर अहम हो जाएगी.
राजनीति में कई बार नगण्य होना अहम हो जाता है. नबीन कुमार जीरो थे, इसी वजह से उन्हें हीरो बना दिया गया. उनके नाम का सहमति पिछले महीने अंडमान में हुई भागवत और शाह की मीटिंग के दौरान बनी.
कोमी कपूर ने लिखा है कि शाह धर्मेन्द्र प्रधान या भूपेन्द्र यादव को चाहते थे. संघ गुजराती लॉबी के बाहर का कोई आदमी चाहता था. अंतत: जनाधार हीन,12वीं पास एमएलए नितिन नबीन का नाम तय हुआ. हालांकि मेरा मानना है कि नबीन गजुराती लॉबी के ही हैं. वो वही करेंगे जो मोदी-शाह कहेंगे.
चूंकि नबीन के नाम पर संघ की भी मुहर लगी है इसलिए मोदी के बाद कौन बनेगा पीएम नामक खेल के दूसरे खिलाड़ी योगी आदित्यनाथ को अब अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी.



