मूढ़ताओं के लिए किसी पत्रकार को गिरफ्तार करने की मांग रखना अभिव्यक्ति के काम में खतरनाक अड़ंगा है : ओम थानवी

Om Thanvi : वैदिक जी का हल्ला जरूरत से ज्यादा हो गया। भला उसमें संसद को सर पर उठाने जैसा क्या था? कांग्रेस की यह मांग हास्यास्पद रही कि वैदिक को गिरफ्तार किया जाय। राहुल गांधी ने कहा है, वैदिक संघ के आदमी हैं। वैदिक जी किसी के नहीं हैं, मौका मिले तो हर कहीं हैं। पत्रकार के नाते सरगना सईद से मिलने में कोई हर्ज नहीं था, यह मैं पहले लिख चुका। हां, लौटकर हाफ़िज़ सईद की छवि गांठना, पाकिस्तान में अपने आप को विदेश नीति का विशेषज्ञ, दूत या पूर्व प्रधानमंत्रियों का सलाहकार आदि जाहिर करना या संघ को प्रमाण-पत्र काटना आपत्तिजनक था। मगर इतना नहीं कि संसद ठप्प हो, हर टीवी चैनल पर लाल पहनावे में वैदिक प्रलाप का आयोजन हो।

बहरहाल, मूढ़ताओं के लिए किसी पत्रकार को गिरफ्तार करने की बात करना या यह मांग रखना कि विदेश में पत्रकारों की गतिविधियों पर दूतावासों की नजर रहनी चाहिए, अभिव्यक्ति के काम में खतरनाक अड़ंगा है। वैदिक अपनी करनी खुद जाएंगे, वे अपने आप को विदूषक का विद्रूप प्रदान कर चुके। कैसी विडंबना है कि मोदी युग की भाजपा को वैदिक जैसे ‘बौद्धिक’ बहुत सुहाते हैं। लेकिन पत्रकारों के स्वच्छंद आवागमन, लेखन आदि को पहरे के घेरे में लाने का विचार अपने आप में अलोकतांत्रिक है। दलीय कीचड़-उछाल में पत्रकारिता के बुनियादी अधिकारों पर चोट नहीं होनी चाहिए।

जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.



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Comments on “मूढ़ताओं के लिए किसी पत्रकार को गिरफ्तार करने की मांग रखना अभिव्यक्ति के काम में खतरनाक अड़ंगा है : ओम थानवी

  • सिकंदर हयात says:

    sikander hayat • 12 hours ago
    अफ़सोस चुनाव हारने पर भी कांग्रेस और राहुल को अक्ल नहीं आई वो वैदिक के मुद्दे पर वैसी ही घटिया बेहूदा राज़नीति कर रहे हे जैसा की भाजपा और सुषमा जी ”एक के बदले दस सर लाओ ” जैसी बेहूदा बाते करके करती हे कॉंग्रेस्स को समझ नहीं आता की घटिया उग्र और युद्धप्रिय लोग तो भाजपा शिव सेना जैसी पार्टियो को ही वोट देंगे कॉंग्रेस्स को तो अच्छी सेकुलर उदार शांतिप्रियता की ही बातो से वोट मिलेंगे कोई कह सकता हे की नहीं जी नुक्सान होगा तो नुकसान तो फिर भी हुआ न कोंग्रेस लगभग ख़त्म हो गयी जो लोग जीते वो अपने से जीते कांग्रेस से नहीं अब इससे ज़्यादा नुक्सान क्या होगा

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