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सियासत

महंगाई के आगे सरकारें बेअसर, नवरात्र के बावजूद प्याज के दाम में बेहिसाब उछाल

अजय कुमार, लखनऊ

मंहगाई के चलते त्योहारों की खुशियों को ग्रहण… भाजपा शासन में मंहगाई की मार से सब परेशान हैं। त्योहारी सीजन में खाने-पीने की चीजों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है।

एक तो कोरोना के चलते बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया है तो दूसरी तरफ बढ़ती मंहगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। मंहगाई से पूरे प्रदेश की जनता त्राहिमाम कर रही है।

प्याज सौ रूपए किलो के करीब (80 रुपए किलो) पहुंच गया है तो घर-घर में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली अरहर की दाल 125 रुपए किलो पहुंच गई है। वैसे कोरोना काल में योगी सरकार ने सख्त आदेश दिया था कि अरहर की दाल 100 रुपए किलों से अधिक नहीं बिकेगी। पर महंगाई पर सरकारी आदेश बेअसर है।

इसी तरह अन्य खाद्य पदार्थो के भाव में भी अनिश्चितता का आलम बना हुआ है। तेल-घी के दाम में भी बढोत्तरी बनी हुई है। मंडी कारोबारियों का कहना है कि करीब तीस फीसदी से अधिक फसल खराब होने की वजह से अरहर दाल फुटकर मंडी में 116 से 118 रुपये किलो तक पहुंच गई है। दूसरी किस्म 110 से 112 रुपये किलो बिक रही है। वहीं आलू-प्याज ने भी रुलाना शुरू कर दिया है।

महाराष्ट्र और नासिक से आने वाली प्याज की आमद में भी कमी होने से नवरात्र में भी प्याज के दाम खरीदारों के आंसू निकाल रहे हैं। फुटकर बाजार में प्याज 80 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। एक हफ्ते पहले 50-55 रुपये प्रति किलो था। कारोबारियों के मुताबिक थोक बाजार में प्याज 70 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। इसका असर फुटकर बाजार में दिखाई दे रहा है। कारोबारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में प्याज के दामों में और वृद्धि होगी।

दो दिन में ही थोक भाव में प्याज के दाम में प्रति क्विंटल 300 रुपये बढ़े हैं। इसका असर फुटकर रेट पर पड़ा है। आवाक काफी कम हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से लगातार रोजाना प्याज के भाव बढ़ रहे रहे है।

थोक व्यापारियों के मुताबिक अभी भाव और ऊपर जाने की आशंका है। खासकर प्याज के दाम अभी थमते नहीं दिख रहे हैं। नवरात्र में तमाम लोग नौ दिन तक उपवास रखते हैं ऐसे में उनके घरों में प्याज का इस्तेमाल बंद हो जाता है। इससे मांग में कमी आती है, लेकिन इस बार नवरात्र शुरू होने के बाद प्याज के दाम में 30 रुपये तक प्रति किलोग्राम का उछाल आ गया है। पिछले साल नवरात्र में प्याज 45 रुपये किलो था।

बात आलू के दामों की कि जाए तो गरीबों की सब्जी कहलाने वाला आलू भी नखरे दिखा रहा है। फुटकर बाजार में नया आलू 60 रुपये प्रतिकिलो और पुराना आलू 45 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। नवरात्र में ही आलू के दाम में 10 रुपए का इजाफा हुआ है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि अभी नया आलू कम है। इस कारण दाम में इजाफा हुआ है। दरअसल नवरात्र में आलू की मांग काफी बढ़ जाती है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट.

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