खबर आ रही है की पी7 चैनल बिक गया है। काफी ज़ोर आजमाईश के बाद आखिरकार केसर सिंह ने चैनल को हरियाणा के कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के हाथों बेच दिया है। हालाँकि अभी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन भड़ास को मिली जानकारी के मुताबिक जब से पी 7 चैनल बंद हुआ उसके बाद से ही ये खबर आ रही थी इसे बेच दिया जायेगा क्योंकि अभी तक ये चैनल पर्ल्स ग्रुप के अधीन था और करीब एक महीना पहले ही आर्थिक संकट के चलते इसे बंद कर दिया गया था।
अब खबर ये आ रही है की आज नॉएडा स्थित पी ७ के दफ्तर पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता अपने काफिले के साथ पौह्चें और चैनल के निदेशक केसर सिंह, शरद दत्त के साथ चैनल के गेट पर नारियल फोड़ कर पूजा की। लेकिन चैनल की डील कितने में हुई है फिलहाल इसका पता नही चल पाया है। वहीँ ये भी ये भी खबर मिली है कि पर्ल्स हरियाणा को विनोद मेहता के हाथों बेच दिया गया है। उधर, चैनल निदेशक केसर सिंह द्वारा किए गए वादे के मुताबिक अभी तक कई चैनलकर्मियों को उनकी नवंबर की सैलरी नहीं मिली है।
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preeti
December 21, 2014 at 6:34 pm
jo log chahte the ki channel ko humne band karva diya ye unke chere prr tamachaa hai…
rajesh purohit
December 22, 2014 at 5:19 am
कम से कम इस्टिंगरो के आठ महीनो की सेलेरी तो दिलवा दो जी !
—
ashu gupta
December 22, 2014 at 4:45 pm
ठीक ही है अगर पी7 न्यूज चैनल बिक गया हो तो!, कम से कम वैसे लोगों को तो रोजगार मिलेगा जो, पिछले कुछ महीनों से नौकरी की तलाश में दर-बदर भटकने पर मजबूर थे, लेकिन, सवाल ये है कि, पी7 के उन कर्मचारियों का क्या जिन्हें, कुछ लोगों ने अपने निजी फायदे के लिए बंद करा दिया, इस कलंक को अपने माथे पर कौन लेगा, जिनकी वजह से सैंकड़ों परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आन खड़ा हुआ, जिन लोगों को पहले से ये मालूम था कि, पी7 प्रबंधन उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने वाला है, उन्हीं लोगों ने सैलरी संकट को मुद्दा बनाकर तय कर लिया कि, अगर हम नहीं नौकरी करेंगे तो किसी को भी नौकरी करने का हक नहीं, वो स्वयंभू नेता बन गए, खुद को कर्मचारियों का खुदा घोषित कर लिया और आज सभी को सड़क पर ला खड़ा किया, ये सही है कि, सैलरी की मांग करना कोई जुर्म नहीं, लेकिन, उसकी आड़ में चैनल के भीतर गुंडागर्दी करना ये कैसी पत्रकारिता है,
( सूचना के आधार पर अपनी भड़ास निकाल रहा हूं, हो सकता है कि, चंद बाते निराधार हो, लेकिन, निन्यानवे फीसदी सही है)
पी7 के कर्मचारियों का दो महीने की सैलरी बकाया थी, बावजूद इसके पैसे दिए जा रहे थे, और तो और चैनल के चंद चु… अपनी तनख्वाह ले भी रहे थे, और बाकियों की आंख में धूल झोंकते रहे,
लब्बोलुवाब ये है कि, देश के सभी संपादक और टीवी न्यूज चैनल के कर्ताधर्ता और मालिक अब ये तय करें कि, क्या आप ऐसे लोगों का साथ देना पसंद करेंगे, जिनकी वजह से कई लोग अपना घर-बार छोड़ने को विवश हो गए, कितनों के अरमान पर पानी फिर गया, वैसे बच्चे जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, उनके सपने उड़ान भरने से पहले ही धराशाई हो गए, फैसला आप खुद कीजिए, और पी7 न्यूज चैनल में काम करने वाले उन चंद कामचोरों से तमाम बेरोजगार परिवारों की तरफ से सवाल पूछिए, आखिर उन्हें क्या मिला, ये वैसे लोग हैं जो फिर किसी चैनल या अखबार या फिर मैगजीन में अपने लोगों पर फरेब का फंदा कसेंगे और वहां भी ऐसा ही करेंगे, क्योंकि, इनका इतिहास गवाह है, जहां भी गए, या तो संस्थान को डूबो दिया, लोगों को बेरोजगार करा दिया या फिर, नेतागिरी शुरू कर दी, धन्य हो पत्रकारिता के इन पाखंडियों की, जय -जयकार हो हर्षवर्धन त्रिपाठी, अश्विनी त्रिपाठी, मनीष ठाकुर, चंदन कुमार, प्रदीप त्रिपाठी, अगस्तय अरुणाचल, संदीप शर्मा, ये वो नाम हैं जो सामने थे जिन्होंने चैनल बंद कराने में अहम भूमिका निभाई, चैनल के कर्मचारी बताते हैं कि, कई और लोग भी थे जिन्होंने पर्दे के पीछे से चिंगारी को हवा देते रहे, एक बार फिर से देश के सभी संपादकों टीवी चैनल के कर्ताधर्ता और माननीय वरिष्ठ पत्रकारों से पी7 न्यूज चैनल के उन कर्मचारियों की तरफ से अपील है कि, इन्हें पहचानें और दोबारा किसी भी पत्रकार की जिंदगी तबाह करने का मौका न दें
ranjan saini
December 22, 2014 at 4:56 pm
sir ji ek khaber to ye bhi hai ki jihone p7 band kara diya wo log ab new menegment ke talwe chatne ke liye zor laga rahe hai, itne besharam hain wo log ki p7 me job karne keliyee, naye naye plan kar rahe hai, jin logon ka naam aapne likha hai unhe to doob marna cahiyee, ager nahi to, jobless logon ke family ke badduayen unhe zarur lagegi, unhe kide padenge
sach
December 22, 2014 at 5:57 pm
Apki baat se hum bhu ittafaak rakhte hai in logo ne kitno ko jobless kar diya saath hi saath channel ke logo ko bhi badnaam kae diya..kahi naukari nahi hai iss waqt media mein…diwali ke baad inn logo ko management nikalne wali thi aur iss baat ki bhanak inhe lag gayi thi…toh inhone.socha ki isse pehle ki channel humein nikale hum channel ko hi tale Lagva de…ye log aaj bhi p7 ke bahar chakkar lagate hai…waha ki har khabar rakhte hai…yahan tak ki ab aidi Choti ka zor laga rahe.hai p7 mein doobara naukari pane ke liye…ye woh besharam log hai jinka koi din imaan nahi hai…inko sabki haaye lagegi