पैसे लेकर पुरस्कार दे रहा पत्रिका!

‘गर्व’ के बहाने करा रहा छीछीलेदर : राजस्थान पत्रिका समूह द्वारा इन दिनों पूरे छत्तीसगढ में हर ब्लॉक में ‘गर्व’ नामक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। बड़े-बड़े दावे करने वाला समूह नीचपन पर उतर आया है। इस आयोजन में व्यवस्था इतनी घटिया होती है कि पूछिए मत। किसी गरीब के घर का छोटा कार्यक्रम भी इससे अच्छा होता है। अपने रसूख के बल पर सांसदों और विधायकों को बुला लिया जाता है जो ऊपरी तौर पर आयोजन की सराहना तो कर देते हैं लेकिन असलियत से वो भी बखूबी वाकिफ होते हैं. बेशर्मी की हद तो तब हो जाती है जब इस तरह के निहायत ही घटिया समारोह को पत्रिका फुल पेज कवरेज भी देता है.

हाल ही में ऐसे ही एक समारोह में सांसद को पानी तक नसीब नहीं हुआ. छोटे से हॉल में बेहद घटिया व्यवस्था के बीच इस तरह के आयोजन निपटाये जा रहे हैं. ऐसे तक़रीबन दर्जन भर आयोजन पत्रिका द्वारा छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिलों मे किये जा चुके हैं. ये सब जिले मुख्यालय के बजाय ब्लॉक में किये जा रहे हैं. यहाँ सभी दागी एजेंट और ठेकेदारनुमा नेता मौजूद होते हैं. पत्रिका प्रबंधन ऐसे हर आयोजन के लिए कम से कम से दो लाख की कमाई करने का टारगेट रखता है. मार्केटिंग वाले ग्राम पंचायमों में घूमकर-घूमकर पैसे मांगते हैं. जिसने पैसे दिए, उसे पुरस्कार दे दिया जाता है। हालांकि कुछ सच में काबिल लागों को भी पुरस्कार दिया गया है ताकि एकदम से बदनामी भी ना होने पाए। पत्रिका समूह में सबसे ज्यादा चोचलेबाजी है। पत्रकारों को लेबर से भी निम्न स्तर का समझा जा रहा है। सुबह से लेकर रात तक काम लिया जाता है। सैलरी के नाम पर दिया जाता है तंबुरा। स्थिति बड़ी विस्फोटक है। कई पत्रकार आंदोलन का मन बना रहे हैं। बायोमेट्रिक मशीन लगाकर नकेल कसने का भी प्रयास है।

-एक पत्रिकाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.



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