इस पाकिस्तानी महिला रिपोर्टर की भावुकता को सलाम करेंगे या इस पर सवाल करेंगे, देखें वीडियो

एक वीडियो आजकल काफी चर्चा में है. इसमें लाइव रिपोर्टिंग करती हुई एक महिला पत्रकार इस कदर भावुक हो जाती है कि वह रेप के आरोपी एक व्यक्ति को लगातार दम भर भला बुरा उल्टा सीधा कहती रहती है. साथ ही वह पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार अपील करती रहती है. ढेर सारे लोग इस रिपोर्टिंग को बेहद पसंद कर रहे हैं और इसे सच्ची पत्रकारिता बता रहे हैं. वहीं कुछ लोग ऐसी पत्रकारिता पर सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं कि पत्रकार का काम रिपोर्ट करना होता है, सब कुछ बताना होता है, खुद जज-अदालत बनकर फैसला सुनाना नहीं होता है.

इस वीडियो में महिला पत्रकार जिस तरीके से आरोपी को बिना जांच के ही दोषी मान लेती है और उसे दंड सुनाने लगती है, वह गलत परंपरा है. इसी का विस्तार तालिबानीकरण की तरफ जाता है. हर संस्था, स्तंभ की अपनी एक भूमिका होती है. अगर मीडिया बाकी सारे संस्थाओं का काम भी अपने हाथ में ले ले तो इससे अराजकता फैल जाएगी. बहुत सारे मामलों में प्रथम दृष्टया जो कुछ सच लगता है, वह गहरे जांच के बाद झूठ पाया जाता है. तो, कोरी भावुकता में अगर फैसले होने लगे तो बहुत से निर्दोष लोग दंडित कर दिए जाएं. फिलहाल आप खुद ये वीडियो देखें और तय करें कि इस पाकिस्तानी महिला पत्रकार की भावुकता सही है या सवाल करने लायक है… लिंक ये है, क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=HoQWQQqufOs



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Comments on “इस पाकिस्तानी महिला रिपोर्टर की भावुकता को सलाम करेंगे या इस पर सवाल करेंगे, देखें वीडियो

  • परेशान कर दिया इस नए न्यूज एडीटर ने
    जबलपुर पत्रिका में इन दिनों नए न्यूज एडीटर आए हैं शैलेष दीक्षित। कल वो मीटिंग में बोल रहे थे रिपोटरों की बजह से बीस हजार कॉपी कम हो गई। ये सुनकर सब हक्के बक्के रह गए। अरे भई हमने कहां पेज लेट करा दिया काम डेस्क नहीं कर पा रही है इल्जाम रिपोटर पर लगा रहे हो। वैसे शैलेष भाई वहीं हैं जो ग्वालियर में सिद्धार्थ भट्ट से हारकर तबादला मांगकर जबलपुर में सेट हुए हैं। वैसे भी स्टेट हेड अरुण चौहान को संपादक आलोक मिश्रा के पर कतरने हैं। कहा जा रहा है कि आलोक मिश्रा की जासूसी करने के लिए शैलेष को भेजा गया है, इससे पहले आशुतोष पाठक थे, जो सारी सूचनाएं भिजवाते थे। रिपोटर से बेतूकी डिमांड करते हैं। किसी खबर को लेकर लंबी चौडी प्लानिंग करते हैं , लेकिन कुछ करवा नहीं पाते। अलबत्ता जो रिपोटर करता है वो भी नहीं करने देते नतीजा खबर में पिट जाते हैं। संपादक कुछ कर नहीं पाता क्योंकि अगले पर पापाजी का हाथ जो ठहरा। हां शैलेष भाई ग्वािलयर की कहानियां जरूर सुनाते हैं मैंने वहां जाकर आठ लोगों की नौकरी खाई माहौल सुधारा। कोई काम नहीं करता था मैंने ठीक किया। जबलपुर में हालत ये कि हम रिपोटर उतना काम भी नहीं कर पाते जितना पहले करते थे, क्येांकि वो जो करने को बोलते हैं वो होता नहीं जो हम करते हैं वो मान्य होता नहीं।

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  • सिकंदर हयात says:

    ये बात हम मुसलमानो को समझने की बहुत सख्त जरुरत हे की इस दुनिया में अनगिनत बाते इंसानी अच्छी बुरी फ़ितरतो से जुडी होती हे जो यूनिक होती हे और दुनिया के हर कोने के मानव से जुडी होती हे इनका आस्था अनास्था से भी कोई लिंक नहीं होता हे लेकिन हमारे यहाँ कुछ लोगो को बीमारी होती हे की हर हर हर बात पर मज़हब मज़हब मज़हब को जरूर बीच में ले आते हे जो की बहुत ही गलत हे यहाँ भी महिला रिपोटर बार बार बेमतलब मज़हब मज़हब—————- की बात भी कर रही हे जो की बहुत ही मूर्खता हे हम इससे बाज़ आना चाहिए ( सेम यही केस दिल्ली में एक बूढ़े पुजारी ने किया हे ) हालांकि पाकिस्तान में इसके लिए जिम्मेदार बहुत से कैपिटलिस्ट मुल्ला हे जो आलीशान बंगलो गाड़ियों में रहते हे और चौबीसो घंटे टी वी पर आते हे और दुनिया की हर बात को इस्लाम से जोड़ते रहते हे

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