सुधीर कुमार सिंह-
15 अप्रैल की रात को तीन अपराधियों ने पुलिस सुरक्षा को बेधते हुए अतीक और अशरफ की हत्या कर दी । चारों तरफ ‘ हाय पुलिस हाय पुलिस ‘ गूंज रही है ।लेकिन क्यों ?आखिर पुलिस का भी क्या दोष है ? अरे,जिनके खिलाफ पुलिस आरोप पत्र समर्पित करती है , राजनैतिक पार्टियां टिकट देकर और जनता वोट देकर उन्हें माननीय विधायक या सांसद बना देती है ।
जनतंत्र में जनता को भगवान् माना जाता है। स्वाभाविक है कि पुलिस भी उन्हें ही आदर्श मानकर उनका अनुकरण करेगी। फिर गिला किस बात की? कमजोर और कर्त्तव्यहीन पुलिस नहीं, वह जनता है जो गुंडों , लफंगों , अपराधियों को वोट देकर राजमुकूट पहना देती है ।
अरे, पुलिस तो लड़ती ही है अपराधियों के खिलाफ ,पर उसकी हिम्मत पस्त हो जाती है यह देखकर कि वर्दी की गंध से जिन अपराधियों की टट्टी हो जाती थी , वे ही सांसद या विधायक बनकर उनके के माथे पर टट्टी करने लगते हैं । क्या करेगी पुलिस ?
जनतंत्र में जनता को भगवान् माना जाता है। स्वाभाविक है कि पुलिस भी उन्हें ही आदर्श मानकर उनका अनुकरण करेगी और जनता के आदर्श हैं गुंडे , लफंगे , अपराधी । तभी तो इन शैतानों को बारंबार वोट देकर राजमुकूट पहना देती है जानता ।
अतीक, मुख्तार और शहाबुद्दीन आदि जैसे दुर्दांत अपराधी जनतंत्र के मंदिर को गंदा करने जनता की बदौलत ही तो पहुंचते रहे हैं ।कुछ लोग कहेंगे कि आपने सिर्फ इन मुस्लिम अपराधियों के नाम क्यों लिए ? तो क्या मैं पूरी लिस्ट तैयार कर दूं ।अतीक और मुख्तार ही वर्त्तमान में चर्चा में हैं ।
अब बिहार को ही लीजिए ।लालू जी का अपराध सिद्ध हो चुका है यानी वे अपराधी हैं । उन्होंने भूमिहारों , यादवों और अन्य जातियों से अपराधियों की फौज इकट्ठी कर ली है ।लेकिन जनता उन्हें आज भी मसीहा मान रही है वे आज भी राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ।बताइए दोषी कौन है -पुलिस या जनता ?
अब माननीय नीतीश जी को क्या कहें ?क्या राजद से जुड़ने के बाद उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति ढकोसला नहीं लगती है ?
हम सभी दोषी हैं । पूरा काफिला ही दोषी है … जय श्रीकृष्ण
लेखक रिटायर आईपीएस अधिकारी हैं।


