प्रभात खबर के कर्मचारियों की सैलरी 15 से 20% कट कर आई

लगता है कोरोना से सबसे अधिक नुकसान केवल इन अखबार वालों को हुआ है. सालों भर करोड़ों की कमाई करनेवाले मीडिया घराने कॉस्ट कटिंग में लगे हुए हैं. इन अखबारों को बुलंदियों तक पहुंचनेवाले कर्मचारियों की तनख्वाह पर भी प्रबंधन की निगाह है. केवल गुजारा करने के लिए दिये जानेवाले तनख्वाह में भी प्रबंधन अच्छी खासी कटौती कर रहा है.

खुद को झारखंड का नंबर वन अखबार बतानेवाला प्रभात खबर ने कर्मचारियों की मई माह की सैलरी में 10 से 20 फीसदी तक की कटौती कर दी है. चाहे कर्मचारी को हजार रुपए महीने से लेकर बीस हजार रुपये महीने ही क्यों न मिलते हों.

प्रभात खबर ऐसा संस्थान है जहां पहले से ही कर्मचारियों को दूसरे अखबार घरानों की तुलना में काफी कम सैलरी मिलता है. ऐसे में कर्मचारियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति आ जायेगी.

सालों से प्रभात खबर में लाखों की तनख्वाह लेने वाले चंद लोग भी प्रबंधन को यही सिखा पढ़ा रहे हैं कि कोरोना संकट से बचने के लिए यही तरीका है कि कर्मचारियों की तनख्वाह काट ली जाये. ये लाखों उठानेवालों की संस्थान में दो से तीन साल की नौकरी बची है, जिसके बाद उन्हें सेवानिवृत्त होना है.

ऐसे में प्रबंधन को कॉस्ट कटिंग के तहत इन लाखों उठानेवालों का हिसाब किताब कर देना चाहिए, लेकिन प्रबंधन 20-30 हजार रुपये पानेवालों पर ही निगाह गड़ाये हुए है. सबकी सेलरी पंद्रह से बीस परसेंट कट कर आई है.

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