सिद्धार्थ-
रेलवे का नया टिकट आरक्षण नियम करप्शन से भरा हुआ है। मौजूदा नया नियम में रेलवे काउंटर से बना हुआ वेटिंग टिकट चाहे थर्ड एसी हो चाहे स्लीपर, टीसी कोच में सफर नहीं करने देते हैं। यात्रियों से ऐसे बर्ताव करने लगे हैं जैसे फ्री में यात्रा कर रहे हों।
मैं एक पत्रकार होते हुए इसका भुगतभोगी हूं। मेरा नाम सिद्धार्थ है। मैं दैनिक जागरण में पत्रकार हूं। मेरा एम्स में इलाज चल रहा है। बीमार हालत में मैंने मुंबई में अंधेरी आरक्षण केंद्र से ट्रेन संख्या 12471 स्वराज एक्सप्रेस जिसका PNR नंबर 8325183043 है। मैंने चार सीटों के लिए बांद्रा ट. से नई दिल्ली के लिए दिनांक 04-11-2024 के लिए मजबूरी में वेटिंग में बुक कराया।
इस उम्मीद में कि शायद कंफर्म हो जाए। लेकिन नये नियम से मुझे एसी कोच में टीसी ने सफर करने से इनकार कर दिया। लेकिन कोच संख्या M1 के अटेंडेंट ने हमसे बीमारी के हाल में 2000 रुपये अलग से लेकर अपना अटेंडेंट वाला सीट शेयर किया। जिसमें उसने हम चार लोगों के अलावा दो अन्य लोगों को भी पैसे लेकर सीट शेयर किया। पता चला कि त्योहारी सीजन में वेटिंग यात्रियों से नये नियम की आड़ में पैसे लेकर अटेंडेंट और पैंट्री स्टाफ अपना सीट शेयर कर रहे हैं।
रेलवे का काउंटर वाला वेटिंग टिकट होने के बाद भी उस श्रेणी में यात्रा ना करने देने वाला नियम बहुत ही घटिया है। इस नियम में रेलवे यात्रियों से पूरा पैसा ले लेता है और उस श्रेणी में सफर भी नहीं करने देता है। या तो ऐसा हो कि वेटिंग टिकट देना ही बंद कर दे या अगर उस श्रेणी में सफर नहीं करने देता है तो उस श्रेणी का पैसा वापस करे।

हिमांशु झा-
रेलवे में आखिर क्या चल रहा है? 30 अक्टूबर को टिकट RAC 31 था। कल RAC 12 पर अटका था। जब आज चार्ट तैयार हुआ तो वेटिंग 18 हो गया। यह कैसा रिजर्वेशन सिस्टम है? छठ के मौके पर अगर एक बिहारी घर नहीं आ पाए तो क्या हाल होगा, वह आप समझेंगे रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw जी?





