वरिष्ठ पत्रकार प्रसून शुक्ला ने राजधानी कालेज के करोड़ों के घपले को किया उजागर

खफा कर्ताधर्ताओं ने व्हिसल ब्लोअर बने पत्रकार को ही चुप कराने के लिए भेज दिया लीगल नोटिस…. राजधानी कॉलेज में वित्तीय अनुशासनहीनता और दिल्ली विश्वविद्यालय के निर्देशों की अनदेखी का मामला तूल पकड़ने लगा है. दिल्ली स्थित राजधानी कॉलेज में गवर्निंग बॉडी मेंबर के रूप में तैनात वरिष्ठ पत्रकार प्रसून शुक्ला ने यहां फैले भ्रष्टाचार के साम्राज्य के बारे में लिखित रूप में सवाल उठाया तो उन्हें डराने के लिए लीगल नोटिस भेज दिया गया है.

बताया जाता है कि गवर्निंग बॉडी चेयरमैन और आम आदमी पार्टी टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ चुके हरजीत सिंह ने ये लीगल नोटिस भिजवाया है. वैसे, करप्शन का ये प्रकरण धीरे-धीरे कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है. पूरे प्रकरण पर दिल्ली विश्नविद्यालय प्रशासन की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है. आखिर करप्शन से जुड़े वो कौन सवाल हैं जिसके चलते कर्ताधर्ता बौखलाए हुए हैं. इसके लिए वरिष्ठ पत्रकार और गवर्निंग बॉडी मेंबर प्रसून शुक्ला द्वारा जीबी चेयरमैन के जरिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजे गए लिखित मेल में पूछे गए कुछ सवालों का अवलोकन करना होगा जो यूं हैं…

  • कॉलेज में सोलर पैनल लगाने के मामले में मेल के जरिए प्रसून शुक्ला ने जीबी चेयरमैन से पूछा-

“I had come to know from facebook that you hold lot of building committee meetings. Being member GB, I want to know the different proposal passed in the meetings and also I have many suggestions to give which can be considered in the meeting. Recently, it has come to my notice that the building committee has passed the proposal of installing Solar Penal in the college amounting approx. Rs. Sixty Lac. As you know the central govt. has authorized many companies to make such installation along with providing all infrastructure including maintenance of solar penal free of cost on lease sharing basis. So why there is a need for spending such huge amount? when it can be done free of cost. I want to know have you explored such option? Rather than relying on most sought after OPEX model , you opted CAPEX model.”

यानि जब सरकार फ्री में सोलर पैनल लगवाती है तो आप 60 लाख रुपये का टेंडर क्यों दे रहे हैं. इसकी मेल की कॉपी दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को भी 18 दिसंबर 2018 को भेजा गया था. माना जा रहा है कि इसी मसले से नाराज जीबी चेयरमैन ने नोटिस भेजा है. हालांकि भेजे गये नोटिस में हरजीत सिंह इस मामले का हवाला नहीं दिया है.

  • अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों से ही राजधानी कॉलेज गवर्निंग बॉडी मेंबर प्रसून शुक्ला ने जीबी चेयरमैन को लिखे कई ईमेल के जरिए कॉलेज में वित्तीय मामलों में हरफेर संबंधी मामलों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से फैक्ट फाइंडिग कमेटी बनाने की मांग करते आ रहे हैं. गवर्निंग बॉडी की मीटिंग के दौरान भी इस मुद्दे पर लिखित में, साथ ही साथ ईमेल के जरिए आपत्ति दर्ज कराई गई है. जो दिल्ली विश्वविद्यालय के संज्ञान में है.
  • प्रसून शुक्ला ने 2018 में शुरू हुए अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों से कॉलेज में स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की मांग करते रहे हैं. उनका आरोप है कि कई बार के पत्राचार के बावजूद स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति की प्रक्रिया में विलंब किया जा रहा है. राजधानी कॉलेज के अस्थायी प्रिंसिपल नियुक्त किये गये हैं उनकी नियुक्ति और अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल पहले से उठाये जा रहे हैं. जिसकी दोबारा जांच की मांग प्रसून शुक्ला भी कर रहे हैं.
  • तमाम विवाद के मद्देनजर प्रसून शुक्ला लगातार गवर्निंग बॉडी मीटिंग बुलाने की मांग करते रहे हैं. उनका आरोप है कि गवर्निंग बॉडी मीटिंग जानबूझ कर नहीं बुलाई जा रही है. जो एक गवर्निंग बॉडी मीटिंग बुलाई गई थी, उसमें तमाम बिंदुओं पर गवर्निंग बॉडी मेंबर की असहमति को मिनट्स आफ मीटिंग में शामिल नहीं किया गया. जबकि इस असहमति को लिखित तौर पर और ईमेल करके भी असहमतियों को शामिल करने के लिए कहा गया. लेकिन इसकी अनदेखी हुई.

इस मामले पर जब प्रसून शुक्ला से मिले लीगल नोटिस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में गवर्निंग बॉडी में चर्चा होनी चाहिए थी लेकिन जीबी चेयरमैन मीटिंग बुलाने की जगह लीगल नोटिस भेज कर अपनी सफाई दे रहे हैं. वे चाहते तो इसे मेल या गवर्निंग बॉडी की मीटिंग के जरिए भी बता सकते थे. प्रसून ने कहा कि अगर हरजीत सिंह इस मामले की जांच अदालत के जरिए कराना चाहते हैं तो इस बात का स्वागत करते हैं और अब मुलाकात कोर्ट में ही होगी.

ये है लीगल नोटिस का वो अंश जिसमें आरोपों के बारे में सफाई दी गई है…


अगला पार्ट शीघ्र पढ़ें- ”राजधानी कालेज में कौन कौन है भ्रष्टाचार का खिलाड़ी और कैसे कैसे होते हैं बड़े-बड़े खेल!”

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