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रेरा का एतिहासिक आदेश, ठग बिल्डर टी एंड टी इंफ्राज़ोन को 45 दिन में देना होगा फ्लैटों पर कब्जा!

कन्हैया शुक्ला-

12 सितंबर को एक बड़ा फैसला आया. इस फैसले से टी एंड टी इंफ्राज़ोन सहित दिल्ली एनसीआर के ढेर सारे चोर बिल्डरों को झटका लगा है. ये बिल्डर समझते थे कि वे रेरा को सेट कर लेंगे. इस आदेश के बाद दिल्ली एनसीआर के सभी फ्लैट आवंटी और खरीदारों में खुशी का माहौल है. इसके साथ ही यूपी रेरा के प्रति एक विश्वास भी कायम हुआ है.

गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार में टी एंड टी कंपनी के प्रोजेक्ट टी होम्स में न्यूज पेपर्स ऐसोसिएशन आफ इंडिया के वरिष्ठ पदाधिकारी और सांसद मेनका गांधी के प्रतिनिधि गौरव और सौरव गुप्ता ने 2019 में फ्लैट बुक किया था जिसकी पूरी कीमत अदा कर दी गई. लेकिन जब बिल्डर की तरफ से उन्हें फ्लैट का कब्जा ऑफर किया गया तो वहां रहने लायक कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं थी. साथ ही निर्माण कार्य चल रहा था. पूरी सोसायटी में खुले नंगे तार, जल भराव और मलवा पड़ा था.

बिल्डर द्वारा उनसे हर फ्लैट की एवज में साढ़े साथ लाख रुपए की अतिरिक्त मांग भी की गई. इसके खिलाफ उन्होंने बीते वर्ष सितंबर 2022 में यूपी रेरा में वाद दाखिल कर दिया. मामले में असली मोड़ यहीं से आया जब रेरा में वाद दाखिल करने के बाद टी एंड टी कंपनी के निदेशक अंकुश त्यागी ने उनके फ्लैट का आवंटन ही रद्द कर दिया और फ्लैट को किसी अन्य तीसरे को बेचने की कोशिश करने लगा.

इसके तुरंत बाद उनके द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा गया. इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद मेनका गांधी ने भी उत्तर प्रदेश शासन में बात की जिस पर हरकत में आई गाजियाबाद पुलिस ने एंटी फ्रॉड सेल और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में इस मामले की गहनता से जांच की और बिल्डर कंपनी को दोषी पाते हुए प्रथम दृष्टया टी एंड टी कंपनी के प्रबंधन तंत्र और निदेशक अंकुश त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर दी. इसके बाद गाजियाबाद के विजय नगर थाने में संगीन धाराओं के तहत एक के बाद एक दो मुकदमे दर्ज कर लिए गए.

मुकदमा दर्ज होने के बाद बिल्डर अंकुश त्यागी और विजय नगर थाना पुलिस ने आपस में साठगांठ कर मुकदमों को दीवानी प्रवृति का बताते हुए अंतिम रिपोर्ट लगवा दी थी लेकिन जैसे ही यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. पुलिस आयुक्त ने खुद संज्ञान लेते हुए मामले में तत्कालीन एसीपी को कड़ी फटकार लगाई. इसके बाद कोर्ट ने भी अंतिम रिपोर्ट को गलत बताते हुए मामले में पुनः विवेचना के आदेश जारी कर दिए. पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले में विजय नगर थाना पुलिस पर जांच बिठा दी गई. इसमें दोषी पाते हुए विजयनगर थाने के पूर्व दो जांच अधिकारियों सुरेंद्र यादव व एक अन्य जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए और मामले की विवेचना भी विजय नगर थाने से कोतवाली गाजियाबाद में स्थानांतरित कर दी गई.

अब इस हाई प्रोफाइल मामले में नया मोड़ आया है जब यूपी रेरा ने बिल्डर अंकुश त्यागी और उसकी कंपनी को दोषी पाते हुए पुनः आवंटन जारी कर 45 दिन के अंदर फ्लैट को पूरा कर कब्जा दिए जाने के लिए आदेश जारी कर दिया है.

13 पन्नों के विस्तृत आदेश में यूपी रेरा ने सभी बिंदुओं पर टी एंड टी कंपनी को दोषी पाते हुए 2022 में जारी कब्जा ऑफर को ही अवैध माना है. आदेश में साफ लिखा गया है कि आवेदक द्वारा दिखाई गई सोसायटी की फोटो और वीडियो से साफ दिखता है कि उस समय पूरी सोसायटी निर्माणाधीन थी जिसके चलते बिल्डर को ओसी तक नहीं मिली थी. बावजूद इसके कब्जा लेने का पत्र जारी कर दिया गया और जब आवंटी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और वाद दाखिल किया तो बिल्डर द्वारा फ्लैट आवंटन रद्द करने का पत्र जारी कर दिया गया जो टीएंडटी कंपनी की बदनीयती को दर्शाता है क्योंकि फ्लैट की संपूर्ण धनराशि बिल्डर कंपनी पहले ही ले चुकी थी. आदेश में लिखा गया है कि बिल्डर वैधानिक पुनःनिरीक्षित कब्जा पत्र जारी करे. 45 दिन में फ्लैट का कब्जा दे और जो रकम ब्याज के तौर पर मांगी गई थी वह भी लेने का कोई आधार नहीं है जिसे निरस्त करते हुए फ्लैटों का कब्जा दिए जाने का आदेश जारी कर दिया गया.

प्रोजेक्ट में बिना ओसी प्राप्त जारी किए गए फ्लैट कब्जा ऑफर

रेरा ने माना की प्रोजेक्ट टी होम्स तय समय सीमा पर प्रोजेक्ट का कार्य पूरा नहीं किया गया इसलिए बिल्डर कंपनी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की कुल जमा धनराशि पर 1.4.22 से ओसी/सीसी प्राप्ति की तारीख तक का बैंक ब्याज के साथ अतिरिक्त 1 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज अदा करेगा. यूपी रेरा का यह फैसला बहुत सख्त अंदाज में जारी किया गया है जो अब दिल्ली एनसीआर के खरीदारों को उनकी संपत्ति पर सुरक्षा और संरक्षण देगा.

टी एंड टी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

गौरतलब है कि इस फैसले के आने के बाद बिल्डर अंकुश त्यागी और उसकी कंपनी टी एंड टी की मुश्किल अब और भी ज्यादा बढ़ गई है. बताते चलें कि बिल्डर अंकुश त्यागी और उसकी कंपनी पर पहले ही गंभीर अपराधों के दो मुकदमे दर्ज हैं जिन पर अभी जांच प्रचलित है और अंकुश त्यागी अग्रिम जमानत पर है. उसके विदेश जाने पर रोक है. वहीं अब रेरा के आदेश के बाद पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों की जांच को भी बल मिलेगा. इन मुकदमों में बिल्डर अंकुश त्यागी पर पहले ही बिना अनुमति विदेश जाने पर रोक लगी हुई है जिसके लिए उसने हाल ही के दिनों में गाजियाबाद जिला अदालत से विदेश जाने की अनुमति की गुहार लगाई थी जिस पर अदालत से उसे अभी तक विदेश जाने की अनुमति नहीं मिल सकी है. यानी साफ हो जाता है कि कल तक कानून को ठेंगा दिखाने वाला ठग बिल्डर अब पूरी तरह कानून के शिकंजे में फस गया है.

रेरा के आदेश से रियल स्टेट के किन आवंटियों को कैसे मिलेगा लाभ

दिल्ली हाई कोर्ट की जानी मानी वकील निहारिका कश्यप के अनुसार यह एक बहुत ही ऐतिहासिक आदेश है जिसका लाभ दिल्ली एनसीआर के फ्लैट खरीददारों और आवंटियों को मिलेगा. साथ टी एंड टी इंफ्राजोन के वह सभी फ्लैट आवंटी जिन्हें 1 अप्रैल 2022 से ओसी प्राप्ति की तारीख के बीच फ्लैट का कब्जा दिया गया है, वह भी मुआवजे के हकदार होंगे. इसके लिए उन्हें इस आदेश का हवाला देते हुए यूपी रेरा या सिविल कोर्ट में वाद दाखिल करना होगा.

गाजियाबाद कोर्ट के वकील प्रेम प्रकाश मिश्रा के अनुसार अब कोई भी प्रमोटर परियोजना संपूर्ण होने की तय समय सीमा से ओसी प्राप्त होने तक की सीमा के बीच का ब्याज देने का देनदारी होगा यानी बिल्डर को जब तक ओसी नहीं मिल जाती तब तक उसके द्वारा ऑफर किया गया कब्जा पत्र मान्य ही नहीं होगा. ऐसे में आवंटी परियोजना के तय समय सीमा से बिल्डर द्वारा ओसी प्राप्त होने तक बिल्डर पर अपनी जमा धनराशि पर एमसीएलआर+1 प्रतिशत की दर से मुआवजे का हकदार होगा.

इस प्रकरण में रेरा का संपूर्ण आर्डर हिंदी में पढ़ें, क्लिक करें-

सौरभ गुप्ता बनाम मैसर्स टी एंड टी इंफ्रा जोन प्राइवेट लिमिटेड : देखें रेरा के आर्डर की मूल कॉपी

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