कृष्ण रूमी-
एक किसी आरजे ने सुसाइड कर लिया, उसपर लोग हैरान हो रहे हैं के ये तो इतनी खुश रहती थी ये कैसे सुसाइड कर सकती है, कमेंट्स हैं ऐसे ढेर सारे उसके इंस्टा अकाउंट पर।
भाई लोगों, वो जो गाना है ना जगजीत सिंह का के “तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या ग़म है जिसको छुपा रहे हो”, वो कैफ़ी आज़मी का लिखा हुआ है, और वो हकीकत के काफी करीब है, कैफ़ी आज़मी बहुत गहरा आदमी था।
हर हँसता हुआ चेहरा खुश नहीं होता, रोबिन विल्लियम्स और जिम कैरी जैसे वर्ल्ड के बेस्ट कॉमेडियंस डिप्रेशन का शिकार रहे हैं, कोई उन्हें देखकर नहीं कह सकता था के ये डिप्रेशन में है।
जो खुश मिजाज़ लोग होते हैं वो जब दुःख से भरते हैं तो अलग ही लेवल पर पहुँच जाते हैं, “आँखों में नमी हँसी लबों पर क्या हाल है क्या दिखा रहे हो”..
उन्हें दुखी होना ही नहीं आता, लोग उन्हें दुखी होते देखकर सांत्वना देने की बजाय सवाल करने लग जाते हैं के तू कैसे दुखी हो सकता है भाई तू तो सुपरस्टार है खुशमिजाज़ी का..
मगर ज़िन्दगी चेहरों से बहुत हट के और बहुत गहरी है..
इसलिए किसी अपने की मौत पर रोने वाले को रोने दिया जाता है, क्यूंकि रोना भी जरूरी है, हम लोग इस दुनिया में केवल खुशियां पाने नहीं आये हैं, ग़म भी मिलेंगे झोली भर के, उन के साथ सहज हो जाना चाहिए, आते ही रहेंगे।
कोई मुस्कुरा रहा है तो उसे खुश नहीं समझ लेना चाहिए, अंदर पता नहीं क्या आग लगी हो सकती है।
कोई अपना हो तो उस से महीने में एक बार तो खुलकर बात कर लेनी चाहिए, सुख दुःख डिसकस कर लेना चाहिए, खासकर तब जब आपको पता चल जाए के वो ज़िन्दगी के किसी दोराहे पर है या किसी बड़ी ट्रेजेडी से उभरने की कोशिश कर रहा है,
हर बन्दे के पास शेयर करने के लिए कुछ ना कुछ होता ही है, सुन लेना चाहिए अगर किसी के पास, आपको लगता है के कुछ सुनाने के लिए है तो।
मैं तो उसी को दोस्त मानता हूँ जिसके साथ आप रो सकते हैं, हँस तो इंसान किसी के भी साथ सकता है।
मूल खबर…
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