सहारा समूह ने लाखों निवेशकों का अरबों-खरबों रुपया हड़पा पर नेता अफसर पत्रकार सब चुप्पी साधे हैं…

Yashwant Singh : सहारा समूह के पापों के खिलाफ कोई मीडिया हाउस लिख नहीं सकता. कोई नेता-अफसर एक्शन नहीं ले सकता. क्योंकि सहारा के पैसे से सारे पलते-फलते-फूलते हैं. बस वो जनता ही परेशान है जिसने अपना पैसा सहारा में जमा किया, इस उम्मीद में कि डबल हो जाएगा. मेच्योरिटी के बाद भी अब सहारा वाले पैसे वापस नहीं कर रहे हैं.

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पूरे देश में लाखों लोग परेशान हैं. एक एजेंट ने आत्महत्या कर ली है. उसने अपने सुसाइड नोट में सुब्रत राय समेत सहारा के दस लोगों का नाम लिखा है जिनके कारण वह जान देने को मजबूर हुआ. सहारा का टॉप मैनेजमेंट निवेशकों के पैसे पर गुलछर्रे उड़ा रहा है लेकिन निवेशक अपना ही पैसा वापस पाने के लिए खून के आंसू रो रहे हैं… भारी दबाव के कारण पैसा सहारा में निवेश करने के लिए मोटीवेट करने वाले एजेंट जान देने लगे हैं…

सहारा से पीड़ित निवेशकों के सैकड़ों मैसेज मेल भड़ास को मिलते रहते हैं. पढ़िए एक जरूरी खबर और हो सके तो ट्टिवटर फेसबुक पर देश व राज्य के नेताओं अफसरों को टैग करके शेयर करिए ताकि गरीब निवेशकों के पक्ष में मुहिम चल सके.

खबर ये है…

पालिसी मेच्योर होने के बाद भी निवेशकों का पैसा दाबे बैठे है सहारा समूह, एजेंट ने की आत्महत्या

 भड़ास के फाउंडर और एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

Rahul Gupta Badaun दादा मेरे जीजा का पैसा सहारा में 1 लाख 50 हजार हो गया है। अब एजेंट उनसे बोलता है पैसे नहीं दे सकते हैं, इसको आप आगे फिर से डबल कर दो। जब कहा कि जमा किया हुआ मूल पैसा ही दे दो… ब्याज आदि को भाड़ में गया मान लेते हैं तो भी वह पैसा देने को राजी नहीं है। कुछ उपाय बताएं।

Manoj Kumar Mishra नेताओं, अफसरों एवं तमाम सेलेब्रिटीज़ के लिए सहारा किसी स्विस बैंक से कम नहीं है। उनके द्वारा अर्जित किया गया काला धन खपाने में सहारा का भरपूर सहयोग है… सहारा के सहारे सिर्फ पलने वाले ही नहीं हैं बल्कि उसे फलने फूलने में सहयोग करने वाले भी बहुत हैं। सुब्रत राय की जमानत नहीं होती अगर पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ठाकुर और कपिल सिब्बल के नेक्सस ने उनकी मदत न की होती। जब कोई मामला बहुत हाईलाइट हो जाता है तब न्यायपालिका का भ्रष्ट तंत्र धीरे धीरे ऑक्सीजन की सप्लाई कम करता है ताकि सच्चाई अपने आप दम तोड़ दें। फिर उसके बाद डील के अनुसार फैसला सुनाया जाता है। बहुत से गंभीर मामलों में जज द्वारा फैसला रिज़र्व रखने का चलन है …बहुधा फैसले डील पूरी करने के लिए रिज़र्व रखे जाते हैं …कई बार पैसे एडवांस में पूरे प्राप्त हो जाते हैं तो फैसला तत्काल हो जाता है …कई बार तय राशि का आधा पैसा ही पहुंचता है या अभी पहुंचा नहीं रहता है तो फैसला रिज़र्व रखा जाता है। यदि पूरी तय राशि पहुंच गई अगली तारीख में फैसला हक में दिया जाता है। अगर नहीं पहुंचा तो फैसले खिलाफ हो जाते हैं। मेरे कहने का अभिप्राय ये नहीं है कि सारे रिज़र्व फैसले इसी वजह से ही रिज़र्व किये जाते हैं। किंतु अगर केस हाइलाइटेड नहीं है तो ज्यादातर ऐसे ही निपटान होती है।

Kamlesh Sharma सहारा के साथ सरकार (सेबी) भी दोषी है, जिसके चलते निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है. सरकार को चाहिये की बीच का रास्ता निकाले जिससे निवेशकों की खून-पसीने की कमाई उन्हें वापस मिल सके…

Deepak Kumar Singh दुखद है मेहनत का लोगों का पैसा हड़पकर अमीरी का चोला ओड़े हुए सुब्रत राय को जीवन जेल में ही गुजारना है गरीबों की हाय लगेगी गरीबों बद्दुआएं तुझे मरने भी नहीं देंगे

Yogesh Garg मेरी विधवा सास सहारा पीड़ित है । अपने पेंशन की बचत लड़के के ब्याह के लिए सहारा में निवेश की थी अब वापस नही कर रहे है । 1लाख 90 हजार रूपये मैच्योरिटी के है । न जाने कब मिलेंगे

Kuldeep Singh Gyani हाय सहारा, न करो बेसहारा…

Nasir Hussain हमरा भी डूबा है। कभी मिल पायेगा क्या?

Abdul Noor Shibli bahut se log kahte hain ki yah maturity ke bad bhi nahin dete aur bolte hain 5 sal ke liye aur rakh dijiye

Nagendra Pati Tripathy ये लुटेरे हैं। डकैत कहीं लूटा माल वापस करते हैं भला।

Jitendra Narayan सचमुच दुखद स्थिति है…सबसे बुरे फँसे हैं बेचारे एजेंट…!

Anil Kumar Mishra सहारा के हरेक कार्यालय में जनता ताला जड़ दे।


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