सेलरी पैकेज नब्बे लाख से दो करोड़ सालाना बढ़वाने के बाद भी टीवी9 को गच्चा दे गए संत, देखें लेटरबाजी

कन्हैया शुक्ला-

संत तो ऐसे नहीं जाते…!

नाम संत है. पर करतब संतों वालें कहां! टीवी9 भारतवर्ष से संत प्रसाद का जाना गैर-पेशेवर आचरण का एक चरम नमूना है. इस इस्तीफे के प्रकरण को पत्रकारिता और प्रबंधन शिक्षा में गैर-पेशेवर आचरण के एक अध्याय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए. इसके लिए रॉ मैटेरियल का काम करेगा संत और टीवी9 एचआर के बीच हुई लेटरबाजी.

संत के इस्तीफे के पत्र के बाद हुए कुछ पत्रचार के कागजात भड़ास तक लीक होकर पहुंचे हैं. इन्हें नीचे दिया जा रहा है. पढ़िए इसे. ध्यान से पढ़िए, आराम से पढ़िए. न समझ आए तो बार बार पढ़िए. पूरी कहानी साफ साफ है.

संत प्रसाद टीवी9 भारतवर्ष छोड़ने को लेकर पहले माहौल बनाते हैं. छुट्टी पर जाते हैं. उनको लेकर अफवाहें उड़ती हैं. कोई कहता है वे एक नए लांच हो रहे चैनल में जाने वाले हैं. तो कोई कहता है कि वे पटना से नया वेंचर शुरू करेंगे. इस बीच संत छुट्टी से लौटते हैं और टीवी9 चैनल में हुई एक भरी मीटिंग में घोषणा करते हैं कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं, उनके जाने की बातें कोरी अफवाह हैं, कोई भी इस पर ध्यान न दे.

इस सार्वजनिक कसमें-वादे के बावजूद अफवाहों का दौर जारी रहता है. अब बात एबीपी न्यूज में जाने की होने लगती है. प्रबंधन दबाव में आता है. उसे पता चलता है कि एबीपी न्यूज से संत को आफर है. टीवी9 प्रबंधन संत प्रसाद की सेलरी नब्बे लाख सालाना से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर देता है. मतलब डबल से भी ज्यादा. संत प्रसाद खुशी खुशी इस तोहफे को कुबूल करते हैं. प्रबंधन भी राहत की सांस लेता है कि चैनल को नंबर वन बनाने की प्रक्रिया में योगदान देने वाले संपादकीय नेतृत्व के साथी को कहीं जाना नहीं चाहिए, उसका मनोबल डाउन नहीं होना चाहिए.

sant prasad

पर संत के मन में संतई कहां! वहां तो कुछ और चल रहा था. उन्होंने एबीपी न्यूज का आफर लेटर चुपचाप कुबूल कर लिया है. उस आफर लेटर की सेलरी से मैच कराती सेलरी टीवी9 भारतवर्ष में ले लेने के बावजूद उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला. वे एक रोज अचानक फोन बंद कर लेते हैं और आफिस नहीं जाते हैं. एक मेल भेजकर इस्तीफे का एलान कर देते हैं.

मतलब महीने भर तक नोटिस पीरियड में रहकर कामकाज के स्मूथ ट्रांसफर और स्मूत एग्जिट की परंपरा को पूरी तरह खारिज कर संत प्रसाद टीवी9भारतवर्ष को तगड़ा झटका दे डालते हैं. टीवी9 का मैनेजमेंट आपात स्थिति में फंस जाता है. टीवी9भारतवर्ष चैनल कई घंटों के लिए मझधार में फंस जाता है. प्रबंधन का संपर्क संत से किसी भी किस्म के प्रयास से नहीं हो पाया. ऐसे में इस्तीफा स्वीकार करना और चैनल के अन्य सहयोगियों को कामकाज सौंपने का आपद निर्णय लिया जाता है.

इसके बाद टीवी9 के एचआर और संत प्रसाद के बीच मेलबाजी होती है. पढ़िए संत क्या लिखते हैं और उसके जवाब में टीवी9 का एचआर क्या लिख रहा है.

संत ने टीवी9 को सिर्फ जाते समय ही गच्चा नहीं दिया. उन्होंने आते वक्त भी गच्चा दिया था. तब भी भड़ास पर उनकी गच्चेबाजी की खबर प्रकाशित की गई थी. उस खबर को पढ़ने के लिए नीचे पत्राचार के आखिर में दिए शीर्षक पर क्लिक करना होगा.

पहले पत्राचार देखें-

अब पढ़िए टीवी9भारतवर्ष के एचआर का जवाब….

संत की गच्चेबाजी की पुरानी खबरें-

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