संत मोदी जी के चरण ईकॉमर्स यानी ऑनलाइन सेलिंग के कारोबार की तरफ भी बढ़ चुके हैं!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

एक कहावत है , जहां – जहां पांव पड़ें संतन के , वहां- वहां बंटाधार… देश के आर्थिक और कारोबारी जगत में अपने मोदी जी के चरणों का प्रताप भी कुछ ऐसा ही है। साल 2014 में मोदी जी के आने के बाद से ही कुछ सेक्टर्स को छोड़कर उद्योग जगत के तकरीबन हर सेक्टर के लोग सरकारी नीतियों से अपना धंधा चौपट होने, मार्जिन घटने अथवा नुकसान होने का रोना रो रहे हैं।

जो सेक्टर अभी तक मोदी जी की कृपा दृष्टि से बचे हैं, उनमें बेहद अहम एक सेक्टर ईकॉमर्स यानी ऑनलाइन सेलिंग के कारोबार की तरफ अब मोदी जी के चरण बढ़ चुके हैं। कोरोना काल में यह उन इक्का दुक्का सेक्टर्स में था, जिसमें गिरावट की बजाय ऐसी तेजी देखने को मिली कि इस सेक्टर की ही तरफ तमाम उद्योगपति बढ़ चले। ऐसे में मोदी जी ने भी इसकी तरफ रुख करने का फैसला कर लिया।

इसी वजह से आजकल मीडिया यह खबरें दिखाने में जोर- शोर से जुट गया है कि कैसे देश हित में माननीय मोदी जी ईकॉमर्स में अमेजॉन और फ्लिपकार्ट का वर्चस्व तोड़ने के लिए कोई नई कानूनी व्यवस्था लाने जा रहे हैं।

यूं भी नोटबंदी से लेकर crypto पर 30 परसेंट टैक्स लगाने के बीच देश में कोई भी आर्थिक फैसला किसी भी सेक्टर पर लाया गया होगा तो वह भी मोदी जी देशहित में ही लाए हैं। ईंधन की कीमतें, महंगाई आदि भी देश हित में ही बढ़ रही हैं, इसमें भी किसी को कोई शक नहीं है।

अदानी दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बनने की तरफ बढ़ रहे हैं और अंबानी ने बिग बाजार हथियाने के बाद डील रद्द करके बिग बाजार को 24 हजार करोड़ का कर्जा देने वाले बैंकों और फ्यूचर रिटेल के शेयरों में पैसा लगाने वालों को कंगाल कर दिया है, यह भी देश हित में ही है और सभी को पता भी है। ईंधन की बढ़ती कीमतों, देश में इतने ज्यादा टैक्स और गिरते रुपए पर बाबा रामदेव ने भी अगर चुप्पी साधी है तो उसके पीछे देश हित नहीं तो और क्या है?

लिहाजा ईकॉमर्स में अगर अमेज़न, फ्लिपकार्ट का नाम लेकर मोदी जी देश हित में कुछ करने वाले हैं तो देश के ईकॉमर्स सेक्टर में कारोबार कर रहे सभी देशवासियों को कुर्बानी देने के लिए सदैव की तरह तैयार रहना ही चाहिए। अगर अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर लगाम लगाने की देशभक्ति की मुहिम में अन्य छोटे कारोबारी धंधा चौपट होने का रोना रोने लगेंगे तो मोदी जी आखिर देश में अच्छे दिन ला कैसे पाएंगे?

क्या लंबे समय से सारे हिन्दू मोदी- योगी की मुसलमानों को देशभक्त बनाने की मुहिम में अपने रोजगार, कारोबार, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, भ्रष्टाचार आदि मसलों पर लाख परेशानी होने पर भी मोदी- योगी जी से कोई सवाल न पूछ कर इतनी बड़ी कुर्बानी दे नहीं रहे हैं?

इस बार मौका ईकॉमर्स जगत के उद्योगपतियों को मिला है कि मोदी जी के चरण पड़ने के बाद अगर ईकॉमर्स चौपट भी हो जाए तो वे देश हित में उफ्फ तक न करें। हो सकता है कि कुछ देशद्रोही ईकॉमर्स उद्योगपति मोदी जी के फैसले पर यह कहकर सवाल उठाने लगें कि दरसअल यह कदम भी अदानी- अंबानी की मदद के लिए ही उठाया जा रहा है।

रिटेल जगत में तो दुनिया में नंबर वन कम्पनी अमेज़न की पिछले दो तीन साल से सीधी भिड़ंत मोदी जी के गुजराती भाई अंबानी से चल ही रही है। इतने कष्ट में होने के बावजूद महज देश हित में अंबानी जी ने भारत और एशिया का सबसे अमीर आदमी होने का ताज मोदी जी और अमित शाह जी के सबसे प्रिय अदानी जी को पहले ही दे दिया है।

अंबानी की इस कुर्बानी के बदले रिटेल जगत में अमेज़न का ताज अगर मोदी जी अंबानी को हासिल करने में मदद कर भी रहे हैं तो इसमें गलत क्या है? कुछ ईकॉमर्स उद्योगपति यह देशद्रोह भी कर सकते हैं कि मोदी जी पर इसमें भी अदानी का फेवर करने का आरोप लगा दें। मसलन क्या पता वे यह ही कहने लगे कि अदानी भी ईकॉमर्स में उतरने की तैयारी कर रहे होंगे इसलिए उनका रास्ता साफ करने के लिए मोदी जी नया कानून ला रहे होंगे।

ऐसे ही देशद्रोही मोदी जी पर पहले यह आरोप लगा भी चुके हैं कि टेलीकॉम में अंबानी की जियो और डिजिटल पेमेंट में पेटीएम के एकाधिकार के लिए मोदी जी ने ही खुलकर फैसले लिए हैं। लेकिन देशभक्त और हिंदुत्व के लिए जान तक कुर्बान करने को तैयार मोदी भक्तों को ऐसे अनर्गल आरोपों से कोई बरगला नहीं सकता। उन्हें अच्छी तरह से पता है कि मोदी जी के हर फैसले में देशहित ही छिपा होता है।



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