जज लोया मौत प्रकरण में जांच करा लेना बेहतर होता : रवीश कुमार

हर पत्रकार को अपने गोदी एडिटर से छिपा कर निरंजन टाकले और निकिता सक्सेना की रिपोर्ट दो-दो बार पढ़नी चाहिए

Ravish Kumar : जज लोया के केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि जांच नहीं होगी। दुख हुआ मगर सम्मान भी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना हो सकती है बशर्ते आप मंशा न जोड़ें, इसकी इजाज़त खुद अदालत देती है। इस देश में मामूली बातों पर जांच हो जाती है, एक जज की मौत से जुड़े इतने सवाल उठे तो बेहतर तरीका यही होता कि जांच के बाद आरोपों को बंद किया जाता।

ख़ैर कोई बात नहीं। कैरवान पत्रिका ने जज लोया की स्टोरी लगातार की है, मैंने इसे शेयर किया है। आज जो उछल रहे हैं वो डर से शेयर नहीं कर रहे हैं। अगर यही कोर्ट जांच के आदेश देता तो आज वही चुप रहते। पर ख़ैर। निरंजन टाकले और निकिता सक्सेना को दिल छोटा नहीं करना चाहिए। पत्रकारिता के इतिहास में उनकी रिपोर्टिंग क्लासिक की तरह दर्ज होगी। वही करेंगे जो आज मज़ाक उड़ा रहे हैं। दोनों की रिपोर्टिंग शानदार है और पुल्तिज़र के लायक है। हर नौजवान पत्रकार को अपने गोदी एडिटर से छिपा कर दोनों की रिपोर्ट दो दो बार पढ़नी चाहिए।

2 जी घोटाले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के तहत जांच हुई फिर भी सारे आरोपी बाहर निकल कर बुक लांच कर रहे हैं। बहुत बातें लिखी जा सकती हैं मगर कभी कभी चुप भी रहना चाहिए। बोलने के मौके आएंगे। जल्दी फैसले को पढ़ूंगा। अभी टानिक ले रहा हूं। आपको भी फैसले की कापी पढ़नी चाहिए। मीडिया की हेडलाइन से आधी बात ही पता चलेगी या एक ही बात। पहले सारी रिपोर्ट पढ़िए और फिर जजमेंट। तब पता चलेगा कि अदालत के सामने किन बातों को लाया गया, याचिका क्या थी, अदालत ने किन साक्ष्यों को देखा, फैसला दिया। जब आप इस तरह से रिपोर्ट पढ़ेंगे और जजमेंट पढ़ेंगे तो काफी कुछ सीखेंगे।

सिर्फ फैसले का स्वागत करना या खारिज करना ही काम नहीं है। ये काम कांग्रेस बीजेपी का है। आपका जीवन इन दोनों के जाल में फंस चुका है। शिकारी आएगा जाल बिछाएगा, जाल में दाना डालेगा, जाल में फंसना नहीं। फिर भी चिड़िया फंस जाती है। पत्रकार को अपना काम करते रहना चाहिए। अगर कैरवान कोई स्टोरी करेगा, फिर शेयर करूंगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगाई होगी। मुझे पूरा यकीन है।

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.



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