मीडिया में दो दशक गुजारने के बाद नेता क्यों बन गए शलभ मणि त्रिपाठी? (देखें वीडियो)

Shalabh Mani Tripathi : इस साल दो फ़िल्में देखीं, ‘धोनी’ और ‘सुल्तान’. दोनों से एक जैसा मैसेज मिला. कुछ करना है तो करना है. धोनी ने टीसी की नौकरी ना छोड़ी होती तो वो आज ज़्यादा से ज़्यादा हेड टीसी होते. ‘सुल्तान’ रिंग में ना उतरे होते तो सुल्तान ना होते, मीडिया में क़रीब दो दशक का लंबा वक़्त गुज़ारने के बाद भी धोनी जैसी बेचैनी महसूस होती रही. लिहाज़ा निकल पड़ा हूँ एक ऐसी मंज़िल की तरफ़ जिसका मुक़ाम मुझे ख़ुद नहीं पता.

पत्रकारिता के तमाम पेशेगत बंधनों को तोड़ चल पड़ा हूँ अपनी मातृभूमि- अपनी कर्मभूमि की तरफ़, हमेशा हमेशा के लिए. कुछ नया करने की मंशा के साथ. कुछ अच्छा करने की ललक के साथ. कल यानी 3 जनवरी से मुलाक़ात होगी, गोरखपुर-देवरिया-कुशीनगर में. दरकार है आपकी शुभ कामनाओं की. आपके आशीर्वाद की. जय हिंद!!

ज़िन्दगी की असली उड़ान अभी बाकी है,
ज़िन्दगी के कई इम्तिहान अभी बाकी हैं,
अभी तो नापी है मुठ्ठी भर ज़मीन हमने,
अभी तो सारा ………आसमान बाकी है!!

यूपी में प्रिंट और टीवी की पत्रकारिता करने के बाद भाजपा नेता बन चुके शलभ मणि त्रिपाठी की एफबी वॉल से.

भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया से रूबरू हुए शलभ मणि त्रिपाठी ने क्या कहा, सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/V_Anuj9uGZ4

मूल खबर :


लखनऊ में भाजपा में शामिल होने के दौरान की कुछ अन्य तस्वीरें देखने के लिए नीचे क्लिक करें…



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