मेधावी छात्रों का हक लूटने वाला भ्रष्टाचारी अनिल यादव अब अपने कुकर्मों की सजा भुगतेगा : शलभ

सक्रिय पत्रकारिता में रहते हुए यूं तो कई यादगार खबरें की, इन खबरों से तमाम पीड़ितों को इंसाफ भी मिला और गुनाहगारों को सजा भी. यकीन मानिए जब ऐसी खबरें अपने मुकाम तक पहुंचती है तो एक पत्रकार को भी वैसे ही सुख की अनुभूति होती है जैसे एक पीड़ित को इंसाफ मिलने पर. ऐसी ही थी यूपी लोकसेवा आयोग के भ्रष्टाचार की खबर. खुद भी प्रतियोगी छात्र रहा हूं. सिविल की तैयारियां की है. इसीलिए एक सामान्य परिवार के बेरोजगार का दर्द जानता हूं. उसकी आंखों में पलने वाले सपनों और माता-पिता, रिश्तेदारों की उम्मीदों का बोझ महसूस कर सकता हूं.

मैंने देखा है कि कैसे एक वक्त की रोटी का जुगाड़ ना कर पाने वाले मां बाप भी किस तरह बच्चों को अफसर बनाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देते हैं. ऐसे ही कुछ बच्चे आपको इलाहाबाद में सीढियों के नीचे बने छोटे छोटे कमरों में पढते हुए मिल जाएंगे. इन बच्चों की पीड़ा दिखती है मुझे. इसीलिए अंग्रेजों के जमाने में बनी ख्यातिलब्ध संस्था यूपी लोकसेवा आयोग को भ्रष्टाचार का कारखाना बनते देखा नहीं गया. सिलसिला शुरू हुआ आयोग के चेयरमैन अनिल यादव की नाकाबिलियत उजागर करने से और जा पहुंचा भर्तियों में साक्षात्कार के नाम पर होने वाले खेल के खुलासे तक.

इलाहाबाद में छात्र आंदोलनरत थे. जगह जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. इन सबके बीच भ्रष्टाचार के आरोपी अड़ियल चेयरमैन की अगुवाई में एक बार फिर पीसीएस प्री की परीक्षाएँ शुरू हो चुकी थीं. इसी दौरान एक दिन देर रात एक प्रतियोगी छात्र का फोन आया. उसने जो जानकारी दी वो हैरान करने वाली थी. उसके मुताबिक कल सुबह होने वाली पीसीएस की परीक्षा का पेपर बाजार में आ चुका था.  पैसे लेकर व्हाट्सऐप पर भेजा जा रहा था. हम और वो छात्र सक्रिय हुए तो कुछ ही देर में ये पेपर हम दोनों के व्हाट्सऐप पर भी था.

खबर चलाने में एक बड़ा संकट था. संकट इस बात का कि क्या गारंटी है कि पेपर सही है या गलत. खबर चला दी जाए और व्हाट्सऐप पर आया पेपर सही ना निकले तो अनावश्यक भ्रम फैलेगा. लिहाजा तय किया गया कि इम्तेहान शुरू होते ही पेपर की जांच कराई जाए. मैने रात भर जागते हुए सुबह होने का इंतजार किया. ये एक बड़ा मामला था लिहाजा आंखों से नींद गायब थी. सुबह होते ही मैने व्हाट्सऐप पर आया पेपर तत्कालीन डीजीपी श्री एके जैन और तत्कालीन एसटीएफ आईजी श्री सुजीत पाण्डेय को भेज दिया. इस अनुरोध के साथ कि कृपया इस पेपर की जांच अपने स्तर से कराएं.

परीक्षा शुरू हुई और पेपर मिलान के बाद थोड़ी ही देर में ये साफ हो गया कि पेपर लीक हो चुका है. प्रशासन से पुष्टि होते ही मैंने आईबीएन7 पर ये खबर ब्रेक कर दी. दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर, लखनऊ के अलीगंज और इलाहाबाद के तमाम हास्टलों से हमने इस खबर पर छात्रों के साथ लाइव शो किए. पर हद तो तब हुई जब ये सब करने के बावजूद चैयरमैन अनिल यादव ये मानने को तैयार नहीं थे कि पेपर लीक हुआ है. ये भी हो सकता है कि खुद इस खेल में शामिल होने का दंभ उनको ऐसा करने से रोक रहा था.

प्रशासन की रिपोर्ट और चौतरफा दबाव के बाद लोकसेवा आयोग को ये परीक्षा रद्द करनी पड़ी. बाद में अदालत ने अनिल यादव को बर्खास्त भी कर दिया. बाद में इस ख़बर के बदले अनिल यादव की तरफ से दर्जनों नोटिसें और कुछ मुकदमे मिले. पर इन बातों से तो कभी कोई दिक़्क़त रही ही नहीं. अब जबकि योगी जी अगुवाई में सरकार ने यूपी लोकसेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच कराने का ऐलान किया है तब मैं बधाई देना चाहूंगा उन तमाम छात्रों को जो इंसाफ के लिए लड़ते रहे, पिटते रहे और कई तो जेल भी जाते रहे. अनिल यादव की अगुवाई में आयोग ने तमाम मेधावी बच्चों का हक लूटा है लेकिन अब वक्त आ गया है अनिल यादव को अपने कुकर्मों की सजा भुगतने का.

शलभ मणि त्रिपाठी
स्वतंत्र पत्रकार
प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
लखनऊ

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…तो क्या तत्कालीन आईबीएन7 के यूपी हेड शलभ मणि त्रिपाठी को मारने की साजिश थी?

बसपा से निकाले गए नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आज खुलासा किया कि मायावती अपने खिलाफ न्यूज लिखने दिखाने वालों को मारने की साजिश रचती थीं. इस बयान के सामने आने के बाद लखनऊ के कई पत्रकारों के दिमाग में तत्कालीन मायावती सरकार का वह मंजर घूम गया जिसमें एनएचआरएम घोटाले को लेकर लगातार हत्याएं हो रही थीं. तत्कालीन आईबीएन7 चैनल के यूपी हेड शलभ मणि त्रिपाठी ने एनआरएचएम घोटाले की कई परतों का पर्दाफाश किया था और उनका चैनल लगातार इसे दिखा भी रहा था. इसको लेकर बसपा सरकार बहुत असहज थी.

(शलभ मणि त्रिपाठी)

उन दिनों शलभ मणि त्रिपाठी को हर तरह से घेरने, परेशान करने और जेल भेजने की कोशिश हुई. उन्हें एक बार हजरतगंज चौराहे से उठा लिया गया और थाने ले जाकर जेल भेजने की तैयारी थी. उनके उपर कई जिलों में ढेर सारे मुकदमें लाद दिए गए. वह जिले जिले जाकर गिरफ्तारी पर स्टे लेते रहे. सूत्रों का कहना है कि उन्हीं दिनों शलभ मणि त्रिपाठी को निपटाने के लिए शीर्ष स्तर पर योजना बनी थी. इसकी सुपारी पूर्वांचल के एक ऐसे शूटर को दी गई जो दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ा हुआ था. बहुत बाद में उस शूटर का नेपाल के आसपास इनकाउंटर हुआ.

सूत्रों के मुताबिक तब गृह मंत्रालय की तरफ से एक एडवाइजरी आईबीएन7 चैनल के संपादकों के पास भेजी गई जिसमें शलभ मणि त्रिपाठी की जान को खतरा बताया गया. इस पर मैनेजमेंट ने शलभ को दिल्ली बुलाना चाहा लेकिन शलभ ने लखनऊ छोड़ने से इनकार किया. बाद में उन्हें भी प्रबंधन ने विश्वास में लिया और उन्हें एडवाइजरी दिखाकर एलर्ट रहने को कहा. यह सबको पता है कि एनआरएचएम घोटाले में कई हत्याएं जेल में और जेल के बाहर हुईं.

इस स्कैम में तत्कालीन बसपा सरकार के शीर्षस्थ लोगों के फंसने और जेल जाने का अंदेशा था इसलिए जो भी इस घोटाले को लेकर सच बोल सकता था या बोल रहा था, उसे रास्ते से हटाने की कवायद की गई. शलभ मणि त्रिपाठी ने उन दिनों अपने जीवन और पत्रकारीय करियर का सबसे मुश्किल दौर देखा था. फिलहाल शलभ भाजपा के नेता हैं और यूपी भाजपा के प्रवक्ता भी हैं. पर आज नसीमुद्दीन के खुलासे के बाद लखनऊ के ज्यादातर पत्रकारों के दिमाग में उस समय के खौफनाक हालात के दृश्य तैरने लगे.

(लखनऊ से प्रकाशित वीकएंड टाइम्स ने उन दिनों आईबीएन7 के शलभ मणि त्रिपाठी पर हमले को लेकर कवर स्टोरी प्रकाशित की थी. पढ़ने के लिए उपरोक्त कवर पेज पर क्लिक कर दें.)


माया-नसीमुद्दीन के बीच बातचीत का टेप सुनने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें…

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गोरखपुर लोकसभा सीट से बीजेपी शलभ मणि त्रिपाठी को देगी टिकट!

Vikas Mishra : योगी आदित्यनाथ तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए। अब सवाल ये उठ रहा है कि गोरखपुर से सांसद कौन बनेगा। दरअसल सवाल ये उठना चाहिए था कि गोरखपुर से सांसद के उपचुनाव में बीजेपी का प्रत्याशी कौन होगा, लेकिन ये सवाल इस नाते नहीं उठ रहा, क्योंकि गोरखपुर में योगी के उत्तराधिकारी की जीत पक्की है। मेरी राय में तो बीजेपी को गोरखपुर लोकसभा सीट से शलभ मणि त्रिपाठी Shalabh Mani Tripathi को टिकट देना चाहिए। इसकी वजहें भी हैं।

शलभ योगी की तरह तेज तर्रार हैं, जरूरत पड़ने पर कड़क तो जरूरत पड़ने पर नरम हैं। पत्रकारों के बीच प्रचलित तमाम व्यसनों से शलभ कोसों दूर हैं। योगी और शलभ के बीच उम्र का फासला भी बहुत ज्यादा नहीं होगा, शलभ तीन-चार साल छोटे होंगे। योगी गोरखपुर के युवा सांसद रहे तो गोरखपुर को युवा सांसद ही मिलना चाहिए। शलभ मणि नेटवर्क 18 में एक दशक से ज्यादा वक्त तक उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे हैं। पूरे प्रदेश को जानते हैं। गोरखपुर के रहने वाले हैं, तो गोरखपुर को क्या चाहिए, उसे अच्छी तरह समझते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।

हाल ही में शलभ ने पत्रकारिता की पारी घोषित करके सियासत की दुनिया में नई पारी बीजेपी के साथ शुरू की है। इतिहास गवाह है कि तमाम पत्रकार अच्छे राजनेता साबित हुए हैं। अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर एमजे अकबर तक पत्रकारों के अच्छे राजनेता बनने की नजीर भी है। इसीलिए मेरी नजर में गोरखपुर लोकसभा सीट से शलभ मणि त्रिपाठी बेहतरीन उम्मीदवार हैं।

शलभ को मैं व्यक्तिगत रूप से भी जानता हूं। वो ऐसी जगह, ऐसे पद-पोजीशन में रहे, जहां दिमाग खराब हो जाने की गुंजाइश बहुत ज्यादा होती है, लेकिन शलभ हमेशा वैसे बने रहे, जैसे वो 12 साल पहले थे। उतने ही सभ्य, उतने ही विनम्र, उतने ही सौम्य और चेहरे पर उतनी ही मुस्कान। बड़ों को सम्मान, छोटों को स्नेह और हमउम्रों को सहयोग देने में शलभ ने कभी कोताही नहीं की। इसी नाते मेरी नजर में शलभ गोरखपुर से सांसद बनने के लिए सर्वथा योग्य हैं। गोरखपुर और आसपास के लोगों से मैं जानना चाहता हूं कि सांसदी के लिए शलभ मणि की उम्मीदवारी की दावेदारी पर उनकी क्या राय है..?

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत और गोरखपुर के निवासी विकास मिश्र की एफबी वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर शलभ मणि त्रिपाठी का जो कमेंट आया है, वह इस प्रकार है…

Shalabh Mani Tripathi बहुत देर तक सोचता रहा लिखूँ या ना लिखूँ, कुछ कहूँ या ना कहूँ, पर लगा कि विकास भइया ने इतनी बडी बहस छेड़ दी है तो ख़ामोश रहना भी मुनासिब नहीं होगा……… विकास भइया आपकी इस पोस्ट के एक एक शब्द से मेरे लिए आपका अथाह प्यार टपक रहा है, और ऐसा ही प्यार-लगाव उन सभी दोस्तों की प्रतिक्रियाओं में भी साफ़ दिख रहा है जो विकास भइया की इस पोस्ट के पक्षधर हैं……मैं आप सबके प्यार से सच में अभिभूत हूं, पर सच तो यही है कि गोरखपुर की जिस लोकसभा सीट की गरिमा आदरणीय योगी जी ने देश और दुनिया में बढ़ाई है, मैं ख़ुद को उस सीट के क़ाबिल नहीं पाता, मुझे अभी बहुत काम करना है, बहुत कुछ सीखना है, मुझसे ज़्यादा क़ाबिल, कर्मठ और बेहतर लोग हैं गोरखपुर में इस सीट के लायक, मैं सौभाग्यशाली हूँ कि आप सबका इतना स्नेह और भरोसा है मुझ पर, और मेरा सबसे बड़ा दायित्व है इसे हमेशा बरक़रार रखना, इसीलिए आप सभी का हृदय से आभार जताते हुए उन सभी को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया या फिर मेरी कमियाँ बता कर भी, खुद को और बेहतर बनाने की मेरी मुहिम में अपना महती योगदान दिया, आप सबके प्यार का हमेशा आकांक्षी रहूंगा, धन्यवाद. 

Vikas Mishra मैंने इसी सौम्यता का जिक्र अपनी पोस्ट में किया था Shalabh Mani Tripathi । आज जहां तुम हो, बेशक वहां से वैसा दिखता होगा, जहां की बात कर रहे हो, लेकिन मैं जहां पर हूं, वहां से देखता हूं तो वैसा दिखता है, जैसा मैंने अपनी पोस्ट में लिखा है। मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि जैसे टीवी 18 ग्रुप ने तुम्हारी पूरी प्रतिभा का उपयोग किया, बीजेपी भी तुम्हारे पूरे टैलेंट, कमिटमेंट और उत्तर प्रदेश में डेढ़ दशक की पत्रकारिता के अनुभव का पूरा इस्तेमाल करे। मैं बतौर पत्रकार किसी पार्टी का पक्षधर नहीं हो सकता, लेकिन व्यक्तिगत रूप से जो मेरे करीब है, उसकी उन्नति तो हमेशा चाहता हूं। मुझे यकीन है कि जो भी जिम्मेदारी तुम्हें मिलेगी, तुम साबित करोगे कि इसके लिए तुमसे बेहतर कोई और नहीं था।

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मीडिया टीम के शानदार प्रदर्शन के लिए शलभ मणि त्रिपाठी को योगी आदित्यनाथ ने किया सम्मानित

Shalabh Mani Tripathi : बेहतरीन पल… चुनावी प्रबंधन में बीजेपी की मीडिया टीम के शानदार प्रदर्शन के लिए हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, प्रदेश अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री श्री केशव मौर्य जी, प्रदेश उपमुख्यमंत्री श्री दिनेश शर्मा जी और संगठन मंत्री श्री सुनील बंसल जी के हाथों सम्मानित होने का गौरव हासिल हुआ. इस सम्मान समारोह के जरिए भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक विजय की ख़ुशियाँ सबने मिल कर बांटी.

टीवी पत्रकार से भाजपा के नेता बने शलभ मणि त्रिपाठी की एफबी वॉल से.

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मीडिया में दो दशक गुजारने के बाद नेता क्यों बन गए शलभ मणि त्रिपाठी? (देखें वीडियो)

Shalabh Mani Tripathi : इस साल दो फ़िल्में देखीं, ‘धोनी’ और ‘सुल्तान’. दोनों से एक जैसा मैसेज मिला. कुछ करना है तो करना है. धोनी ने टीसी की नौकरी ना छोड़ी होती तो वो आज ज़्यादा से ज़्यादा हेड टीसी होते. ‘सुल्तान’ रिंग में ना उतरे होते तो सुल्तान ना होते, मीडिया में क़रीब दो दशक का लंबा वक़्त गुज़ारने के बाद भी धोनी जैसी बेचैनी महसूस होती रही. लिहाज़ा निकल पड़ा हूँ एक ऐसी मंज़िल की तरफ़ जिसका मुक़ाम मुझे ख़ुद नहीं पता.

पत्रकारिता के तमाम पेशेगत बंधनों को तोड़ चल पड़ा हूँ अपनी मातृभूमि- अपनी कर्मभूमि की तरफ़, हमेशा हमेशा के लिए. कुछ नया करने की मंशा के साथ. कुछ अच्छा करने की ललक के साथ. कल यानी 3 जनवरी से मुलाक़ात होगी, गोरखपुर-देवरिया-कुशीनगर में. दरकार है आपकी शुभ कामनाओं की. आपके आशीर्वाद की. जय हिंद!!

ज़िन्दगी की असली उड़ान अभी बाकी है,
ज़िन्दगी के कई इम्तिहान अभी बाकी हैं,
अभी तो नापी है मुठ्ठी भर ज़मीन हमने,
अभी तो सारा ………आसमान बाकी है!!

यूपी में प्रिंट और टीवी की पत्रकारिता करने के बाद भाजपा नेता बन चुके शलभ मणि त्रिपाठी की एफबी वॉल से.

भाजपा में शामिल होने के बाद मीडिया से रूबरू हुए शलभ मणि त्रिपाठी ने क्या कहा, सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://youtu.be/V_Anuj9uGZ4

मूल खबर :


लखनऊ में भाजपा में शामिल होने के दौरान की कुछ अन्य तस्वीरें देखने के लिए नीचे क्लिक करें…

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शलभ मणि त्रिपाठी, गिरीश पांडेय, प्रकाश नारायण सिंह समेत पांच लोग गोरखपुर में 30 नवंबर को होंगे सम्मानित

नया मीडिया पर उपस्थिति, सक्रियता, कार्य अनुभव, पत्रकारिता अनुभव, रचनाकर्म को ध्यान में रखते हुए नया मीडिया मंच द्वारा गोरखपुर में एक आयोजन में पांच जनो को सम्मानित करने की घोषणा की गई है. इनके नाम क्रमश: शलभ मणि त्रिपाठी (ब्यूरो चीफ यूपी, आईबीएन 7), गिरीश पाण्डेय (वरिष्ठ संवाददाता, दैनिक जागरण गोरखपुर), प्रकाश नारायण सिंह (एबीपी न्यूज़), पश्यन्ती शुक्ला (ब्लॉगर, पूर्व टीवी पत्रकार), अर्चना मालवीय (लेखिका) हैं. नया मीडिया मंच का दावा है कि ये पांचो ही नाम सोशल मीडिया पर सशक्त उपस्थिति रखते हैं.

नया मीडिया मंच की तरफ से गोरखपुर में 30 नवम्बर को ‘समाज, राजनीति एवं नया मीडिया’ विषय पर संगोष्ठी होगी. इसकी अध्यक्षता दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के पूर्व कुलपति डॉ. राधे मोहन मिश्र करेंगे.  कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य वरिष्ठ पत्रकार एन.के सिंह (पूर्व प्रधान सम्पादक, लाइव इण्डिया) का होना है. बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व सचिव मानवाधिकार संतोष द्विवेदी एवं आईआरएएस अष्टानन्द पाठक उपस्थित रहेंगे. विशिष्ट वक्ता के तौर पर दीन दयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर में राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी एवं छत्तीसगढ़ भाजपा के मुखपत्र दीपकमल के सम्पादक पंकज कुमार झा उपथित रहेंगे.

नया मीडिया मंच गोरखपुर में ‘पं. विद्यानिवास मिश्र नया मीडिया सम्मान’ के नाम पांच लोगों को सम्मानित करेगा. आयोजन के संरक्षण का दायित्व नया मीडिया मंच संस्थापक स्वयं सेवी डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी के कन्धों पर हैं. जबकि नया मीडिया मंच के संस्थापक स्वयंसेवी डॉ सौरभ मालवीय एवं श्री प्रवीण शुक्ल पृथक इस आयोजन में संयोजक की भूमिका में हैं.

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