पैसे वालों के लिए कानून बहुत कमजोर हो चुका है… पढ़िए कुछ उदाहरण

Sharad Shrivastav : सलमान खान के ऊपर काले हिरण के शिकार और फुटपाथ पर सोये लोगों को कुचल कर मारने का मुक़द्दमा दसियों सालों से चल रहा है। सलमान कभी जेल नहीं गए। संजय दत्त सालों बाद अब जेल गए तो गाहे बगाहे पेरोल पर आते जाते रहते हैं। गोपाल कांडा को सजा दिलाने के लिए पहले गीतिका ने आत्म हत्या की उसके बाद गीतिका की माँ को भी आत्म हत्या करनी पड़ी ताकि गोपाल कांडा के खिलाफ केस चलता रहे। लेकिन फिर भी अब गोपाल कांडा जेल से बाहर हैं जमानत मिल चुकी है। और इस समाज के सम्मानित नागरिक हैं। सिरसा वापस पहुंचे तो लोगों ने पलक पांवड़े बिछा दिये उनके स्वागत में।

मारुति कंपनी के डेढ़ सौ से ज्यादा मजदूर आज दो सालों के बाद भी जेल मे हैं। कोई जमानत नहीं। कोई सुनवाई नहीं उनके परिवार के साथ जो बीत रही है। इन डेढ़ सौ मजदूर मे अधिकतर अपने परिवार को पालने वाले इकलौते थे। इनके जेल मे रहते इनका पूरा परिवार तबाह हो रहा है। सवाल ये है की कानपुर में एक पुलिस अधिकारी ज्योति मर्डर केस मे आरोपी उसके पति पीयूष को गले लगाता है पत्रकारों के सामने और उसे माथे पर चूमता है, कहता है कि ये अच्छा आदमी है।

जितने बड़े लोग हैं, पैसे वाले हैं, वो कानून के घेरे से बहुत दूर हैं। इनको देख कर आपको लगेगा कि कानून बहुत कमजोर हो चुका है।

पर ऐसा नहीं हैं, कानून इस देश का कितना मजबूत है, गरीब आदमी से पूछिये, मारुति के जेल मे बंद मजदूरों से पूछिये। जानिए क्या कारण है कि आज तक इन्हें कभी जमानत भी क्यों नहीं दी गयी। सरकार विदेशी निवेशकों के सामने एक उदाहरण रख रही है कि यदि आप भारत मे निवेश करते हैं और उसमें मजदूर अड़ंगा लगाते हैं तो उनका क्या हश्र होगा। अन्य मजदूरों के लिए एक्जाम्पल सेट किया जा रहा है। सरकार किस हद तक दमन कर सकती है ये दिखाया जा रहा है।

दिल्ली में एक कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत यूपी के गाजीपुर जिले के निवासी शरद श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.


 

Zafar Irshad : यह हैं कानपुर के स्वरुप नगर के डीएसपी राकेश नायक जो अपनी पत्नी ज्योति को मारने वाले करोड़पति व्यापारी पीयूष को प्यार-दुलार कर रहे हैं… नायक साहिब ने यह भी कहा की पीयूष कोई अपराधी थोड़े ही है, उससे गलती हो गयी, अब आगे से वो ऐसा नहीं करेगा… जैसे ही यह खबर और नायक साहिब का प्यार मीडिया में आया, वैसे ही डीएसपी साहिब को हटा दिया गया, और अब उनके ट्रांसफर की तैयारी हो रही है..लेकिन सवाल यह है.? कि क्या पुलिस सभी अपराधियों से ऐसा ही प्यार करती है, या केवल करोड़पति अपराधियों से..?

पीटीआई कानपुर में कार्यरत पत्रकार जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से.



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