वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह को बचाया न जा सका!

कई दिनों से कोविड से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह जी नहीं रहे। प्लाज़्मा समेत कई विधियों से उनकी जीवन रक्षा की कोशिश की गई लेकिन सब बेकार साबित हुईं।

शेष नारायण सिंह इस दौर के चंद बड़े और ज़मीनी पत्रकारों में से थे। मूलतः सुल्तानपुर के रहने वाले शेष जी पत्रकारिता के क्षेत्र में ताउम्र आम जन जीवन से जुड़ कर जन सरोकार के लिए कलम चलाते रहे। उनका निधन हिंदी जर्नलिज़म के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

देश ने एक खाँटी और बेबाक़ पत्रकार खो दिया।

शेष जी के निधन की सूचना के बाद सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का ताँता लगा हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा लिखते हैं-

अत्यन्त प्रिय और परम स्नेही शेष भाई, वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह भी नहीं रहे। थोड़ी देर पहले नोयडा के ज़िम्स में अन्तिम सॉंस ली। हे प्रभु।

शम्भूनाथ शुक्ल जी लिखते हैं-

विद्वान पत्रकार श्री शेषनारायण सिंह का जाना स्तब्ध कर गया। वे हमारी पीढ़ी के सर्वाधिक विज्ञ पत्रकार थे। कल पता चला था कि उनके लिए प्लाज़्मा का इंतज़ाम हो गया। निश्चिंत था कि वे जल्दी ही स्वस्थ हो कर घर पहुँच जाएँगे। सोचा था कि कोरोना के बाद एक दिन उनके दर्शनों हेतु ग्रेटर नोएडा जाऊँगा। पर वे बचाये नहीं जा सके। शेष जी की स्मृतियों को नमन।

जयशंकर गुप्ता-

हिम्मत नहीं हो रही, यह बताने के लिए कि वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली में हमारे गार्जियन सदृश अग्रज शेष नारायण सिंह जी नहीं रहे। प्लाज्मा चढ़ने के बाद लगा था कि शेष जी कोरोना और मौत को मात दे सकेंगे, लेकिन आज सुबह यह मनहूस खबर मिली। मन व्यथित है। नमन अग्रज। विनम्र श्रद्धांजलि।

डाक्टर राकेश पाठक-

अलविदा शेष नारायण सिंह.. वरिष्ठ पत्रकार ,राजनैतिक विश्लेषक शेष नारायण सिंह नहीं रहे। कोरोना संक्रमित होने के बाद वे नोएडा के अस्पताल में भर्ती थे।

उन्हें प्लाज़्मा की ज़रूरत थी। हम तमाम साथियों ने इस बावत सोशल मीडिया पर अपील की।

युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी तत्काल सक्रिय हुए और कल ही उनके प्रयास से शेष जी को प्लाज़्मा दिया गया था। देर रात उनका निधन हो गया।

न्यूज़ चैनल्स की सियासी बहसों में शेष जी की आवाज़ बहुत संजीदगी से सुनी जाती थी। देश ने एक खांटी और बेबाक़ पत्रकार खो दिया है।

नमन दद्दा शेष नारायण जी।

प्रभाकर मिश्रा-

कोरोना ने एक और पत्रकार को निगल लिया! वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह जी नहीं रहे। भावभीनी श्रद्धांजलि। शेष जी ने एक बार लिखा था ‘थोड़ा सफल हो जाओगे तो मुखबिर, दलाल या रीढ़विहीन बन जाओगे’। दिल्ली के पत्रकारों और पत्रकारिता को कितना बेहतर ढंग से जानते थे शेष जी। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।

यशवंत सिंह-

कल रात इत्मीनान से सोया। noida पुलिस कमिश्नर आलोक जी ने जानकारी दी कि Shesh भैया के लिए प्लाज़्मा की अतिरिक्त व्यवस्था भी लोकल स्तर पर कर ली गई है, ज़रूरत पड़ने पर इस्तेमाल होगा।

मन को संतोष हुआ। अब ठीक होकर लौटेंगे शेष भैया।

सुबह आँख खुली तो आलोक जी के मैसेज से ही पता चला शेष सर नहीं रहे।

उन्होंने जानकारी दी कि बिटिया टिनी भी पॉज़िटिव हैं। उन्हें उचित इलाज दिलाया जा रहा है। शेष जी का अंतिम संस्कार यहीं noida में किया जाएगा।

भड़ास जब शुरू किया था तो जिन कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने इस प्रयोग को जमकर सराहा और इस मंच के ज़रिए अपनी बात रखी, उनमें शेष जी भी थे। वे भड़ास पर रेगुलर लिखते थे। प्रोत्साहित करने और गाइड करने का काम भी लगातार करते रहते।

उन अकेलेपन और घनघोर संघर्ष के दिनों में शेष जी बड़े भाई और संरक्षक की तरह मुट्ठी बांध कर मेरे साथ खड़े रहते। पत्नी और बच्चों की भी चिंता करते क्योंकि उन्हें मेरी फ़ितरत पता थी। किसी की परवाह न करना। खुद में मगन रहना। वे मुझे घर परिवार का ध्यान रखने, परिजनों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए प्रेरित करते। उन्हें दिल से बड़ा भाई मान लिया था।

उनका video इंटर्व्यू बाक़ी था। सब तय था। मैं ग्रेटर noida के उनके घर एक दिन जाऊँगा। भोजन साथ करेंगे। video इंटर्व्यू किया जाएगा।

फ़ेसबुक पर वो दुखी थे। परिचितों पत्रकारों की लगातार मौतों को देख कर। सेहत के प्रति बेहद संजीदा थे। शराब को छुआ तक न था। जिम में अच्छा ख़ासा वक्त देने लगे थे। आख़िर तक उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही दिल्ली से ग्रेटर noida अपने घर जाते देखा।

शेष जी अद्वितीय थे।

उन जैसा न कोई हुआ न होगा।

जीवन से उन्हें बेहद प्यार अनुराग था। मनुष्यता के वे प्रहरी थे।

मेरे जीवन के निर्माताओं में से एक हैं।

अपने संघर्षों और मुश्किल दिनों की कहानियों को सुना सुना कर वो मुझे अनजाने में संबल देते थे, हार न मानने की प्रेरणा देते थे।

ऐसे सच्चे बड़े भाई, मेंटॉर और दोस्त को अलविदा कहूँ तो कैसे कहूँ!

वे बस शरीर से गए होंगे। उनके व्यक्तित्व का एक एक हिस्सा हम सब में समाया हुआ है!

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