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सरकारी धन के लुटेरों शोभना भरतिया, शशि शेखर आदि की मुकदमा रद्द करने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 26 अगस्त को

नई दिल्ली । सुप्रीम  कोर्ट ने बिहार के मुंगेर जिले के 200 करोड़ रुपए के दैनिक हिन्दुस्तान अखबार विज्ञापन घोटाला में प्रमुख अभियुक्त  दी हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष शोभना भरतिया की ओर से दायर स्पेशल लीव पीटिशन में सुनवाई की अगली तारीख 26 अगस्त तय की है। शोभना भरतिया ने स्पेशल लीव पीटिशन के जरिए बिहार के मुंगेर कोतवाली थाना में दर्ज पुलिस एफआईआर रद्द करने की प्रार्थना सुप्रीम कोर्ट से की है। मुंगेर में दर्ज एफआईआर में शोभना भरतिया के अलावा प्रधान संपादक शशि शेखर, अकू श्रीवास्तव, बिनोद बंधु, अमित चोपड़ा भी नामजद हैं। इनके खिलाफ धारा 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट 1867 की धारा 8बी, 14 और 15  के तहत प्राथमिकी दर्ज है।

नई दिल्ली । सुप्रीम  कोर्ट ने बिहार के मुंगेर जिले के 200 करोड़ रुपए के दैनिक हिन्दुस्तान अखबार विज्ञापन घोटाला में प्रमुख अभियुक्त  दी हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष शोभना भरतिया की ओर से दायर स्पेशल लीव पीटिशन में सुनवाई की अगली तारीख 26 अगस्त तय की है। शोभना भरतिया ने स्पेशल लीव पीटिशन के जरिए बिहार के मुंगेर कोतवाली थाना में दर्ज पुलिस एफआईआर रद्द करने की प्रार्थना सुप्रीम कोर्ट से की है। मुंगेर में दर्ज एफआईआर में शोभना भरतिया के अलावा प्रधान संपादक शशि शेखर, अकू श्रीवास्तव, बिनोद बंधु, अमित चोपड़ा भी नामजद हैं। इनके खिलाफ धारा 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट 1867 की धारा 8बी, 14 और 15  के तहत प्राथमिकी दर्ज है।

शोभना भरतिया, मालकिन, हिंदुस्तान टाइम्स इंग्लिश डेली और हिंदुस्तान हिंदी दैनिक

शशि शेखर, प्रधान संपादक हिंदुस्तान हिंदी दैनिक

इस आर्थिक अपराध में आरक्षी उपाधीक्षक (मुंगेर) एके पंचालर और पुलिस अधीक्षक (मुंगेर) पी. कन्नन ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट जारी कर दी है। दोनों पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी पर्यवेक्षण रिपोर्टों में नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप सत्य पाया है। पुलिस इस 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाला कांड की जांच में इस नतीजे पर पहुंच चुकी है कि सभी नामजद अभियुक्तों ने 3 अगस्त 2001  से भागलपुर स्थित मेसर्स जीवन सागर टाइम्स लिमिटेड नामक छापाखाना से दैनिक हिन्दुस्तान अखबार का फर्जी मुंगेर व भागलपुर संस्करण 30 जून, 2011 तक मुद्रित, प्रकाशित और वितरित किया। सभी नामजद अभियुक्तों ने जालसाजी और धोखाधड़ी की नीयत से मुंगेर और भागलपुर संस्करणों में 3 अगस्त, 2001  से 30 जून, 2011 तक पटना संस्करण का रजिस्ट्रेशन नम्बर-44348। 1986 मुद्रित किया और बिहार व केन्द्र सरकार के समक्ष गैर-निबंधित अखबार को निबंधित अखबार प्रस्तुत कर करोड़ों रुपया का सरकारी विज्ञापन प्राप्त किया। इस तरह इन लोगों ने सरकारी राजस्व की लूट मचाई।

पुलिस पर्यवेक्षण टिप्पणियों में पुलिस ने लिखाा है कि अभियुक्तों ने मुंगेर और भागलपुर के अवैध  हिन्दुस्तान संस्करणों में पटना के दैनिक हिन्दुस्तान का रजिस्ट्रेशन नम्बर (44348।1986) को 3 अगस्त 2001 से 30 जून 2011 तक प्रिंट लाइन में मुद्रित किया। अभियुक्तों ने इन संस्करणों में 01 जुलाई  2011 से 16 अप्रैल 2012 तक प्रिंट लाइन में रजिस्ट्रेशन नम्बर के स्थान पर ‘आवेदित’ मुद्रित किया। पुनः अभियुक्तों ने  इन संस्करणों के प्रिंट लाइन में 17 अप्रैल, 2012 से निबंधन संख्या- बीआईएचएचआईएन ।2011। 41407 मुद्रित करना शुरू कर दिया। पर्यवेक्षण टिप्पणियों में पुलिस ने लिखा है कि अभियुक्तों ने कुकृत्यों को छुपाने के लिए लगातार समाचार पत्र में अखबार के निबंधन संख्या को बदल-बदल कर मुद्रित और प्रकाशित किया।

इस मुकदमे में सभी नामजद अभियुक्तों ने पुलिस प्राथमिकी (मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011) को रद्द करने की प्रार्थना के साथ पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनल मिससेलिनियस  नं0-2951।2012 दायर किया। परन्तु, पटना उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर 2012 के ऐतिहासिक फैसले में सभी नामजद अभियुक्तों के मुकदमों को निष्पादित करते हुए  मुंगेर पुलिस को आदेश की तिथि से तीन माह के अन्दर पुलिस अनुसंधान पूरा करने का आदेश दिया। पुलिस जांच के घेरे में  देश की वरिष्ठ महिला पत्रकार मृणाल पांडेय भी हैं।  200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान सरकारी विज्ञापन  घोटाला में  दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के कई चर्चित अन्य संपादक भी पुलिस जांच के घेरे में हैं। इस कांड में पुलिस जांच के घेरे में अन्य नामी-गिरामी संपादकों में मृणाल पांडेय,  महेश खरे, बिजय भाष्कर, विश्वेश्वर कुमार, कंपनी उपाध्यक्ष (बिहार) योगेश चन्द्र अग्रवाल और कंपनी के निदेशक मंडल के अन्य सदस्य भी हैं।

मुंगेर से पत्रकार और वकील श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. संपर्क: 09470400813

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5 Comments

5 Comments

  1. डॉ. मत्स्येन्द्र प्र

    August 6, 2014 at 10:44 am

    यशवन्तजी, चालाक से चालाक अपराधी भी अपने गुनाह का कोई न कोई सुबूत छोड़ जाता है.

  2. salendra

    August 7, 2014 at 2:52 pm

    ShriKrishan ji ko Sadhuwad. Chalo, kum-se-kum ek to Mai-ka-Lal ne Inki Khabar Lee. Ye Malik/Managers Issi tarah ka Karodo ka Ghotala kar Rahey hain. Sochiye, Sirf Ek Branch sey Inhoney 200 Crore ka Ghotala kiya. Yadi Inkey Samoochey Edition ki Enquiry Sahi Dhang se kee Jaye to Hazaaron Crore ki Rajashwa Inhoney Gaban Kiya hoga. Govt of India ko bhi ab Chahiye ki Apni Darpok Manshikta se Niikal kar In Saarey Akhbaaron par Ankush Lagaye.
    Regards

  3. J K BHAGAT

    August 9, 2014 at 11:49 am

    नमस्ते , आज जो भी जघन्य से जघन्य अपराध बलात्कार चोरी छिना झपटी देश में तनाब का माहोल किसी भी बात को गलत ढंग से फैलाना एवं विदेष पैदा करना आदि सभी मीडिया के द्वारा किया जाता है ! बिहार में हिन्दुस्तान हिंदी अखवार ने बिहार सरकार को लूटा एवं बिहार सरकार के सुचना एवं जन -संपर्क बिभाग ने लुट में पूरा साथ देकर अपना भी घर की तिजोरी भरा ! कोई चाहे तो साबुत मेरे से ले सकते हैं ! इनके लुट में बिहार सरकार के कई बिभाग शामिल है 8)

  4. J K BHAGAT

    August 9, 2014 at 12:17 pm

    नमस्ते , ब्यभिचार जघन्य अपराध चोरी डकैती आदि अखवार के मुख पृष्ट पर छापेंगे लेकिन जो काम की बात हो जनहित की बात हो उसे गौण कर देंगे या भीतर कंही छोटे छोटे अच्छरों में छाप कर इतिश्री कर देंगे ! उदहारण के लिए आप पटना का हिंदी अखवार दिनाक ९/८/१४ के पृष्ट संख्या ७ पर कालम ४ के बिच में पटना हाई कोर्ट खोलने की अधिसूचना छापी गई है , क्या ये सही है ? इतनी महतवपूर्ण समाचार के लिए क्या ? सम्पादक को सम्बेदंशील नहीं होना चाहिए था ! अगर मुख्यपृष्ट पर जानकारी देकर भीतर छाप देतें तो आदरणीया अधिवक्ताओं को अधिसूचना वापस की जानकारी सहज मिल जाती! इसी पता चलता है की मीडिया की मानसिकता क्या है !

  5. J K BHAGAT

    August 9, 2014 at 12:46 pm

    [quote name=”J K BHAGAT”]नमस्ते , ब्यभिचार जघन्य अपराध चोरी डकैती आदि अखवार के मुख पृष्ट पर छापेंगे लेकिन जो काम की बात हो जनहित की बात हो उसे गौण कर देंगे या भीतर कंही छोटे छोटे अच्छरों में छाप कर इतिश्री कर देंगे ! उदहारण के लिए आप पटना का हिंदी अखवार दिनाक ९/८/१४ के पृष्ट संख्या ७ पर कालम ४ के बिच में पटना हाई कोर्ट खोलने की अधिसूचना छापी गई है , क्या ये सही है ? इतनी महतवपूर्ण समाचार के लिए क्या ? सम्पादक को 😀 सम्बेदंशील नहीं होना चाहिए था ! अगर मुख्यपृष्ट पर जानकारी देकर भीतर छाप देतें तो आदरणीया अधिवक्ताओं को अधिसूचना वापस की जानकारी सहज मिल जाती! इसी पता चलता है की मीडिया की मानसिकता क्या है ![/quote]
    😀

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