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साहित्य

ऑक्सीज़न से अच्छा इस दुनिया में कोई टॉनिक नहीं!

कोविड 19 के दुनिया पर छाए इस अंधेरे के बीच लेखक, कलाकार, गीतकार, संगीतकार रोज़ अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से उजाले की बात करते हैं, लोगों को सोचने और समझने का नया सिरा दे रहे हैं। राजकमल प्रकाशन के साहित्यिक लाइव कार्यक्रमों के जरिए एक-दूसरे से जुड़कर लेखक और साहित्यप्रेमी किताबों की बातें करते हैं, खाने के नए-नए नुस्ख़े साझा कर रहे हैं तो तनाव को दूर करने के टिप्स दे रहे हैं। जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा तो इस समय को मानवता के सर्वोत्तम प्रयास की तरह देखा जाएगा।

Stay At Home With Rajkamal के तहत फ़ेसबुक लाइव के जरिए आज बातें हुई तनाव को दूर करने की तो मुलाक़ात हुई सर पर ताज लेकर घूमने वाले बैंगन के राजा से। वहीं साहित्यकारों की संगत में लोगों ने सुने किस्से और कविताएं। राजकमल प्रकाशन लगातार यह कोशिश कर रहा है कि घर बैठे लोग किताबों से जुड़े रहें। ब्लॉग और साहित्यिक वेबसाइट पर किताबों से अंश उपलब्ध कराने के साथ ज्याद से ज्यादा किताबों के ई-बुक संस्करण उपलब्ध करवाने के लिए राजकमल प्रकाशन प्रतिबद्ध है।

लॉकडाउन में बैंगन के दो टुकड़े के साथ पाइए देश के कोने-कोने का स्वाद

बात बहुत पुरानी है। एक बार अकबर ने बीरबल से कहा कि, “कल हमने बैंगन की सब्ज़ी खाई और हमें बहुत अच्छी लगी। बीरबल ने बादशाह से कहा, “बादशाह, तभी तो उसके सिर पर ताज रखा जाता है।“ लेकिन, उसी रात अक़बर के पेट में दर्द हुआ। दूसरे दिन उसने बीरबल से कहा, “बैंगन तो बड़ा नामुराद निकला, उसे खाकर मेरे पेट में दर्द होने लगा।“ बीरबल ने कहा, “महाराज, तभी तो इसे बैगुल नाम दिया गया है। थाली में लुढ़कता जो रहता हैं।“

पुष्पेश पंत के साथ आज के स्वाद-सुख कार्यक्रम में ख़ास था – बैंगन।

लॉकडाउन का दूसरा पक्ष यह भी है कि घर पर रहकर अपनी जरूरतों को अपने आप पूरा करना। अगर आप परिवार के साथ हैं तो यह जिम्मेदारी और ख़ास हो जाती है कि कैसे कम चीज़ों से स्वाद और भूख दोनों को निभाया जा सके। ‘स्वाद-सुख’ का लक्ष्य यही है, ऐसे व्यंजनों को सामने लेकर आना जिसे आसानी से रसोई में मिलने वाले मसालों और सब्ज़ियों से बनाया जा सके।

पुष्पेश पंत का कहना है, “समय की पाबंदी का ख्याल मैं डिजिटल मीडियम में भी रखता हूँ। ठीक ग्यारह बजे मैं लाइव कार्यक्रम में उपस्थित हो जाता हूँ। यह मेरे लिए दोस्तों को याद करने, उनके साथ खाए तरह-तरह के व्यंजन को याद करने का बहाना भी है। दूसरा, जब हम घर में बैठे हैं कहीं आ जा नहीं सकते। ऐसे में क्यों न खाने के जरिए उन प्रांतों की सैर की जाए जहाँ हम जाना चाहते हैं या जहाँ का खाना हमें पंसद है।“

बैंगन बहुत ही मददगार और बहुमुखी सब्ज़ी है। सस्ता और बिना नख़रे वाला। पुष्पेश पंत के साथ आज बैंगन की यात्रा शुरू हुई पहाड़ी भरते से। वहाँ से आगे चले तो पहुंचे पंजाबी भरते के पास। स्वाद के पारखी पुष्पेश पंत का कहना है, “पंजाबी भरते का मुकाबला पहाड़ी भरता नहीं कर सकता। पंजाबी भरते में प्याज़, टमाटर, लहसून, मिर्च, हल्दी मिलाई जाती है और इसे ख़ूब भून कर पकाया जाता है।“

भारत में बैंगन के तरह-तरह के व्यंजन खाने को मिलते हैं। बिहार, पूर्वांचल, छत्तीसगढ़ में भरते से मिलता जुलता व्यंजन हैं -चोखा। लेकिन, भरता और चोखा में पकाने और खाने का अंतर बहुत स्पष्ट है। असम पहुंचकर इस भरते में तिल के बीज मिल जाते हैं और तैयार हो जाता है एक नया व्यंजन। गर्मियों में उड़ीसा में ‘दही बैंगन’ बहुत चाव से बनाया और पसंद किया जाता है।

वहीं, बनारस में इसे सादा तरीके से नमक लगाकर, सरसों के तेल में पकाया जाता है तो, कहीं कलौंजी और अचारी बैंगन खाने को मिल जाते हैं। सादा बैंगन कुछ-कुछ बंगाल के बैंगन भाजा की तरह होता है।

स्वाद-सुख में पुष्पेश पंत ने बैंगन से बनने वाले व्यंजनों पर बात करते हुए बताया कि भरवा बैंगन कई तरह के होते हैं। मसाले और गुड़ के मिश्रण से तैयार किया गया भरवां बैंगन खाने में खट्टा-मीठा होता है। इसमें बहुत तरह की सामाग्री मिलाई जाती है। तमिलनाडु में इसे ‘कचरीकई कुचाम्बु’ के नाम से बनाते हैं जिसका स्वाद आम बैंगन की सब्जियों से भिन्न होता है। आंध्र प्रदेश में इसी सब्ज़ी में मूंगफली भी मिला दी जाती है। वहीं हैदराबाद के बघार के बैंगन में मूंगफली और साभंर मसाले का भी पुट होता है। ये बिरयानी की टक्कर वाले होते हैं।

बात इतनी है कि अगर घर में सिर्फ़ गुड़ और ईमली है तो भी खट्टा-मीठा बैंगन बना सकते हैं। यदि ये दोनों नहीं हैं, तो नींबू और खटाई मिलाकर ही खट्टा-मिट्ठा बैंगन तैयार किया जा सकता है। यदि बैंगन भी कम है तो तरी वाले बैंगन बनाए जा सकते हैं।

लॉकडाउन से पहले फेज में शुरू हुए स्वाद-सुख के इस कार्यक्रम के 22 लाइव हो चुके है। सब्ज़ियों के बाद आगे बात होगी मसालों की और देश के कुछ ख़ास इलाकों के भोजन की। इस कार्यक्रम को लेकर पुष्पेश पंत की आगामी योजना है कि इसे वीडियों से बाहर थोड़ा और विस्तार देकर ‘व्यंजनों के एटलस’ के रूप में तैयार किया जाए।

पुष्पेश पंत के ‘स्वाद-सुख’ कार्यक्रम से एक बात तय है कि आने वाले उजले दिनों में खाने के मामले में हम ज्यादा आत्मनिर्भर हो जाएंगें।

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए जरूरी है ‘5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए’

लॉकडाउन से पहले भी परेशानियां थी। घर पर रहकर उन परेशानियों के साथ महामारी की चिंताएं मिल गईं हैं। पोस्ट लॉकडाउन के बाद क्या होगा इसकी चिंता भी लगातार लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में इन तनावों को कैसे दूर करें, इस विषय पर बहुत रोचक जानकारी साझा कि लेखक एवं चिकित्सक डॉ. अबरार मुल्तानी ने।

राजकमल प्रकाशन के फ़ेसबुक पेज से लाइव के जरिए लोगों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, “मानसिक तनाव को दूर करने के लिए सबसे जरूरी है तनाव को समझना और उसे सही तरीके से दूर करना। यह तनाव से लड़ने की सबसे पहली गोली है। दूसरी गोली है- हमारा रोज़ का रूटीन। छोटी-छोटी बातें हमारे जीवन में बहुत असर करती हैं। इसलिए जरूरी है सही तरीके से साँस लेना। उसके बाद जरूरी है सही भोजन। इसकी कमी, दिल और दिमाग दोनों पर असर करती है। हम चिड़चिड़े और अनियंत्रित होते जाते हैं। अगर, सही मात्रा में शरीर को ऑक्सीज़न मिलेगा तो शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करने लगेंगे।“

उन्होंने कहा, “ऑक्सीज़न से अच्छा इस दुनिया में कोई टॉनिक नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने शरीर को गहरी साँस लेना सिखाएं।“

बहुत सारी साकारात्मक बातचीत साझा करते हुए अबरार मुल्तानी ने कहा कि यह तनाव का स्वर्णकाल है। क्योंकि घर में रहकर ये हमें धूप से जोड़ रहा है। साफ हवा से जोड़ रहा है। धूप से अच्छा सकारात्मक कुछ नहीं। धूप हमारे अंदर बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है साथ ही शरीर में पॉज़िटीविटी का संचार करती है।

उन्होंने कहा, “धूप जीवन है, अमृत है, एक अनमोल औषधि है। डिप्रेशन और तनाव के समय अगर आपके पास धूप है तो जीत आपकी ही होगी। सुबह के समय आधे घंटे धूप में बैठना रामबाण इलाज है।“

पोस्ट लॉकडाउन से सकारात्मक सोच से ही हम बाहर निकल सकते हैं। तनाव मनुष्य का आवश्यक गुण है। हम तनाव में जी जान से कोशिश करते हैं। लेकिन, यह तनाव तब घातक हो जाता है जब हम इससे हार मान लेते हैं। इसे दूर करने की कोशिश नहीं करते। एक सच यह भी है कि तनाव हमसे हमारा काम बेहतर करवाता है। ठीक वैसे ही, जैसे बीमारियों के डर ने हमें आधुनिक दवाईयों का अविष्कार करना सिखाया।

इसके अलावा दुनिया में नेक काम करना, परोपकार करना भी तनाव दूर करने का एक महत्वपूर्ण इलाज़ है।

अबरार मुल्तानी की चर्चित किताब ‘5 पिल्स डिप्रेशन-स्ट्रेस से मुक्ति के लिए’ लॉकडाउन में पाठकों की सबसे पसंदीदा किताब है।

कुछ कहानियाँ, कुछ कविताएँ

राजकमल प्रकाशन के फ़ेसबुक लाइव कार्यक्रम के तहत रोज़ होने वाले साहित्यिक चर्चाओं में आज अपनी कविताओं के साथ लेखक समर्थ वशिष्ठ ने लेखक स्वेदश दीपक को याद किया। नौकरी की आपाधापी और निरंतर घूमते रहते जीवन से उपजे विचार समर्थ की कविताओं का मूल स्वर हैं।

राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित समर्थ वशिष्ठ का कविता-संग्रह ‘सपने में पिया पानी’ आज के ‘मिलेनियल्स’ की बेचैनी को प्रकट करता है। पेशे से इंजीनियर समर्थ की कविताओं में विज्ञान की शब्दावली भी देखने को मिलती है।

फ़ेसबुक लाइव के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया लेखक उमाशंकर चौघरी के कहानी-पाठ ने। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ‘दिल्ली में नींद’ उनका नया कहानी संग्रह। अपने कहानी संग्रह से पाठ करने के बाद उन्होंने बातचीत करते हुए कहा, “कोरोना का यह काल निराशा का काल है। लेकिन, ऐसे समय में साहित्य का साथ ही हमें इससे उबरने में मदद करेगा। पढ़ें, बात करें, यह एक सकारात्मक रास्ता है।“

राजकमल प्रकाशन लगातार यह कोशिश कर रहा है कि पाठकों के लिए ज्यादा से ज्यादा किताबें ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो सके। हर रोज के कार्यक्रमों की सूची एक दिन पहले राजकमल प्रकाशन के फेसबुक, ट्वीटर व इंस्टाग्राम पेज पर जारी होती है।

राजकमल प्रकाशन समूह के फेसबुक पेज पर पूरे दिन चलने वाले साहित्यिक कार्यक्रम में लगातार लेखक एवं साहित्यप्रेमी लाइव आकर भिन्न तरह की बातचीत के साथ एकांतवाश के अकेलेपन को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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