सुभाष मेहता-
राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले से करीब 25 वर्ष पहले ईटीवी राजस्थान से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मेहता ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सक्रिय पत्रकारिता को विराम देने का निर्णय लिया है। हालांकि वह बांसवाड़ा से ही संचालित बीबीसी राजस्थान digital news के साथ अप्रत्यक्ष भूमिका को निभाते रहेंगे क्योंकि यह पत्रकारिता से विराम लेने से पूर्व का एक आपसी करार था (विशुद्ध निशुल्क)।
वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मेहता ने यह निर्णय एनडीटीवी राजस्थान को छोड़ने के बाद लिया है। पत्रकार के रूप में उन्होंने लगभग सभी बड़े संस्थानों के साथ काम किया है। उन्होंने करीब पांच साल ई टीवी राजस्थान, तेरह साल राजस्थान पत्रिका और फिर कुछ समय के लिए इंडिया न्यूज राजस्थान, फर्स्ट इंडिया न्यूज और अंत में एनडीटीवी राजस्थान के साथ करीब दो साल काम करने के बाद पत्रकारिता को विराम देने का फैसला लिया है। साथ ही उन्होंने कलम की राह से इतर अध्यात्म की राह पर चलने का फैसला लिया है और वह आर्ट ऑफ लिविंग को आत्मसात करने जा रहे हैं।
यह निर्णय करने से पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया है जिसमें उन्होंने पत्रकारिता का सफरनामा को इंगित किया है।
जनवरी 2000 — वो बसंती महीना , जब पहली बार पत्रकारिता की रणभूमि में कदम रखा। E TV राजस्थान के साथ शुरुआत हुई, कंधों पर जिम्मेदारियों का भार था और हाथ में कलम – जो कभी सवाल बनकर उठी, तो कभी जवाब बनकर दुनिया को रास्ता दिखाया।
इससे पहले भी अख़बारों की दुनिया में फ्रीलांस के ज़रिए आवाज़ बनकर उभरा था, पर 2006 में राजस्थान पत्रिका जैसे विश्वसनीय मंच से जुड़ना मानो एक पत्रकार के रूप में मेरी आत्मा का पुनर्जन्म था। 12 वर्षों का वो लंबा, सघर्षपूर्ण लेकिन गौरवशाली सफ़र – जहां शब्दों ने समाज की सच्चाई बयां की और स्याही ने परिवर्तन की इबारतें लिखीं।
फिर अचानक क़िस्मत ने एक नया मोड़ लिया। शरीर ने जवाब दिया… स्वास्थ्य ने लड़खड़ाने पर मजबूर कर दिया। पत्रिका से नाता टूटा, और एक अनजाना अंधेरा सा छा गया। लेकिन रहमतों ने साथ नहीं छोड़ा – परिवार का सहारा, अपनों का विश्वास और ईश्वर की कृपा ने फिर से जीवन में उजाला किया। 2020 में इंडिया न्यूज राजस्थान और फर्स्ट इंडिया न्यूज़ से फिर एक नई सुबह हुई।
इसी बीच ” किशोर न्याय बोर्ड में” बच्चों के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका निभाने का मौका मिला, जहाँ मासूम मुस्कुराहटों में मुझे सच्चा सुख मिला।
पत्रकारिता – जो मेरी आत्मा की पहली पुकार थी – उसे हमेशा जिंदा रखा। इसी जुनून ने मुझे NDTV और फिर TV9 भारत वर्ष तक पहुँचाया।
इन 25 वर्षों का सफ़र —
कभी तालियों की गूंज, कभी आलोचनाओं की गहराई,
कभी संवादों में विश्वास, तो कभी खामोशियों में सुकून मिला।
कई चेहरों ने छुआ, कई दिलों ने अपना बनाया।
कभी टूटे, कभी जुड़े – लेकिन आत्मिक रिश्ता हर बार और मजबूत हुआ।
और अब… ज़िंदगी एक बार फिर दोराहे पर खड़ी है – जहां मंज़िल सामने है, पर रास्ता कुछ अलग है। पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं… “बीबीसी राजस्थान” मेरी आत्मा का हिस्सा है। यह रिश्ता आखिरी सांस तक बना रहेगा – चाहे मंच पर रहूं या उसके पीछे।
अब मेरे जीवन की दिशा बदल रही है – मैं किसी और संस्थान में सक्रिय भूमिका में नहीं दिखूंगा। यदि इस लम्बे सफर में कभी किसी को कोई बात चुभी हो, तो कृपया उसे भुला दें। क्योंकि… “रिश्ते जब दिल से बने हों, तो उनमें क्षमा ही सबसे सुंदर भावना होती है।”
अब एक नया अध्याय शुरू होने वाला है…
अब मेरी ज़िंदगी आध्यात्म की ओर अग्रसर है। पूज्य श्री श्री रविशंकर गुरुदेव के सान्निध्य में सेवा का जो अवसर मिला है, वो मेरे लिए एक सौभाग्य, एक वरदान और एक आत्मिक यात्रा की शुरुआत है। “अब कलम के शब्द नहीं, अब सेवा की मौन भाषा बोलेगी।” “अब न्यूज़रूम की दौड़ नहीं, अब ध्यान की गहराई में उतरने का वक्त है।”
चलते-चलते कुछ अल्फ़ाज़ और आत्मा की बात…
“मैं कलम था, मैं स्वर था, मैं आंदोलन था – अब मैं समर्पण हूं, मैं मौन हूं, मैं सेवा हूं।” “जिन्हें खोया उन्हें यादों में सजाया, जिन्हें पाया उन्हें आत्मा में बसाया।” “अब मंज़िलें नहीं बदलेंगी – अब रास्ता सिर्फ एक है… गुरुदेव के चरणों की सेवा।”




Akhand Pratap Tripathi
June 26, 2025 at 11:14 am
Apni samasya rakhni ho to kaise rakhe