Vivek Shukla-
कुछ दिन पहले प्रेस क्लब में एक जरूरी आयोजन हुआ। उस दिन दो तपे हुए पत्रकारों- उमेश जोशी और मधुरेन्द्र सिन्हा को सम्मानित किया गया। इन्हें सम्मानित किया एक्रीडिटेड जर्नलिस्ट एसोसिएशन की तऱफ से आयोजित कार्यक्रम में लेखक और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय और दिल्ली के पूर्व मंत्री योगानंद शास्त्री ने।
आमतौर पर हमारी मीडिया बिरादरी कुछ नए-पुराने संपादकों का ही गुणगान करती रहती है। इसलिए बहुत सारे जुझारू प्रतिबद्धता से पत्रकारिता करने वाले सहाफियों को उनका जायज हक नहीं मिल पाता। एक्रीडिटेड जर्नलिस्ट एसोसिएशन की चयन समिति ने सच में एक नई और बेहतर रिवायत का आगाज किया है। इसके लिए विजय शंकर चतुर्वेदी, सुनील नेगी और जगन नेगी की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
अब बात उमेश जोशी की। मुझे उनके जैसा हरफनमौला पत्रकार दूसरा नहीं मिला। उन्होंने प्रिंट, टीवी और रेडियो में अपने को साबित किया। वे जनसत्ता के बिजनेस एडिटर रहे। जनसत्ता ज्वाइन करने से पहले वे दूरदर्शन तथा आकाशवाणी में न्यूज रीडर बन चुके थे। उन्होंने देवकीनंदन पांडे जैसी रेडियो न्यूज की दुनिया की विभूति से खबरें पढ़ना सीखा था। वे अखबार की नौकरी, टीवी और रेडियो एक साथ कर रहे थे। तीनों ही जगहों में सर्वोत्तम। कुछ टीवी चैनलों के एडिटर भी रहे। ना जाने कितनी डॉक्यूमेंट्री भी बनाईं। पत्रकार बनने का जुनून उमेश जोशी जी को इतना रहाकि वे सरकारी नौकरी को छोड़कर जनसत्ता में आए थे।
मधुरेन्द्र सिन्हा गुजरे साढ़े चार दशकों से पत्रकारिता कर रहे रहे। नवभारत टाइम्स,सांध्य टाइम्स और आज तक में रहे। खेल, बिजनेस और राजनीति पर खूब चलती है उनकी कलम। अब भी लगातार लिखते रहते हैं। वे हमेशा कुछ नया करने और सीखने की फिराक में रहते हैं। संयोग से उमेश जी और मधुरेन्द्र जी की बेटियां भी मशहूर पत्रकार बन चुकी हैं।
अगर इस कार्यक्रम से हटकर बात करूं तो मुझे ना जाने कितने पत्रकार मिले जो अपने काम में सौ फीसद देने के अलावा ज्ञान के सागर रहे। हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स में अरुण कुमार,विनोद वार्ष्णेय, शशि झा, हरीश यादव, सीमा कुमार,सुजाता शकील, अमित सेन गुप्ता, संदीप नकई के नाम फौरन जेहन में आते हैं। ये सब डेस्क और रिपोर्टिंग में कमाल करते थे। कई साल पहले टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रभा चंद्रन थीं। उनकी एडिटिंग अतुलनीय हुआ करती थी। प्रभा जी बेजान कॉपी में भी जान डाल देती थीं। अब शायद अमेरिका में हैं। TOI के बिजनेस ब्यूरो के प्रभाकर सिन्हा के क्या कहने।
चलते-चलते बीबीसी के भरत शर्मा और नवभारत टाइम्स के खालिद अमीन का नाम लेना भी जरूरी है। ये दोनों नौजवान हैं। बहुत छोटी उम्र में ही ये अपने- अपने संस्थानों के स्टार बन चुके हैं। अपने काम को लेकर निष्ठा और ईमानदारी का चरम हैं खालिद और भरत।


