सेलरी न मिलने से परेशान यूएनआई के वरिष्ठ फ़ोटो जर्नलिस्ट ने आत्महत्या की

ममता मल्हार-

चेन्नई से खबर है कि UNI के सीनियर फोटोग्राफर ने आत्महत्या कर ली। 60 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा था। आश्चर्य है यह खबर मीडिया में कहीं दिखी नहीं।

क़ायदे से तो UNI प्रबंधन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज होने चाहिए। पर सवाल है कि केस कौन करवाएगा? दो चीजों से फुर्सत मिले तो अपनी बिरादरी के बारे में सोचें। एक अंधी चापलूसी से दूसरा अंधे विरोधों से। पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ ज्ञान बघारने की दुकानें चल रही हैं। चेन्नई तो दूर है मध्यप्रदेश में ही कई उदाहरण हैं। जो हक की बात करे उसे कॉर्नर कर दो। यह चल रहा है पत्रकारिता जगत में।

सब कुव्यवस्था की भेंट चढ़ रहे हैं। समाचार देने वाला गद्दार की श्रेणी में आ जाता है।

खबर बनाने वाले, खबर बनाते समय अकसर भुला दिए जाते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी कहते हैं- “चेन्नई में UNI के फोटोग्राफर कुमार ने 60 महीने से वेतन न मिलने, दुश्वारियों, तनाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली .लोकतंत्र का चौथा स्तंभ का दंभ भरने वाली बिरादरी को अपने स्वार्थों से उठकर सोचना होगा।”



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