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उत्तर प्रदेश

आलोचना के डर से उप्र सरकार ने आईपीएस को पीआईएल दायर करने से रोका

उत्तर प्रदेश सरकार ने आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को आरटीआई एक्ट से जुड़े तीन मामलों में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने एक मामले में आदेश किया था कि श्री ठाकुर अब राज्य सरकार की अनुमति प्राप्त करके ही पीआईएल दायर कर सकते हैं. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में 50 रुपये का अत्यधिक आरटीआई फीस होने, राज्य सूचना आयोग द्वारा दंड देने के बाद गलत ढंग से दंड माफ़ करने और आयोग द्वारा सरकारी अफसरों पर लगाए गए दंड की राज्य सरकार द्वारा वसूली नहीं होने के बारे में तीन पीआईएल दायर करने हेतु अनुमति हेतु आवेदन दिया गया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को आरटीआई एक्ट से जुड़े तीन मामलों में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने एक मामले में आदेश किया था कि श्री ठाकुर अब राज्य सरकार की अनुमति प्राप्त करके ही पीआईएल दायर कर सकते हैं. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में 50 रुपये का अत्यधिक आरटीआई फीस होने, राज्य सूचना आयोग द्वारा दंड देने के बाद गलत ढंग से दंड माफ़ करने और आयोग द्वारा सरकारी अफसरों पर लगाए गए दंड की राज्य सरकार द्वारा वसूली नहीं होने के बारे में तीन पीआईएल दायर करने हेतु अनुमति हेतु आवेदन दिया गया था.

जब इन आवेदन पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो श्री ठाकुर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर किया जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से इन तीन आवेदन पर शीघ्रता से निर्णय लेने के आदेश दिए. अब सरकार ने यह कहते हुए पीआईएल दायर करने से मना कर दिया है कि आवेदन के साथ प्रस्तावित पीआईएल की प्रतियां नहीं हैं और इसमें सरकार की आलोचना नहीं होने के बारे में शपथपत्र भी नहीं दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि इनमे राज्य अथवा केंद्र सरकार की आलोचना होगी अथवा नहीं.

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