यूपी में महिला एसआई से छेड़छाड़, आरोपी आईपीएस का बचाव

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने डीजीपी, यूपी से एसआई(सीपी), पीटीएस, मेरठ अरुणा राय द्वारा आईपीएस डी पी श्रीवास्तव के विरुद्ध दर्ज कराये गए मुकदमे की विवेचनाधिकारी तत्काल बदलते हुए इसकी विवेचना आईपीएस अलंकृता सिंह अथवा किसी अन्य महिला आईपीएस से कराये जाने और इसका पर्यवेक्षण स्वयं डीजीपी अथवा आईपीएस सुतापा सान्याल से करवाने जाने की भी मांग की है. साथ ही गलत विवेचना के लिए विवेचक पर आपराधिक कार्यवाही करने की मांग की है.

मौजूदा विवेचक सवरणजीत कौर, सीओ ऑफिस, मेरठ ने इस मामले में धारा 354 आईपीसी की अजमानतीय धारा हटाते हुए मात्र धारा 354(ए) की जमानतीय धारा रहने दी जिसके कारण अभियुक्त श्री श्रीवास्तव को तत्काल जमानत मिल गयी. डॉ ठाकुर ने रुपन देओल बजाज बनाम केपीएस गिल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि जिस प्रकार से श्री श्रीवास्तव ने अन्य अश्लील बातें कहने के साथ अपना हाथ बढ़ा कर सुश्री राय का हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और गाल सहला दिया वह धारा 354 आईपीसी में महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बलप्रयोग की श्रेणी में आता है क्योंकि धारा 349 आईपीसी में बल, धारा 350 में आपराधिक बलप्रयोग तथा धारा 351 में हमला की जो परिभाषा दी गयी है उसके अनुसार सुश्री राय के विरुद्ध किया कार्य स्पष्टतया धारा 354 आईपीसी में आता है.

संलग्न- डीजीपी को पत्र

सेवा में,
श्री ए एल बनर्जी,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय-  मु०अ०स० 111/014 धारा 354, 354(ए), 503 तथा 509 आईपीसी थाना- महिला थाना, मेरठ वादिनी सुश्री अरुणा राय, एसआई(सीपी) वर्तमान तैनाती पीटीएस, मेरठ की विवेचना अधिकारी बदलते हुए विवेचना अपने व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में करवाए जाने विषयक .

महोदय,

कृपया निवेदन है कि सुश्री अरुणा राय, एसआई(सीपी), वर्तमान तैनाती पीटीएस, मेरठ ने अत्यंत साहसिक कदम उठाते हुए वहां तैनात श्री डी पी श्रीवास्तव, डीआईजी पीटीएस मेरठ द्वारा अपने विरुद्ध दिनांक 23/04/2014 तथा उसके बाद किये गए यौन उत्पीडन के सम्बन्ध में दिनांक 31/05/2014 को मु०अ०स० 111/014 धारा 354, 354(ए), 503 तथा 509 आईपीसी थाना- महिला थाना, मेरठ पंजीकृत कराया.

मुझे इस मामले में सुश्री राय मुझसे काफी समय से विचार-विमर्श कर रही थीं पर हाल में उन्होंने मुझे अपने मेल दिनांक 16/06/2014 द्वारा समस्त वांछित अभिलेख प्रेषित करते हुए मुझे इस सम्बन्ध में किसी भी स्तर पर बात करने और उनकी तरफ से कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया. साथ ही इस मामले को हर स्तर पर उठाने का भी निवेदन किया ताकि इस प्रकरण में पूरी तरह न्याय हो सके. सुश्री राय ने अपने मेल में यह भी कहा है कि वह अब इस मामले में परदे के पीछे नहीं रहेंगी और इस मामले को गंतव्य तक पहुँचाने के लिए अपने नाम सहित सामने आएँगी. उन्होंने मुझे भी अपना नाम स्पष्ट रूप से किसी भी स्तर पर अथवा फोरम पर रखने को अधिकृत किया है क्योंकि उनका मानना है कि इस मामले में चूँकि उनकी कोई भी गलती नहीं है, अतः उन्हें अपना नाम छिपाने अथवा किसी भी प्रकार का कोई भी शर्म महसूस करने का कोई भी कारण नहीं है. उन्होंने मुझे श्री श्रीवास्तव द्वारा उनसे की गयी बातचीत भी न्यायहित में किसी भी स्तर पर प्रस्तुत करने को कहा है और यदि आप उचित समझेंगे तो मैं उक्त बातचीत की रिकॉर्डिंग आपके सामने प्रस्तुत कर दूंगी.

जहां काफी मशाक्कत के बाद उनकी एफआइआर हुई थी वहीँ एफआइआर के बाद भी गड़बड़ी हुई है जिसमे ख़ास कर विवेचनाधिकारी द्वारा किया गया अनुचित और आपराधिक कृत्य भी शामिल है.

इस मुकदमे की विवेचना सुश्री सवरणजीत कौर, सीओ ऑफिस, मेरठ को सुपुर्द की गयी. सुश्री कौर ने इस मामले में गलत विवेचना करते हुए धारा 354 तथा 503 आईपीसी का आरोप अभियोग से हटा दिया है. इसका एक गंभीर दुष्परिणाम यह रहा कि यह अभियोग मात्र जमानतीय धाराओं 354(ए) तथा 509 आईपीसी में शेष रह गया और श्री श्रीवास्तव इसका लाभ उठाते हुए दिनांक 14/06/2014 को मा० न्यायालय में हाजिर हो कर मौके पर ही जमानत प्राप्त करने में सफल हो गए.

सुश्री कौर द्वारा धारा 354 आईपीसी को हटाया जाना पूर्णतया गलत और नियमविरुद्ध है. कारण यह है कि एफआइआर के अनुसार दिनांक 23/04/2014 को अभियुक्त श्री श्रीवास्तव ने सुश्री राय को अपने कार्यालय कक्ष में बुला कर अश्लील और अभद्र बातें कहीं, उन्हें “तुम मादक हो”, रोज़ ऑफिस में चली आना आदि कहा. पर्ची पर ‘आई लव यू लिख’ कर उन्हें दिया. “आई लव यू और हंड्रेड टाइम्स आई लव यू” जैसी बात कही. “मैं ये सब मैं सेक्स के लिए नहीं कह रहा, हाँ तुम ATTRACTIVE हो यहाँ कि बाकी लडकियों से, लेकिन तुम्हें क्या लगता है कि मैं सेक्स खरीद नही सकता| अरे मेरी सैलरी डेढ़ लाख है” जैसी बातें कही.

इतना ही नहीं श्री श्रीवास्तव ने अपना हाथ बढ़ा कर उनका हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और गाल सहला दिया और साथ में कहा तुम नहीं समझ सकती कि तुम्हारे लिए मेरी फीलिंग्स क्या हैं.

इसके बाद अगले दिन दिनांक 24/4/2014 को भी असहज करने वाली बातें कही. इसके बाद कई बार बात करने के लिए अफसरों को भेज कर कहलवाया.

पुनः जब आरोपी अधिकारी को पता लगा कि सुश्री राय इस कुकृत्य कि लिखित शिकायत करने जा रही हैं तो उन्होंने उनपर ऊपर शिकायत न करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. आरोपी अधिकारी द्वारा दिनांक 02/05/2014 को सुश्री राय को शिकायत न करने की धमकी दी गई. दिनांक 02/05/2014 को पुनः सरकारी कक्ष में बुला कर कहा- “तुम्हे यहाँ वहाँ बात करने की जरुरत नहीं है तुम्हारी कोई प्रॉब्लम है तो मैं ही ख़त्म कर दूंगा. मैं यहाँ से चुनाव ख़त्म होते ही अच्छी पोस्टिंग लेकर चला जाऊँगा. मेरे डीजी उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्य सचिव से अच्छे सम्बन्ध हैं मैं एक मिनट में जोन में पोस्टिंग लेकर चला जाऊँगा. मैं रोज़ डीजी उत्तर प्रदेश से फ़ोन से वार्ता करता हूँ. जब तक मैं हूँ तुम क्यों घबराती हो. तुम चलाओ पूरा पी.टी.एस तुम जैसा चाहोगी वैसा होगा.”  बाद में भी सुश्री राय पर अपने स्तर से अपनी पत्नी के माध्यम से मुक़दमा नहीं लिखना का काफी दवाब बनाया.

धारा 354 कहता है- “assault or criminal force to woman with intent to outrage her modesty – whoever assaults or uses criminal force to any woman, intending to outrage or knowing it to be likely that he will there by outrage her modesty shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year but which may extent to five year and shall also be liable to fine.”

अर्थात किसी महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बलप्रयोग. इस अपराध का मुख्य तत्व किसी महिला पर हमला या आपराधिक बलप्रयोग इस आशय से करना है कि इससे उस महिला की लज्जाभंग हो.

जाहिर है कि जब श्री श्रीवास्तव ने जबरदस्ती आगे बढ़ कर अपना हाथ बढ़ा कर उनका हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और जबरदस्ती गाल सहला दिया तो इस मामले में स्वतः ही और निश्चित रूप से आपराधिक बलप्रयोग हो गया. ऐसे में इस बात की तनिक भी गुंजाइश नहीं रहती है कि इस अपराध को धारा 354 का अपराध नहीं माना जाए.

यह बात इस कारण भी बहुत स्पष्ट है क्योंकि धारा 349 आईपीसी में बल परिभाषित है जिसमे गति, गति परिवर्तन अथवा गतिहीनता कारित करना शामिल है. धारा 350 आईपीसी में आपराधिक बलप्रयोग निम्नवत परिभाषित है-“Criminal force- whoever intentionally force to any person, without that persons consent, in order to the committing of any offence, or intending by the use of such force to cause,  or knowing it to be likely that by the use of such force he will cause injury, fear or annoyance to the person to whom the force is used, is said to use criminal force to that another.” धारा 351 आईपीसी में हमला की परिभाषा में किसी प्रकार का अंगविक्षेप अथवा तैयारी शामिल हैं.

अर्थात यदि कोई भी व्यक्ति दुसरे व्यक्ति पर बिना उसकी इच्छा और रजामंदी के कोई भी अपराध कारित करने के लिए बल प्रयोग करता है वह आपराधिक बलप्रयोग है. साथ ही कोई व्यक्ति किसी अन्य की ओर कोई अंगविक्षेप करे या उसकी तरफ बढ़ने की कोई तैयारी करे तो वह हमला है. जाहिर है कि इस मामले में श्री श्रीवास्तव द्वारा आपराधिक कृत्य किया गया है और इस बात से स्वयं विवेचनाधिकारी सुश्री कौर भी इनकार नहीं कर रही हैं. यह भी स्पष्ट है कि यह आपराधिक कृत्य बलप्रयोग के माध्यम से हुआ है जहां श्री श्रीवास्तव ने अपने सीट से उठ कर जबरदस्ती अपना हाथ बढ़ा कर सुश्री राय का हाथ अपनी ओर खींचा, फिर उसे जबरदस्ती चूमा. साथ ही पुनः उनकी मर्जी के बगैर आपराधिक बलप्रयोग करते हुए उनका गाल सहलाया. साथ ही यह आपराधिक हमला भी है. जाहिर है इन कारणों से श्री श्रीवास्तव का यह कृत्य धारा 349 आईपीसी में परिभाषित बल, धारा 350 आईपीसी में परिभाषित आपराधिक बलप्रयोग तथा धारा 351 आईपीसी में हमला होने के कारण स्पष्टतया धारा 354 आईपीसी में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर आपराधिक बलप्रयोग और हमला की श्रेणी में आता है.

जब इतना कुछ गठित हुआ जो आपराधिक बलप्रयोग था, जिसमे जबरदस्ती बल प्रयोग गुआ और इस दौरान इच्छा के विपरीत बल प्रयोग करते हुए अपराध किया गया तो इस मामले में धारा 354 नहीं होने का कोई कारण तक नही है.

यह बात काफी पहले मिसेज रुपन देओल बजाज एवं एक अन्य बनाम कँवर पाल सिंह गिल एवं अन्य (1996 AIR 309, 1995 SCC (6) 194 ) में मा० सर्वोच्च न्यायालय ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था. इस मामले में एक आईपीएस अफसर श्री केपीएस गिल द्वारा एक आईएएस अफसर सुश्री रुपन बजाज को एक पार्टी में पीछे से चिकोटी काटने के अश्लील हरकत करने पर मा० सर्वोच्च न्यायालय ने श्री गिल को धारा 354 का स्पष्ट दोषी माना था. Since the word `modesty’ has not been defined in the Indian Penal Code we may profitably look into its dictionary meaning. According to Shorter Oxford English Dictionary (Third Edition) modesty is the quality of being modest and in relation to woman means “womanly propriety of behaviour; scrupulous chastity of thought, speech and conduct”. The word `modest’ in relation to woman is defined in the above dictionary as “decorous in manner and conduct; not forward or lewd; shamefast”. Webster’s Third New International Dictionary of the English language defines modesty as “freedom from coarseness, indelicacy or indecency; a regard for propriety in dress, speech or conduct”. In the Oxford English Dictionary (1933 Ed) the meaning of the word `modesty’ is given as “womanly propriety of behaviour; scrupulous chastity of thought, speech and conduct (in man or woman); reserve or sense of shame proceeding from instinctive aversion to impure or coarse suggestions”. In State of Punjab vs. Major Singh (AIR 1967 Sc 63) a question arose whether a female child of seven and a half months could be said to be possessed of `modesty’ which could be outraged. In answering the above question Mudholkar J., who along with Bachawat J. spoke for the majority, held that when any act done to or in the presence of a woman is clearly suggestive of sex according to the common notions of mankind that must fall within the mischief of Section 354 IPC. Needless to say, the `common notions of mankind’ referred to by the learned Judge have to be gauged by contemporary societal standards. The other learned Judge (Bachawat J.) observed that the essence of a woman’s modesty is her sex and from her very birth she possesses the modesty which is the attribute of her sex. From the above dictionary meaning of `modesty’ and the interpretation given to that word by this Court in Major Singh’s case (supra) it appears to us that the ultimate test for ascertaining whether modesty has been outraged is, is the action of the offender such as could be perceived as one which is capable of shocking the sense of decency of a woman. When the above test is applied in the present case, keeping in view the total fact situation, it cannot but be held that the alleged act of Mr. Gill in slapping Mrs. Bajaj on her posterior amounted to `outraging of her modesty’ for it was not only an affront to the normal sense of feminine decency but also an affront to the dignity of the lady -“sexual overtones” or not, notwithstanding.”

जाहिर है कि जो बात मा० सर्वोच्च न्यायालय ने रुपन देओल बजाज में कही वह बात पूरी तरह से सुश्री अरुणा राय के मामले में भी खरी उतरती है क्योंकि यह स्वाभाविक है कि जब एक डीआईजी रैंक का उम्रदराज अफसर एक युवा महिला के हाथ जबरदस्ती पकड़ता है, उसे अपनी ओर खींचता है और उनके गाल सहलाता है तो इससे अधिक एक महिला की लज्जाभंग का कोई भी उपक्रम नहीं हो सकता.

अतः यह अत्यंत कष्ट का विषय है कि इसके बाद भी सुश्री कौर ने इस मामले से धारा 354 हटा दिया, जो सर्वथा गलत और जाहिर तौर पर बेईमानी है. इतना ही नहीं, यह अपने आप में स्वयं एक आपराधिक कृत्य है क्योंकि सभी तथ्यों के रहने के बाद उन्हें जानबूझ कर सिरे से दरकिनार कर किसी अपराधी की मदद करना भी अपने आप में एक अपराध है.

इसके विपरीत धारा 354ए का जो अपराध सुश्री कौर ने लगाया है वह शारीरिक संपर्क/शरीर छूना, सेक्स की मांग, जबरदस्ती पोर्नोग्राफी दिखाए जाने तथा सेक्सी बातें/टिप्पणी करने आदि से जुड़ा हुआ है. यह सही है कि इस प्रकरण में धारा 354ए का भी अपराध हुआ है क्योंकि श्री श्रीवास्तव ने शारीरिक संपर्क/शरीर छूने का काम किया है और साथ ही सेक्सी टिप्पणी भी की है. लेकिन धारा 354ए का अपराध होने के साथ-साथ यह धारा धारा 354 का भी अपराध है क्योंकि जैसा मैंने ऊपर स्पष्ट किया इसमें आपराधिक बलप्रयोग और हमला भी है जिसे सुश्री कौर ने नज़रंदाज़ किया है.

इसके अतिरिक्त यह धारा 503 आईपीसी में आपराधिक अभित्रास का भी अपराध है क्योंकि इसमें श्री श्रीवास्तव द्वारा सुश्री राय के शरीर, ख्याति और नौकरी की क्षति की धमकी भी दी गयी और इसके माध्यम से सुश्री राय को संत्रास कारित किया गया है. मेरी जानकारी के अनुसार सुश्री कौर ने यह धारा भी विवेचना में हटा दी है.

सुश्री राय ने जो आरोप अपने एफआइआर में लगाए हैं उनके लिए उनके पास ना सिर्फ अपना अभिकथन है बल्कि सुश्री सुतापा सान्याल, आईपीएस की अध्यक्षता वाली शिकायत समिति के सामने दिया गया उनका अभिकथन, तमाम लोगों को उनके द्वारा बतायी गयी बात और साथ ही फोन रिकॉर्डिंग के भी पुख्ता सबूत हैं.

अतः यह पूरी तरफ अनपेक्षित है कि सुश्री कौर ने मात्र एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर को बचाने के लिए धारा 354 के अपराध को अभियोग से हटा दिया. यह बेहद कष्ट का विषय है कि सुश्री अरुणा राय ने जितनी हिम्मत और साहस का काम करते हुए, सारे जमाने से बिना घबराए, अपने व्यक्तिगत संस्कारों से जूझने के बाद, अपनी कथित बदनामी के भय को दरकिनार करते हुए, पुलिस में मात्र एसआई होने के बाद भी एक आईपीएस के सामने खड़ा होने की हिम्मत करने, समस्त पारंपरिक सोच का डट कर मुकाबला करने और अपना सर्वस्व दांव पर लगाने का जो फौलादी और साहसी कार्य किया, सुश्री कौर स्वयं एक वरिष्ठ पुलिस अफसर होने के बाद भी उसे मटियामेट कर दे रही हैं और हलके से विभागीय दवाब में पूरे मामले की गंभीरता समाप्त करने का कुत्सित और जघन्य प्रयास कर रही हैं.

मुझे विश्वास है कि आप इस मामले में सुश्री कौर के गलत कार्यों का किसी भी प्रकार से सहयोग नहीं करेंगे और मामले की गंभीरता, संवेदनशीलता और महत्ता को देखने हुए तत्काल इसके सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही करेंगे.

अतः उक्त मामले के सन्दर्भ में मैं आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-

1.  प्रकरण की गंभीरता तथा प्रस्तुत तथ्यों/साक्ष्यों के आधार पर तत्काल इस मामले का विवेचनाधिकारी बदलने की कृपा करें और यह प्रकरण सुश्री अलंकृता सिंह अथवा किसी अन्य महिला आईपीएस अफसर को विवेचना हेतु देने की कृपा करें

2.  इस प्रकरण की विवेचना अपने स्वयं अथवा वरिष्ठ आईपीएस सुश्री सुतापा सान्याल के पर्यवेक्षण में करवाया जाना सुनिश्चित करें

3. गलत विवेचना करने और गलत ढंग से आपराधिक धारा जानबूझ कर निकाले जाने और अभियुक्त को इसका गलत लाभ देने के लिए वर्तमान विवेचनाधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही सहित समस्त विधिक कार्यवाही करने की कृपा करें.

पत्र संख्या- NT/Aruna/01                                       
दिनांक-18/06/2014
भवदीय
डॉ नूतन ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525

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Comments on “यूपी में महिला एसआई से छेड़छाड़, आरोपी आईपीएस का बचाव

  • ग्रेट मामला है जी. इसमें तो सीधे सीधे आईपीएस साहब को जेल बनता है जी.

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  • Really 🙁 . but we all are there to support Aruna Ji. We are spreading message and everyone is there with Aruna she is not alone its a misbehave with humanity not with a lady only . He will be in the Jail very soon.

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  • I request all witnesses to please come forward and help the lady. Trust me, if you help a lady today, we all will protect your sisters & daughters tomorrow.
    Please chup naa rahe, aage badhen. Insaniyat se he duniya chalegi. Please come and record the truth.

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  • shruti vig says:

    What a shame.policewale he safe nahi aur justice milne main unhe itni der aur problems face karni pad rahi hain to aam aadmi ka kya haal hoga is dese main.Aruna di we r wid u.

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