सिविल सेवा परीक्षा से सी-सैट हटाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हिन्दी भाषी छात्र

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सी-सैट की परीक्षा का हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के छात्र विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हिन्दी भाषी छात्रों का प्रदर्शन कई दिन से जारी है। नीलोत्पल निडाल और पवन कुमार पांडेय सी-सैट हटाने की मांग को लेकर 9 जुलाई से आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में धरने में शामिल हो रहे छात्रों का कहना है कि किसी अन्य भारतीय भाषा के माध्यम से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को अंग्रेजी की वजह से किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आनी चाहिए।

 

गौरतलब है कि 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में 1122 प्रतियोगी कामयाब हुए जिनमें सिर्फ़ 26 हिंदी माध्यम के हैं। प्रतियोगी छात्र इसके लिए यूपीएससी द्वारा 2011 से लागू की गई सी-सैट परीक्षा प्रणाली को ज़िम्मेदार मानते हैं। चूंकी मुद्दा राज भाषा हिन्दी तय़ा अन्य भारतीय भाषाओं के बहुसंख्यक छात्रों से जुड़ा हुआ है इसलिए उनके आंदोलन को सियासी समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को देर शाम, बदायूं से सांसद धर्मेद्र यादव ने छात्रों के बीच पहुंचकर उन्हें आश्वासन दिया कि वे उनकी मांगों का संसद में उठाएंगे।

हिंदी भाषी छात्र मानते हैं कि सी-सैट परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए ज़्यादा फायदेमंद है। परीक्षा के इस नए स्वरूप ने हिन्दी भाषी प्रतियोगी छात्रों के लिए सफलता के रास्ते सीमित कर दिए हैं।

2013 की सिविल सेवा परीक्षा में सफल रहे हिंदी छात्रों का प्रतिशत मात्र 2.3 ही है। जबकि 2003 से 2010 के बीच ऐसे छात्रों का प्रतिशत हमेशा 10 से ज़्यादा रहा है। 2009 में यह प्रतिशत 25.4 तक था। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले छात्र इसके लिए सी-सैट परीक्षा प्रणाली को ज़िम्मेदार मानते हैं।

छात्रों का कहना है कि अंग्रेज़ी में बनाए गए पेपर का हिन्दी अनुवाद अक्सर बेहद जटिल और भ्रामक तरीके से किए जाता है। मानक उत्तर पुस्तिका भी सिर्फ़ अंग्रेज़ी में ही बनती है। यही नहीं यूपीएससी साक्षात्कार के दौरान छात्रों को अंग्रेज़ी में जवाब देने के लिए मजबूर करती है। तर्क दिया जाता है कि सिविल सेवा परीक्षा में कौशल और प्रतिभा के दम पर कामयाबी मिलती है.

अनशन पर बैठे नीलोत्पल निडाल कहते हैं, “सवाल कौशल या प्रतिभा का नहीं, मुद्दा अभ्यास की पृष्ठभूमि का है। मानविकी या कला वर्ग के छात्रों के लिए सी-सैट परीक्षा इसलिए मुश्किल है क्योंकि यह उनकी पृष्ठभूमि पर आधारित नहीं है। अंग्रेज़ी और गणित के छात्रों के लिए आसान है क्योंकि वे हमेशा से इसी में अभ्यास करते रहे हैं। यह समान अवसर के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है। ज्ञान को कसौटी बनाने के बजाय अभ्यास के तरीक़े को कसौटी बना दिया गया है।”

यूपीएससी ने माना है कि निगवेकर समिति ने 2012 में अपनी रिपोर्ट में छात्रों के इन तर्कों को स्वीकारा था. रिपोर्ट में कहा गया था कि सी-सैट परीक्षा शहरी क्षेत्र के अंग्रेज़ी माध्यम के छात्रों को फ़ायदा पहुंचाती है।

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