सात वर्षों बाद खुला उत्तरांचल प्रेस क्लब

देहरादून : कोर्ट के लचीले रवैये, जिला प्रशासन व राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते लगभग सात साल बाद उत्तरांचल प्रेस क्लब कल रविवार को विधिवत पूजा के बाद खुल गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रेस क्लब को भरपूर मदद देने के साथ ही अन्य समस्याओं पर समुचित समाधान का आश्वासन दिया। मेयर विनोद चमोली क्लब के सौंदर्यीकरण के दस लाख और विधायक राजकुमार ने अपनी निधि से इतनी ही धनराशि देने की धोषणा की। घोषणा तो (एक लाख) न्यूज चैनल नेशन ने भी की जो कि घोषणा करने वाला इकलौता मीडिया संस्थान है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का ध्यान इन सात सालों से बंद पडे सामानों के गायब होने व टूट फूट की तरफ भी दिलाया गया। बंद के दौरान प्रेस क्लब का एक एक सामान मसलन टीवी कम्प्यूटर, एसी, पंखे व कागजात आदि चोरी हो गए। पत्रकारों ने अन्य संगठनों की ही तरह अपनी समस्याओं से संबंधित दो अलग अलग ज्ञापन दिये। हालांकि मुख्यमंत्री ने कोई स्पष्ट घोषणा तो नही की लेकिन अपनी सीमाओं और सीमित संसाधन का उल्लेख करते हुए सब पर गंभीरता पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कुछ मामलों में कमेटियां की बात कही तो पत्रकार कल्याण कोष में पत्रकारों की सहभागिता पर भी सहमति जतायी । उन्होंने प्रेस क्लब को संवारने में जो भी कमी रह जाएगी उसे पूरा करने की बात कही। समाजवादी पार्टी के नेता विनोद बडथ्वाल ने उत्तर प्रदेश सरकार से मदद दिलवाने का आश्वासन दिया। ज्ञापन में पत्रकारों का बीमा , मृतक आश्रितों की सहायता, प्रेस क्लब के जीर्णोद्धार , अथिति गृह का निर्माण कराने की की मांगे शामिल थीं । पूजन समारोह में विधायक गणेश जोशी,  लालचंद, उमेश अग्रवाल, सुरेन्द्र कुमार, अशोक वर्मा,रविंद्र जुगरान, सूर्य कांत धस्माना,  वरिष्ठ पत्रकार चारुचंद , चंदोला,  सुभाष गुप्ता व जनकवि अतुल शर्मा सहित उम्मीद से अधिक पत्रकार व विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग मौजूद थे।

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Comments on “सात वर्षों बाद खुला उत्तरांचल प्रेस क्लब

  • द्रोणाचार्य says:

    जुवे का अड्डा बन जायेगा कुछ दिनों के बाद , दरअसल जितने भी पत्रकार हैं सारे के सारे मजीठिया की लड़ाई की वजह से कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं बड़े अख़बारों ने मजीठिया तो दूर इसकी वजह से सैलरी भी देना बंद कर दिया अरे यार शाम को जब पत्रकार घर जायेगा तो बीवी बच्चों के लिए कुछ तो ले जायेगा। हरीश रावत जी से विनम्र निवेदन है ये १० लाख ५० लाख के झाड़ फूंक से अच्छा अपने श्रम आयुक्त को मजीठिया के लिए दबाव बनाने को बोलें। नहीं तो कुछ दिनों के बाद पत्रकार खुद लिखेगा फलाना अख़बार का पत्रकार ड्रग्स सप्प्लायर, और आपके प्रेस क्लब के बहार लिखा होगा जाफरान मार्किट प्राइस से १० रूपये सस्ता thanks

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