कोरोना से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ राजद्रोह के आरोप से मुक्त

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को सुप्रीम कोर्ट से एक कानूनी मामले में राहत मिली है. आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ हिमाचल प्रदेश में दर्ज राजद्रोह संबंधी एफआईआर को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है।

ये एफआईआर छह मई को शिमला के कुमारसेन थाने में भाजपा नेता श्याम ने दर्ज कराई थी. इसमें विनोद दुआ द्वारा अपने YouTube शो में प्रधान मंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक टिप्पणी करने के कारण राजद्रोह की धाराएं लगाई गईं थीं.

न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने दुआ के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक एक समिति अनुमति नहीं दे देती, तब तक पत्रकारिता का 10 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले किसी मीडिया कर्मी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। पीठ ने कहा कि दूसरी प्रार्थना के संदर्भ में कोई भी भरोसा विधायिका के क्षेत्र का अतिक्रमण होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केदार नाथ सिंह के मामले में उसके 1962 के फैसले के अनुसार ही प्रत्येक पत्रकार की रक्षा की जाएगी।

इससे पहले न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने पिछले साल छह अक्टूबर को दुआ, हिमाचल प्रदेश सरकार और मामले में शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को इस मामले में विनोद दुआ को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से प्रदत्त संरक्षण की अवधि अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दी थी।

भाजपा नेता श्याम ने शिमला जिले के कुमारसैन थाने में पिछले साल छल मई को राजद्रोह, सार्वजनिक उपद्रव मचाने, मानहानिकारक सामग्री छापने आदि के आरोप में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी और पत्रकार को जांच में शामिल होने को कहा गया था। श्याम ने आरोप लगाया था कि दुआ ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर कुछ आरोप लगाए थे।

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